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एक पक्के पुल के लिए तरस रहे हजारों ग्रामीण, लोक सभा चुनाव बहिष्कार की भी दी चेतावनी

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प्रभावित क्षेत्र के युवाओं ने पक्के पुल के लिए संघर्ष करने की ठानी…

Mithiliesh Pathak

मिथिलेश पाठक

 

 

 

 

 

 

श्रावस्ती: जिले के बीचों बीच राप्ती नदी बहती है, जो हर साल बरसात के समय अपने साथ लाती है बेहद खतरनाक तबाही। जिसके आगोश में आकर सैकड़ों लोग प्रभावित होते हैं। कई लोगों की जाती है जान। तो कहीं सैकड़ों बीघा खेती की जमीन नदी में समाती है, तो कहीं घर के घर ही नदी में समा जाते हैं। विकास खण्ड इकौना के ककरा घाट पर ग्रामीण पक्के पुल की वर्षों से मांग कर रहे हैं, परन्तु मिलता है तो सिर्फ और सिर्फ वादा।जिले के विकासखंड इकौना इलाके के ककरा घाट पर  पक्के पुल की मांग को लेकर आसपास के दर्जनों गांवों के ग्रामीणों ने एक मुहिम शुरू कर दी है। सोशल मीडिया के माध्यम से इलाके के युवाओं ने संघर्ष शुरू कर दिया है।

इकौना से लक्ष्मणपुर सिरसिया जाने वाले मार्ग के ककरा घाट पर आज़ादी के बाद से ही ग्रामीण पक्के पुल की मांग कर रहे हैं परन्तु यह मुद्दा सिर्फ चुनावी मुद्दा बनकर रह गया है, यहां के लोगों का कहना है कि हमारी पीढियां तो गुजर गई परन्तु आने वाली पीढ़ी को शायद हम लोगों के संघर्ष से राहत मिल जाये। यहां पर बहने वाली राप्ती नदी पर ग्रामीण 4 माह के लिए तो कच्चा पुल बना लेते हैं लेकिन बरसात शुरू होते ही जब जलस्तर बढ़ता है तो यह पुल टूट जाता है, और ग्रामीण नांव आदि के सहारे से नदी पार कर उपचार, खरीददारी आदि के लिए इकौना कस्बा पहुंच पाते हैं।

हमारे जनमंच न्यूज़ के संवाददाता मिथिलेश पाठक कड़ी धूप में जोखिम भरा रास्ता पार कर इन लोगों के पास पहुंचे और इनके दुख दर्द को जानने की कोशिश की। मीडिया के पहुंचने की जानकारी होते ही भारी संख्या में ग्रामीण कड़ी धूप में सैकड़ों की तादात में इक्कठा हो गए और हर कोई अपनी अपनी पीड़ा सुनाने की जुगत में लग गया।

तस्वीरों के माध्यम से इन बेबस ग्रामीणों की पीड़ा का अंदाज़ा लगाया जा सकता है, किस कदर यह लोग जर्जर जानलेवा पुल से आधी नदी और आधी नदी पानी से निकल कर पार करते हैं। नदी के उस पार रहने वाले बच्चों ने साफ बताया कि हमारी शिक्षा में यह नदी ही बाधक बनी हुई है जिसके कारण हमारी पढाई लिखाई भी नही हो पाती।

90 साल की बुजुर्ग महिला ने बताया कि हम लोग शादी विवाह भी उस समय करते हैं जब नदी का पानी काफी कम हो जाता है। अब तो लोग इन गांवों में अपनी लड़की भी देने से कतराने लगे हैं। नवयुवकों के शादी व्याह में भी यह नदी बाधक बन रही है।

यहां के युवाओं ने ककरा घाट निर्माण संघर्ष समिति भी बनाई है, साथ ही लोगों का दावा है कि आगामी चुनाव का हम लोग बहिष्कार करेंगे, जब हमें कोई सुविधा ही नही मिलती है, तो हम मतदान क्यों करें। नेता आते हैं और वादे करके चले जाते हैं उसके बाद कोई हाल भी पूछने वाला नहीं है। हर हाल में अब लोग आर पार की लड़ाई के मूड में दिख रहे हैं इनकी साफ साफ मांग पुल निर्माण की है, इसके लिए प्रदर्शन, भूख हड़ताल, आदि के लिए भी यह लोग तैयार हो चुके हैं।