BREAKING NEWS
Search

मज़हब नही सिखाता कभी आपस में बैर रखना।

664

ये किसी भी तरह वोट हासिल करना चाहते हैं और वोट हासिल करने के लिए इनके पास सिर्फ़ एक ही तरीक़ा है वह है आपस में दो समुदाय के लोगों को लड़ा दो.

 

पत्रकार रोबिन कपूर की दिल की कलम से चुनावी माहौल में मुल्क की आवाम को संदेश –

देश के पांच महत्वपूर्ण राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं और एक बार फिर हमारे कुछ कथित नेता मंदिर-मस्जिद के नाम पर वोट हासिल करने की कोशिश में हैं. अभी पहले राउंड के चुनाव होने में भी कुछ दिन बाक़ी हैं लेकिन उलटे सीधे बयान आने शुरू हो गए हैं. वैसे सच कहूं तो ऐसा बिलकुल नहीं है कि ये किसी जाति-धर्म से नफ़रत करते हैं.

ये तो असल में उस धर्म या उस जाति के लोगों से भी व्यापारिक सम्बन्ध बना कर रखे हुए हैं जिसको ये आये दिन मूंह से अन्ठ-शंट बकते रहते हैं. इनका एक व्यापार वैसे ये भी है, ये किसी भी तरह वोट हासिल करना चाहते हैं और वोट हासिल करने के लिए इनके पास सिर्फ़ एक ही तरीक़ा है वह है आपस में दो समुदाय के लोगों को लड़ा दो.www.janmanchnews.com

किसी एक धर्म के बारे में इतनी नफ़रत भर दो कि आपके धर्म के लोग डर जाएँ और डर का फ़ायदा उठाकर इनको वोट मिल जाए. इनको मालूम है कि चुनाव अगर विकास के मुद्दे पर होगा तो ये कहीं के नहीं रहेंगे क्यूंकि विकास और मुददे इनके बस का मामला नहीं है. जनता से ही धन नोचना और उसपर सियासी रोटियाँ सेखना ही इनकी राजनीति है।

इसमें वैसे पूरा दोष इनका भी नहीं है. कुछ दोष तो इस समाज का है जो दूसरे समाज के लोगों को बुरी नज़र से देखता है. समाज में अजीब ओ ग़रीब सी चीज़ें हम अपने से अलग धर्म या जाति के लोगों के बारे में सुनते आये हैं.

ये अफ़वाहें कहाँ से शुरू होती हैं ये तो पता नहीं लेकिन ये बहुत जल्द ही समाज में घुल जाती हैं और धीरे धीरे लोग इसको अपनी दिनचर्या की भाषा में शामिल कर लेते हैं. आजकल का समाज उस क़िस्म का हो गया है कि जिसे शान्ति और अमन-पसंद लोगों की बातें बुरी लगती हैं.

इनकी नज़र में नेता के अन्दर दबंगई का पुट होना चाहिए. कुछ लोगों से तो मैंने यहाँ तक सूना है, “बाबु हमारा नेता कुछ करे ना करे.. उन्हें (दूसरे धर्म-जाति के लोगों को) दबाके रखता है”. दिलचस्प ये है कि इनका भी दावा है कि ये दूसरे धर्म के लोगों का सम्मान करते हैं. कभी-कभी मुझे ये लोग ज़्यादा ख़तरनाक लगते हैं क्यूंकि ये ख़ुद को दिखाते हैं कि दूसरे धर्म का सम्मान करते हैं लेकिन फिर हलके से कहीं अपना नफ़रत वाला काम कर जाते हैं.

सच कहूं तो दंगाई-नेता ऐसे ही लोगों का फ़ायदा उठाते हैं. दंगा करवा कर चुनाव जीतने वाले नेताओं को ये पता है कि दंगा करवा कर चुनाव जीता जा सकता है. वरना क्या ही वजह होती कि वह फिर दंगा कराने का नाम भी लेते. लोगों के जज़्बात भड़का कर चुनाव जीतने वाले ये लोग हर बार यही कोशिश करते हैं कि कुछ इसी तरह का मामला किया जाए और गाड़ी निकाल ली जाए.janmanchnews.com

सभी पार्टियों की बात तो मैं नहीं करता लेकिन कई ऐसी पार्टियाँ हैं जो ऐसे नेताओं को शय देती हैं या यूं कहो कि इन्हें पाल रही हैं. कभी-कभी तो ये नेता मंत्री भी बन जाता है. मंत्री बनने के बाद भी लेकिन ये कोई काम नहीं करता बस जब भी इसके ख़िलाफ़ माहौल बनता है ये तुरंत ही कोई पुराना मंदिर-मस्जिद का मुद्दा उठा लाता है. ये हर बार जनता के मासूम जज़बातों से खेलता है और अपनी राजनीति चमकाता है. हमें आपको और सबको ऐसे दंगाई नेताओं से सावधान रहने की ज़रुरत है।

जनता को चाहिए कि ऐसे नेताओं को अपने मोहल्ले में घुसने ना दें. कोई अगर मंदिर-मस्जिद के नाम पर भड़काए तो उसकी जूतों से खातिर ज़रूर करनी चाहिए ।

अगर वह भी ना कर पायें तो कम से कम ऐसे दंगाइयों को वोट तो ना ही दें क्यूंकि इनको अगर वोट देकर आपने जिताया तो आप अपने देश, ज़मीर और धर्म सबके ख़िलाफ़ ग़द्दारी करेंगे। और ऐसे नेता अपने ही स्वार्थ के लिये एक दिन इस देश को भी बेच देंगे ।