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कानपुर हादसा: 14 घंटे बाद निकाली गई तीन वर्ष की बच्ची, पांच निलंबित

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मीनाक्षी मिश्रा (सब एडिटर यूपी)…

कानपुर। ज्ञातव्य हो कि कल अवैध निर्माण के कारण एक बहुमंजिला इमारत ढहने से तकरीबन दर्जन भर मजदूरों के मौत की खबर ने सनसनी मचा दी थी। दरअसल समाजवादी पार्टी के नेता मेहताब आलम की मानक के विपरीत निर्माण का जा रही बहुमंजिला इमारत ढह गई थी।

इस अवैध निर्माण ढहने के दौरान मलवे में तीन वर्षीय बच्ची के दबने की खबर थी। जिसको 14 घंटे के रेस्क्यु ऑपरेशन के दौरान बचा लिया गया। नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स की टीम को बिल्डिंग गिरने के कुछ घंटों बाद ही रेस्क्यु ऑपरेशन में सेना की टीम के साथ लगाया गया था।www.janmanchnews.com

एनडीआरएफ की बटालियन ने एक तीन वर्ष की बच्ची को 14 घंटे के बाद रेस्क्यु ऑपरेशन के बाद सकुशल बाहर निकाल कर बचा लिया। वही यह मासूम अब चर्चा का विषय बन गयी है। हादसे की सूचना पर 4 बजे लखनऊ से एनडीआरएफ की बटालियन घटनास्थल पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। इस दौरान एनडीआरएफ की टीम ने लाइफ सेंसर लगाकर जांच की तो पता चला की मलबे में कोई अंदर फंसा है।

टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन के तहत मलबे में दबी बच्ची को सुबह तड़के करीब चार बजे सुरक्षित बाहर निकालकर उसकी जान बचा ली। तीन साल की मासूम बच्ची का नाम सुशीला है उसको मामूली चोटें आईं हैं। वह छत्तीसगढ़ के रहने वाले सीताराम की बेटी है। उसके पिता परिवार के साथ मजदूरी करने आये हैं। बच्ची की मामूली खरोचें आई हैं, उसे कांशीराम हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया है।

कानपुर के चकेरी थाना क्षेत्र के जाजमऊ में इमारत गिरने के मामले में कानपुर विकास प्राधिकरण के पांच कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ एक जेई व एक्स ईएन के निलंबन के लिए शासन को लिखा गया है।janmanchnews.com

केडीए के विशेष कार्याधिकारी डीडी वर्मा ने बताया जाजमऊ के गज्जूपुरवा में महज 20 फुट की गली में 500 गज के प्लॉट पर बन रही बिल्डिंग के निचले फ्लोर पर दुकानें और ऊपर फ्लैट बनाए जा रहे थे। इस बिल्डिंग में दो मंजिल तक बनवाने की परमीशन है लेकिन निर्माण अवैध तरीके से छह मंजिल तक करवाया जा रहा था।

अभी भी इमारत के अंदर से शवों की तलाश जारी है। मलवे में दवे लोगों के शवों की तलाश के लिए सेना की टीम स्लैब में छेद कर रही है। सेना को नीचे दो शव दिख रहे हैं। मौके पर भीड़ जमा है। वहां लोग अपने परिवार के सदस्यों की तलाश में भटक रहे हैं। उनकी निगाहें बस मलवे पर लगी हैं।