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थम गयी द्विवेदी परिवार का सियासी विवाद! प्रतिष्ठा दाँव पर!

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रॉबिन कपूर की रिपोर्ट

फर्रुखाबाद। भारतीय जनता पार्टी में  टिकट वितरण के बाद  द्विवेदी परिवार में शुरू हुआ सियासी घमसान परिवार के बुजुर्गो व पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के  प्रयास से थम ही गया ।

सैफ़ई घराने के सियासी दंगल  की तर्ज पर फर्रुखाबाद में भी भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता स्व. ब्रहमदत्त द्विवेदी के पुत्र  मेजर सुनील दत्त द्विवेदी  और भतीजे  प्रांशु दत्त द्विवेदी में भी सियासी वर्चस्व को लेकर मतभेद पैदा हो गये ।

विधानसभा चुनाव के लिये दोनो भाइयों ने एक  ही सीट से ताल भी ठोक दी । जिसमे पार्टी हाइ कमान ने मेजर सुनील को तरजीह दें दी गयी । जिसको लेकर प्राँशु ने पार्टी में बगावत शुरू कर दी । लेकिन परिवार से मिले आदर्शों को नही भूल सके और परिवार के बुजुर्गो के द्वारा समझाये जाने पर प्राँशु का गुस्सा थम गया । दोनो भाईयो को आखिर गले मिला दिया गया ।

आपको ज्ञात होगा की फर्रुखाबाद  जिले की सदर सीट से  भाजपा के  उम्मीदवार मेजर सुनील दत्त द्विवेदी के पिता स्व. ब्रह्ममदत्त द्विवेदी भारतीय जनता पार्टी  के कद्दावर नेता थे । भारतीय जनता पार्टी की सरकार में वह ऊर्जा मंत्री के आलावा भी कई अन्य भी जिम्मेदार पदों पर रहे । लेकिन दुर्भाग्य से उनकी 10 फरवरी 1997 में हत्या कर दी गयी । 

जिसके बाद से दिन पर दिन जिले में भाजपा की लोकप्रियता का ग्राफ गिरता ही गया । भाजपा को भी स्व. द्विवेदी की छवि जैसा दूसरा नेता अभी तक जिले में नही मिल सका । पिछले 3 विधानसभा चुनाव में भी भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है । स्व. द्विवेदी के पुत्र मेजर सुनील दत्त भी दो बार विधानसभा का चुनाव हार चुके है ।Janmanch

लेकिन फ़िर भी पार्टी  ने उनपर एक बार और भरोसा जताया है । इस बार भाजपा की हार जीत के साथ ही मेजर के राजनैतिक भविष्य व द्विवेदी परिवार की प्रतिष्ठा भी दाँव पर लगी हुईं है ।

फिलहाल द्विवेदी परिवार की जिले के ब्रह्मण समाज  में बढ़ी पैड मानी जाती है । इसके वावजूद भी यहां अगर भाजपा सीट निकलने में नाकामयाब होती है तो खासकर जिले का ब्रह्मण समाज अपना नेत्रत्व के लिये दूसरा चहरा  ढूँढ़ने  को मजबूर होगा । वर्तमान विधानसभा चुनाव में जिले के सभी प्रत्याशी राजनीति के पुरोधा है । सबका अपने समाज में बड़ा जनाधार है ।

चाहे वो भाजपा के मेजर सुनील दत्त हो ,बसपा के उमर खाँ ,सपा के विजय सिंह या निर्दलीय प्रत्याशी पूर्व एमलसी मनोज अग्रवाल हो । फर्रुखाबाद जिले की सियासत एक फ़िर गर्म है । सभी प्रत्याशी पुरजोर बल के साथ  चुनाव मैदान में लगे हुए है ।

ऐसे में अब द्विवेदी परिवार व भारतीय जनता पार्टी के सभी नेता भी गुटबाजी व मतभेद भूल कर एक साथ हो गये है ।बाकी पार्टी में रूठे  नेताओं को बनाने की कवायद भी जारी है । 2012 में मिली हार से सबक लेते हुए इस बार पार्टी कोई भी जोखिम उठाने को तैयार नहीँ है । जल्द ही मिडिया के सामने सब एक मंच पर दिखायी देने वाले  है ।

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