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हेलीकाॅप्टर तथा ड्रोन से होती रही निगरानी

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रोहित पांडेय की कलम से

इलाहाबाद । माघ  मेला  का  तृतीय  मुख्य  स्नान  पर्व  मौनी  अमावस्या  सकुशल  एवं  निर्विध्न  रूप  से सम्पन्न  हुआ।  मौनी  अमावस्या  के  पावन  पर्व  पर  150  लाख  श्रद्धालुओं  ने  संगम  में  डूबकी लगाई।  बृहस्पतिवार  की  देर  रात्रि  से  ही  श्रद्धालुओं  ने  संगम  में  स्नान  करना  शुरू  कर  दिया।

जनपदवासियों  के  अलावा  देश  के  तमाम  राज्यों  और  शहरों  से  भी  मौनी  अमावस्या  पर्व  पर संगम  में  स्नान  के  लिए  श्रद्धालु  आये।  मौनी  अमावस्या  स्नानपर्व  पर  आने  वाले  स्नानार्थियों  के दृष्टिगत  स्नानाघाटों  की  लम्बाई  में  वृद्धि  करने  के  साथ-साथ  एक  अतिरिक्त  स्नानघाट रामानुज  मार्ग  घाट  प्रशासन  द्वारा  बनाया  गया ।

प्रशासन द्वारा  18  घाटों  पर  स्नान  हेतु  साफ-सफाई  सहित  सुरक्षा  व्यवस्था  का  पुख्ता  इंतजाम  किया गया  था।  गुरूवार  से  ही  जिलाधिकारी  संजय  कुमार  स्नान  को  सकुशल  सम्पन्न  कराने के  लिए  माघ  मेला  में डट  गये । तथा  देर  रात्रि  तक  सम्बन्धित  विभाग  के  अधिकारियों  के  साथ माघ  मेला  के  प्रत्येक  सेक्टर  तथा  घाट  का  स्थलीय  निरीक्षण  कर  तैयारियों  को  देखे  तथा आवश्यक  निर्देश भी  दिये। 

रिपोर्ट  लिखने  तक  लगभग  2  करोड़ स्नानार्थियों/श्रद्धालुओं  ने  पवित्र  गंगा-यमुना  एवं  अदृश्य  सरस्वती  के  संगम  तट  तथा  गंगा  जी के  अन्य  तटों  पर  स्नान  कर  पुण्य  लाभ  अर्जित  किये।  सायं  6  बजे  के  बाद  भी  स्नानार्थियों  का आगमन  काफी  संख्या  में  निरन्तर  बना  हुआ  है,  जिसको  दृष्टिगत  रखते  हुए  अनुमान  है  कि शनिवार  की  देर  रात्रि  तक  स्नान  होगा। बिहार,  झारखण्ड,  छत्तीसगढ़  राजस्थान,  गुजरात  तथा अन्य  राज्यों  से  आये  श्रद्धालुओं  से  भी  जिलाधिकारी  संजय  कुमार  मिले।  

मेले  में  शान्ति  एवं  सुरक्षा  व्यवस्था  के  दृष्टिगत  आर0ए0एफ0  का  माउन्टेन  सर्विलांस व्हीकल  मेले  में  दौड़ता  रहा।  इसके  अलावा  सीसीटीवी  तथा  ड्रोन  कैमरे  से  भी  मेले  पर  नजर  रखी गई।  सेना  का  हेलीकाॅप्टर  दिन  भर  माघ  मेले  की  निगरानी  करता  रहा। 

स्नान  घाटों  पर आरएएफ,  पीएसी  तथा  पुलिस  के  जवान  तैनात  रहे  इसके  अलावा  लोगों  की  मदद  के  लिए सीविल  डिफेंस  के  लोग  भी  तैनात  थे।  स्नान  के  उपरान्त  अपने  परिजनों  से  बिछड़े  45 स्नानार्थियों  तथा  श्रद्धालुओं  को  सिविल  डिफेंस  द्वारा  कपड़ा,  कम्बल  तथा  भोजन  दिया  गया। सिविल  डिफेंस  के  वाॅलन्टीयर  घाटों  पर  तैनात  थे  जो  सफाई  तथा  बिछड़े  लोगों  को  संगम टाॅवर  तक  पहंुचाने  में  भी  सहयोग  कर  रहे  थे।  

प्रातः  बारिश  होने  के  उपरान्त  बड़ी  तेजी  से  स्नानार्थियों  की  संख्या  बढ़ी।  स्नानार्थियों  ने बताया  कि  मौनी  अमावस्या  पर  बारिश  को  अमृत  की  बूंद  समझा  जाता  है।  इसमें  स्नान  करने पर  पुण्य  लाभ  मिलता  है।  जिलाधिकारी  इस  दौरान  मेले  में  भ्रमण  कर  श्रद्धालुओं  को  धैर्य  से स्नान  करने  हेतु  प्रेरित  करते  रहे। 

जिलाधिकारी  बोट  के  माध्यम  से  सभी  घाटों  का  निरीक्षण  कर सुरक्षा  व्यवस्था  का  जायजा  लिये।  उन्होंने  सभी  को  प्रशासन  द्वारा  बनाये  घाट  पर  स्नान  करने को  कहा।  माघ  मेले  में  अपरान्ह  तेज  हवा  चलने  लगी  इस  दौरान  सुरक्षा  के  दृष्टिगत जिलाधिकारी  ने  नावों  का  संचालन  बंद  करा  दिया  और  स्वयं  बोट  के  माध्यम  से  निरीक्षण  कर नावों  की  स्थिति  को  देखे।

जल  पुलिस  ने  विभागीय  गोताखोर,  प्राइवेट  गोताखार,  जल  पुलिस  तथा  प्राइवेट  बोट तथा  मोटर  बोट  से  श्रद्धालुओं  की  सुरक्षा  किया।  निर्धारित  स्थानों  पर  जल  पुलिस  तथा गोताखोर  तैनात  रही। 

मौनी  अमावस्या  स्नान  पर्व  की  पूर्व  संध्या  दिनांक  26  जनवरी  को  11529 महिला/पुरूष  व  41  बच्चे  तथा  27  जनवरी  को  8175  महिला/पुरूष  व  39  बच्चे  कुल  19704 महिला/पुरूष  तथा  80  बच्चों  को  उनके  स्वजन  से  मिलाया  गया।

मौनी अमावस्या  स्नान  पर्व  को  सकुशल  एवं  निर्विध्न  सम्पन्न  कराने  में  प्रेस  प्रतिनिधियों,  कल्पवासियों, प्रयागवाल,  साधु-सन्तों  एवं  स्नानार्थियों  का  भी  सहयोग  रहा,  जिसके  लिए  जिलाधिकारी  ने सभी  को  धन्यवाद  दिया।