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अव्यवस्थाओं के बीच सैकड़ों नौनिहालों की दी जा रही शिक्षा। देश का भविष्य गर्त में।

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एक तरफ सरकार परिषदीय विद्यालयों पर लाखों रूपये खर्च करती है। फिर भी नाम मात्र बच्चे विद्यालय आते है तो दूसरी तरफ इस मदरसे में खाने पीने से लेकर बैठने तक टाट पट्टी की व्यवस्था नही है।

 

मिथिलेश पाठक की कलम से।

श्रावस्ती। शिक्षा क्षेत्र जमुनहा के महरु मुर्तिहा जमुनही के पास टीन के नीचे या खुले आसमान में सड़क के किनारे कड़ाके की ठंढ में मात्र रजिस्टेशन के सहारे चल रहा मदरसा अल्जामियतुल कादरिया अशरफुल उलूम।

एक तरफ सरकार परिषदीय विद्यालयों पर लाखों रूपये खर्च करती है। फिर भी नाम मात्र बच्चे विद्यालय आते है तो दूसरी तरफ इस मदरसे में खाने पीने से लेकर बैठने तक टाट पट्टी की व्यवस्था नही है।

फिर भी सुबह से शाम तक 250 से 300 मुस्लिम बच्चों  को मात्र उर्दू ही पढ़ाई जाती है। आखिर क्यों नही लग रहा अंकुश। प्रशासन की नज़र इन पर नही पड़ रही क्या,,,,?