फ्लोर टेस्ट से पहले येदियुरप्पा का इस्तीफा, कहा- राज्य में कांग्रेस और जेडीएस के खिलाफ जनादेश

B S Yeddyurappa
File Photo: B. S. Yeddyurappa
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बेंगलुरु. भाजपा के पास बहुमत का आंकड़ा न होने की वजह से मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने शनिवार को इस्तीफा दे दिया। येदियुरप्पा ने बहुमत का प्रस्ताव पेश तो किया, लेकिन फ्लोर टेस्ट के लिए नहीं गए। इससे पहले उन्होंने करीब 20 मिनट तक भावुक स्पीच दी। उन्होंने कहा कि राज्य में कांग्रेस और जेडीएस के खिलाफ जनादेश है। अगर हमें 113 सीटें मिली होती तो आज स्थिति कुछ और होती। येदियुरप्पा ने 17 मई को अकेले शपथ ली थी।

इसके पहले कर्नाटक में बहुमत का ड्रामा जमकर चला। दिनभर कभी बीजेपी के पास बहुमत होने और न होने की खबरें आती रहीं। यहां तक कि कांग्रेस और जेडीएस के दो-दो विधायकों के गायब होने की खबर आई। आखिर में इस गठबंधन के सभी विधायक ( कांग्रेस 78 + जेडीएस 37) सदन में पहुंच गए।

कांग्रेस का भी दावा- येदियुरप्पा फ्लोर टेस्ट से पहले देंगे इस्तीफा

– कांग्रेस के डीके शिवकुमार ने दावा किया, “हमें पूरा भरोसा है कि येदियुरप्पा बहुमत साबित करने से पहले ही इस्तीफा दे देंगे।”

कांग्रेस ने कहा- येदियुरप्पा 15 करोड़ या मंत्री पद ऑफर कर रहे

– कांग्रेस नेता वीएस उग्रप्पा ने कहा कि उन्होंने (बीजेपी के बीवाई विजेंद्र) ने कांग्रेस एमएलए की पत्नी को फोन किया और कहा कि वे अपने पति से कहें कि येदियुरप्पा के फेवर में वोट करें। हम आपके पति को मंत्री पद या 15 करोड़ रुपए देंगे।

– इससे पहले कांग्रेस नेता वीरप्पा मोइली ने कहा कि भाजपा को पता है कि उसके पास 104 विधायक हैं, इसके बाद भी वह हर संभव कोशिश कर रही है और हमारे विधायकों को खरीदने के लिए कुछ भी देने को तैयार है। हमारे एमएलए हमारे साथ हैं। दो अभी हमारे साथ नहीं हैं, लेकिन वे हमें सपोर्ट करेंगे।

जेडीएस-कांग्रेस के चार विधायक लौटे

– पहले खबर कांग्रेस के दो विधायक आनंद सिंह और प्रताप गौड़ा पाटिल असेंबली नहीं पहुंचे थे। इसी तरह जेडीएस के दो विधायक के भी सदन नहीं पहुंचने की खबर आई। प्रताप गौड़ा पाटिल करीब एक बजे विधानसभा पहुंचे। शाम को 3:30 बजे आनंद सिंह भी सदन में पहुंंच गए।

– उधर, अब जेडीएस के भी सभी विधायकों के सदन में पहुंचने की खबर है।

येदियुरप्पा ने कहा- सौ फीसदी बहुमत जीतेंगे, गुलाम नबी बोले- सरकार हमारी बनेगी

– सीएम येदियुरप्पा ने कहा कि हमारे पास 100% पूर्ण बहुमत है। मैं उन सभी वादों पर कल फैसला लूंगा, जो मैंने कर्नाटक की जनता से किए हैं। उधर, कांग्रेस के सीनियर नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि भाजपा के पास बहुमत साबित करने के लिए विधायकों की पर्याप्त संख्या नहीं है। विधायक हमारे पक्ष में हैं और हम सरकार बनाएंगे।

येदियुरप्पा रहेंगे या जाएंगे, इन 2 स्थितियों पर रहेगी नजर

– विधानसभा में कुल सीट: 224, 2 पर चुनाव नहीं हुए: 222

– कुमार स्वामी दो सीट पर चुनाव जीते हैं। ऐसे में उनकी एक और एक प्रोटेम स्पीकर की सीट घटाने पर संख्या 220 रह जाती है।

– बता दें कि कर्नाटक में अभी भाजपा के पास 104, कांग्रेस के पास 78 और जेडीएस+बसपा के पास 38 विधायक हैं।

1. ऐसे जीत सकते हैं विश्वास मत

11 विपक्षी विधायक गैरहाजिर रहें तो: 209
ऐसे में बहुमत के लिए जरूरी: 105
भाजपा-स्पीकर 103+ अन्य 2: 105

2. मौजूदा स्थिति में हार तय

बहुमत के लिए जरूरी: 111
कांग्रेस 78+जेडीएस (38- 1स्वामी): 115
भाजपा (104- स्पीकर):103

आशंका- सदन में कहीं 8 साल पुराना वाकया न दोहराया जाए

– 2010 में भाजपा के कुछ विधायकों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री येद्दियुरप्पा के खिलाफ बगावत कर दी थी। तब बोपैया बोपैया ही विधानसभा अध्यक्ष थे। उन्होंने भाजपा को समर्थन देने वाले 5 निर्दलीय और 11 बागी विधायकों की सदस्यता 12 अक्टूबर 2010 को रद्द कर दी थी। इस तरह येद्दियुरप्पा सरकार ने बहुमत हासिल कर लिया था।

– हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उनका फैसला पलट दिया था। 13 मई 2011 के फैसले में कोर्ट ने कहा, “बोपैया ने पक्षपाती तरीके से काम किया। उन्होंने स्वाभाविक न्याय तक का उल्लंघन किया।”

– कहीं आज वैसी ही स्थिति पैदा न हो जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को फ्लोर टेस्ट करने को कहा था

– कांग्रेस और जेडीएस की याचिका पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार शाम 4 बजे फ्लोर टेस्ट कराने के निर्देश दिए थे। इस तरह शीर्ष अदालत ने राज्यपाल वजूभाई वाला के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें उन्होंने बीएस येदियुरप्पा को बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का वक्त दिया था।

– कर्नाटक के राज्यपाल द्वारा विनिषा नेरो को विधानसभा में एंग्लो इंडियन सदस्य के तौर पर मनोनीत किए जाने को भी कांग्रेस-जेडीएस ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल फ्लोर टेस्ट होने तक इस सदस्य को मनोनीत ना करें।

– जस्टिस एके सीकरी, अशोक भूषण और एसए बोबड़े की बेंच ने कहा सबसे बड़ी पार्टी को बुलाना सही या गलत? कोर्ट इसकी सुनवाई को भी तैयार। 6 हफ्ते में जवाब मांगा है। इस पर 10 हफ्ते बाद होगी सुनवाई।

इसके अलावा ये 3 निर्देश भी दिए

1. येदियुरप्पा बहुमत साबित होने तक कोई भी पॉलिसी से जुड़े फैसले नहीं लेंगे।

2. सदन में बहुमत साबित करने के दौरान कनार्टक के डीजीपी उचित सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी लेंगे।

3.सरकार बनाने के लिए भाजपा को न्योता देने का फैसला सही या नहीं, इस पर 10 हफ्ते बाद सुनवाई करेंगे।

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