जनमत जुटाने में असफल नेताओं पर आख्रिर क्यों मेहरबान है भाजपा

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Rambihari pandey
रामबिहारी पांडेय

सीधी। चार साल पूर्व हुए लोक सभा चुनाव के बाद मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री ने का यह दावा कि भाजपा दरी विछाने वालों को भी सदन में पहुंचाने की हैसियत रखती है। तब खूब चटखारे लगे थें। अब एक बार फिर राज्य सभा के हो रहे चुनाव में भाजपा ने एक तीर से कई निशाने साधने के प्रयास किये हैं।

मध्य प्रदेश से भाजपा ने जितने उम्मीदवार घोषित किये हैं। उनमें ज्यादा तर जनता के नकारे हुए हैं। कह दिया जाय तो अतिशयोक्ति नहीं होगा। खास कर विंध्य अंचल के लिये तो कम से कम यह साबित हो ही रहा है। विधान सभा में सरकार को कठघरे में खड़े करने वाले अजय सिंह राहुल को घेरने के लिये अजय प्रताप को तोहफे में राज्य सभा की सीट दे दी गई है।

भाजपा नेता अजय प्रताप सिंह पर जनता ने भले ही भरोसा न जताया है लेकिन सत्ता ने उन पर विश्वास जताते हुए राज्यसभा सदन पहुंचा दिया है। अजय प्रताप सिंह संगठन में लंबे समय से प्रदेश में पदाधिकारी बने हुए हैं। हालांकि विधानसभा चुनाव के माध्यम से मप्र विधानसभा सदन में पहुंचने के लिए वे दो बार चुनाव मैदान में उतरे लेकिन दोनों ही बार हार का सामना करना पड़ा।

वर्तमान में वे भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री के पद पर पदस्थ हैं। संगठन के प्रति निष्ठावान कार्यकर्ताओं की श्रेणी में आते हैं। इसके कारण संघए संगठन व सत्ता द्वारा राज्यसभा सांसद के लिए अजय प्रताप सिंह का नाम आगे किया गया है।

चुरहट पर भाजपा की मेहरबानी…

जिले के विधानसभा क्षेत्र चुरहट पर भाजपा की ज्यादा मेहरबानी देखी जा रही है। इस सीट से भाजपा को लंबे समय से सफलता नहीं मिली है। फिर भी इस सीट के भाजपा के नेताओं पर विशेष मेहरबानी देखी जा रही है। इससे पूर्व चुरहट विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत बडख़रा गांव निवासी सुभाष सिंह को विंध्य विकास प्राधिकरण अध्यक्ष पद से नवाजा जा चुका है। अब चुरहट क्षेत्र अंतर्गत दुअरा गांव निवासी अजय प्रताप सिंह को राज्यसभा सांसद की कमान थमा दी गई है।

दो बार आए जनता दरबार में…

अजय प्रताप सिंह विधानसभा चुनाव के माध्यम से दो मर्तबा जनता के दरबार में उतर चुके हैं। लेकिन दोनों बार ही विफल रहे। अजय पहली बार 2003 के विधानसभा चुनाव में गोपद बनास विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी बतौर चुनाव मैदान में थे। कांग्रेस से कमलेश्वर द्विवेदी व समाजवादी पार्टी से केके सिंह भवर से उनका मुकाबला हुआ। वहां सपा प्रत्याशी केके सिंह भवर से उन्हें 28 हजार 626 मतों से परास्त होना पड़ा।

दूसरी बार भी मिली हार…

दूसरी मर्तबा 2008 के विधानसभा चुनाव में वे चुरहट विधानसभा सीट से अजय सिंह के खिलाफ बतौर भाजपा प्रत्याशी ताल ठोके। लेकिन उस बार भी अजय प्रताप को अजय सिंह से 10 हजार 835 मतों से मुंह की खानी पड़ी। जनता ने भले ही विश्वास न जताया हो किंतु भाजपा संगठन व सत्ता ने विश्वास जताते हुए उन्हें राज्यसभा पहुंचा दिया।

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