Donald Trump

क्‍या डोनाल्‍ड ट्रंप ने बोला झूठ, ईरान हमले में 11 अमेरिकी सैनिक हुए थे घायल

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New Delhi: ईरान द्वारा इराक स्थित अमेरिकी बेस पर पिछले हफ्ते किए गए हमले में 11 अमेरिकी सैनिक घायल हुए थे। समाचार एजेंसी एएफपी न्यूज ने मध्य कमान के हवाले से यह जानकारी दी है। एजेंसी ने बताया कि पिछले हफ्ते ईरान के हमले में 11 अमेरिकी सैनिक घायल हुए थे। हालांकि, अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने कहा था कि ईरान द्वारा किए गए इस हमले में कोई भी अमेरिकी सैनिक घायल नहीं हुआ है। फिर क्‍या डोनाल्‍ड ट्रंप ने झूठ बोला था? ईरान ने इस हमले के बाद दावा किया था कि इसमें 21 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं।

बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच पिछले काफी समय से तनाव और युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं। इसकी शुरुआत ईरान के आर्मी चीफ जनरल कासिम सुलेमानी की मौत से शुरू हुई थी। अमेरिका के हवाई हमले में सुलेमानी, इराकी कमांडर अबु महदी अल-मुहंदिस समेत कई लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद ईरान ने अमेरिका को बदले की धमकी दी थी। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इराक स्थित अमेरिकी बेस पर 20 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। हमले के बाद ईरान की ओर से दावा किया गया था कि 21 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं। वहीं, डोनाल्‍ड ट्रंप ने कहा था कि हमले की सूचना उन्‍हें पहले ही मिल गई थी। इसलिए अमेरिकी सैनिक सुरक्षित स्‍थानों पर चले गए थे। इस दौरान उन्‍होंने साफ-साफ कहा था कि बेस को थोड़ा नुकसान जरूर हुआ है, लेकिन कोई भी सैनिक घायल नहीं हुआ। हालांकि, अब दावा किया जा रहा है कि ईरान के इस हमले में 11 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं।

सात दशक पुरानी है अमेरिका और ईरान के बीच की दुश्‍मनी

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव दशकों पुराना है। इसके पीछे न तो बगदाद स्थित अमेरिकी दूतावास पर हुआ प्रदर्शन और कासिम सुलेमानी की मौत, बल्कि यह केवल एक बहाना मात्र है। ईरान और अमेरिका की दुश्‍मनी या यूं कहें कि तनातनी ईरान में इस्‍लामिक क्रांति से भी पहले की है। हालिया, अमेरिकी-ईरान विवाद अब चरम पर पहुंच गया है। दरअसल, इसको वहां के शासक शाह पहलवी के तख्‍ता पलट ने और हवा दी। अयातुल्‍लाह खामेनेई द्वारा बनी सरकार ने इस दुश्‍मनी को चरम तक पहुंचा दिया। आपको बता दें कि शाह के तख्‍ता पलट के बाद से ही अमेरिका ने ईरान से सभी संबंध तोड़ लिए थे। तब से लेकर अब तक दोनों देशों की बदौलत कई बार दुनिया पर संकट के बादल छाए हैं।

महीनों की प्लानिंग और गुप्त सूचनाओं के बाद अमेरिका ने किया सुलेमानी को ढेर

बताया जा रहा है कि अमरेकी सेना ने ईरान के कमांडर कासिम सुलेमानी को महीनों की तैयारी के बाद ढेर किया। लगभग 18 महीने से कासिम पर अमेरिका नजर बनाए हुए था। महीनों तक लगातार निगरानी के बाद ही अमेरिका ने ड्रोन की मदद से सुलेमानी पर हमला किया। इस हमले में ही उनकी मौत हो गई। दूसरी ओर एक बात यह भी कही जा रही है कि यदि सुलेमानी की मौत के बाद ईरान किसी तरह से अमेरिका को नुकसान पहुंचाता या उस पर हमला करने की कोशिश करता तो अमेरिका उसके कमांड-एंड-कंट्रोल शिप को नष्ट कर देता। ऐसे में ईरान के तेल और गैस क्षेत्र को आंशिक रूप से अक्षम करने के लिए साइबर हमले को अंजाम देने की योजना भी बनाई गई थी। अमेरिका को इस मामले में ईरानी खुफिया तंत्र ने भी मदद की, उनसे भी कई जानकारियां मिली, जिसकी मदद से अमेरिका सुलेमानी को मार पाया।