दहेज

दहेज की बलि फिर चढ़ी एक विवाहिता, ससुराल वालों पर मुकदमा दर्ज

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संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद ससुरालजनों नें‌ आनन-फानन में किया अंतिम संस्कार…

Mithiliesh Pathak

मिथिलेश पाठक

 

 

 

 

 

 

श्रावस्ती: एक विवाहिता महिला की बृहस्पतिवार की सुबह संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इसकी भनक लगने पर मृतका के मायके वाले बेटी की ससुराल पहुंचे। ससुरालीजनों ने आनन फानन में अंतिम संस्कार करा दिया। लेकिन मायके वालों ने दहेज के लिए गला दबाकर हत्या  का आरोप लगाते हुए थाने में तहरीर दी। पुलिस पीड़ित परिजनों से तहरीर लेकर आरोपी पति, ससुर, देवर को गिरफ्तार कर जांच पड़ताल में जुट गई हैं।

आपको बता दे कि पड़ोसी जिले बहराइच के थाना पयागपुर के निवासी छोटेलाल ने बेटी “संगीता” की शादी 5 वर्ष पहले गिलौला थाने के कुरबेनी गांव निवासी मंशाराम के साथ की थी। शादी के बाद महिला ससुराल यह सोच कर आई कि अब पति के साथ हंसी खुशी जीवन पार होगा।

परन्तु खुशियों के पल मिलने के बजाय पत्नी संगीता को तड़प, दुख और दर्द ही मिलता गया। आये दिन पति के साथ ससुराली भी उसकी पिटाई करते रहते थे, इन सब के बीच संगीता 2 मासूम बच्चों की माँ भी बन चुकी थी, परन्तु ससुरालीजन नही बदले, और न ही बदला उनका रवैय्या।

मौत के कुछ घण्टे पहले संगीता को बेरहम पति ने बड़ी बेरहमी से पीटा था जो बात संगीता ने अपने पिता को फोन कर बताई भी थी। उसके बाद संगीता की सन्दिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।

ग्रामीणों की सूचना पर मायके पक्ष के लोग जब बेटी के ससुराल पहुँचे तो वहां संगीता की लाश भी नही मिली। उसको ससुरलियो ने आनन फानन में जला दिया। बेबस पिता ने जब ससुराली जनों से मौत का कारण जानना चाहा तो उसे ससुरलियो ने धमकाना शुरू कर दिया कि पुलिस के पास जाओगे तो ठीक नही होगा।

मृतका के पिता छोटेलाल ने बताया कि पति मंशाराम आए दिन दहेज के लिए प्रताड़ित करता था। दहेज में सोने की चेन, बाइक, आदि की मांग कर रहा था। जिसके चलते आज हमारी बेटी को जान से ही मार दिया गया। वही पड़ोस में रहने वाले लोगो ने भी बताया कि संगीता को पति मंशाराम आये दिन बेरहमी से पीटा करता था। इस मामले पर  सीओ इकौना का कहना है की पीड़ित के तहरीर के आधार पर आरोपी पति, ससुर, देवर को गिरफ्तार कर कार्रवाई की जा रही है।

कानून भले ही आरोपियों को कोई भी सज़ा दे, परन्तु इन मासूमों के सर से मां का साया हमेशा के लिए ही हट गया, जिसकी कमी कोई नही पूरी कर सकता। मासूम बच्चों की प्रथम पाठशाला माँ ही होती है, जो अपने कलेजे के टुकड़े को जीवन जीने के लिए पहला पाठ पढ़ाती है, मां ही वह शक्ति है जो अपनी कोख में 9 माह अपने बच्चे को रखती है, दुनिया में सबसे ज्यादा बच्चों की फिक्र एक मां ही रख सकती है।