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Akhilesh Yadav

राजनीति के बनते बिगड़ते समीकरण

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यूपी डेस्क

अमेठी। बीते कई महीनों से एक ओर जहाँ हमारा प्रदेश चुनावी तैयारियों को लेकर सराबोर नज़र आ रहा है। वही प्रत्यासी भी टिकट खिड़की पर टकटकी लगाने के साथ साथ जनता में भी अपनी पैठ बनाने के लिये लगातार जुगत करते दिखे।

कभी कभार ही क्षेत्र में नजर आने वाले छोटे बड़े नेताओ के बीच जनता का दुःख दर्द बाँटने की होड़ सी लगी नजर आ रही है। इन सब के बीच पार्टियों द्वारा अभी तक प्रत्यासी न घोषित करने से जनता में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

बीते कुछ दिनों के घटनाक्रम पर नजर डालें तो सूत्रों के अनुसार सपा में मचे दिखावटी अंतर्कलह व उसके पश्चात पिता मुलायम के द्वारा बेटे को राजगद्दी सौंपने के लिये चले गए शियासी घटनाक्रम के बीच राजनैतिक समीकरण बदले नजर आ रहे हैं।जहाँ एक ओर अखिलेश खेमे को साइकिल चुनाव चिन्ह आवंटित होने के पश्चात राजनैतिक घटनाक्रम प्रदेश में तेजी से बदले। सपा और कांग्रेस के मध्य चल रही गठबंधन की सुगबुगाहट ने अमेठी जो की राजनैतिक रूप से वीआईपी एरिया मानी जाती है।

यहाँ पर भी शियासी पारा गर्माता नजर आ रहा है। कांग्रेस व सपा के नेता अपने अपने तरीके से इस सीट पर अपना अधिकार जमाने के लिये तत्पर दिख रहे।

बात करें सपा खेमे की तो सपा से पहली बार विजय रथ पर सवार हो विधायक बने गायत्री प्रजापती ने कैबिनेट मंत्री तक का सफर तय किया। साथ ही मुलायम  खेमे से नजदीकी व अखिलेश से दूरी ने उन्हें चर्चित बनाये रखा।

लेकिन अखिलेश खेमे से दूरी उनको मंहगी पड़ती नजर आ रही है। बीते दिनों उनके द्वारा आधिकारिक दावा किया गया कि अमेठी विधानसभा सीट उनके पाले में ही रहेगी। वही कांग्रेस से सीट की दावेदार पूर्व मंत्री अमिता सिंह भी कांग्रेस की ओर से इस सीट पर दावा ठोंक रही हैं। उनके आधिकारिक बयान के अनुसार अमेठी सीट कांग्रेस के ही खाते में गयी है। 
इन सभी जद्दोजहद के बीच आम जनता की मूलभूत समस्याएं व विकास परक राजनीति कही पीछे छूटती नजर आ रही है। जनता पार्टियों द्वारा प्रत्यासी समय पर न घोषित करने के कारण उनको आंकने में उहापोह की स्थिति में नज़र आ रही है।

देखना बाकी है कि जनता इन राजनैतिक हलचलों को किस नजरिये से देखती है। क्या वही जातिगत समीकरण पुनः हावी होंगे। या फिर जनता जागरूक होगी और कुछ नए राजनैतिक समीकरण देखने को मिलेंगे।