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उम्मीदों की फेहरिस्त लंबी, बजट का इंतजार

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कटिहार डेस्क।

कटिहार। लोकसभा में बुधवार को पेश होने वाले बजट से लोगों को कितना राहत मिलेगा यह तो बजट पेश होने के बाद ही सामने आ पाएगा, लेकिन उम्मीदों की एक लंबी फेहरिस्त उससे जुड़ी है।

बजट में जिले के औद्योगिक विकास को लेकर वित्त मंत्री द्वारा खास घोषणा किए जाने को लेकर भी लोग आशान्वित हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने चुनावी दौरे के क्रम में सीमांचल के पिछड़ेपन को मुद्दा बनाया था।www.janmanchnews.com

उन्होंने क्षेत्र में प्रचुर जल संपदा और मानव शक्ति के बल पर आर्थिक स्थिति बदलने की बात कही थी। कटिहार होकर कोलकाता तक जाने वाले एनएच 81 के निर्माण व फोर लेन बनाने की घोषणा किए जाने पर भी नजर टिकी हुई है। उद्योग के मामले में सीमांचल का इलाका पिछड़ा हुआ है।

कभी जूट उद्योग को लेकर कटिहार सहित सीमांचल का इलाका देश के औद्योगिक मानचित्र पर अपना स्थान रखता था। कई छोटे उद्योग भी यहां संचालित होते थे। कुर्सेला में विद्युत उत्पादन इकाई स्थापित करने की मांग भी वर्षों बाद पूरी नहीं हो पायी है।

बाढ़ व कटाव का झेलने को अभिशाप हजारों विस्थापित परिवार के पुनर्वास नीति एवं कटाव स मुक्ति दिलाने को लेकर भी बजट चर्चा होने की उम्मीद जताई जा रही है। बंद जूट मिल के भी चालू होने की उम्मीद लोग कर रहे हैं।

स्थापित नहीं हो पाया खाद्य प्रसंस्करण उद्योग कटिहार में केला व मक्का की व्यापक पैमाने पर खेती होती है। केला व मक्का आधारित उद्योग लगाने की मांग स्थानीय किसानों द्वारा वर्षों से की जा रही है।janmanchnews.com

तत्कालीन खाद्य प्रसंस्करण राज्यमंत्री शाहनवाज हुसैन ने केला आधरित उद्योग लगाने का आश्वासन भी दिया था, लेकिन डेढ़ दशक बाद भी धरातल पर घोषणा उतर नहीं पाई। नहीं सुधर पाई आरबीएचएम जूट मिल की सेहत एनजेएमसी की इकाई आरबीएचएम जूट मिल महीनों से बंद पड़ा है। बंदी के कारण मिल मजदूरों को रोजी रोटी के लाले पड़ रहे हैं।

लोकसभा में पेश होने वाले बजट में इस मिल के लिए विशेष पैकेज की घोषणा व मिल चालू होने को लेकर लोग उम्मीद जता रहे हैं। जूट मिल के कारण देश के औद्योगिक मानचित्र पर कटिहार की अलग पहचान थी।janmanchnews.com

मिल बंदी के कारण औद्योगिक नगरी के रूप में कटिहार की पहचान मिटती जा रही है। कटाव निरोधी कार्य के लिए नहीं मिली पर्याप्त राशिम निहारी एवं अमदबाद में गंगा की धारा हर साल बांयी ओर लगातार शिफ्ट करने के कारण कटाव की समस्या विकराल होती जा रही है।

गंगा की बदलती धारा के कारण कटाव निरोधी कार्य के लिए केंद्र को 234 करोड़ के बोल्डर पी¨चग का प्रस्ताव भेजा गया था। इसमें महज 68 करोड़ केप्रस्ताव को ही मंजूरी दी गई है। इसमें भी लोग कुछ विशेष घोषणा की उम्मीद कर रहे ह।