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डीआई जांच में 25 लाख का मिला एक्सपाइरी दवा डीएम के आदेश पर दवा गोदाम सील

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Santosh Raj

संतोष राज

समस्तीपुर। डीआई जांच में शिवाजीनगर प्रखंड मुख्यालय स्थित केंद्रीय भंडार गृह में लाखों की एक्सपायरी दवा पायी गई है। भारी मात्रा में पाए गए एक्सपायर जीवन रक्षक दबाएं 25 लाख से ऊपर का बताया जा रहा है। एक्सपायरी दवा मामले की जांच करने पहुंचे ड्रग इंस्पेक्टर शम्भू नाथ ठाकुर ने डीएम के आदेश से दवा रखे केंद्रीय गोदाम  को सील कर विभागीय जांच शुरू कर दिया है।

बता दें कि मंगलवार दोपहर शिवाजीनगर पीएचसी के बाहर प्रखंड मुख्यालय परिसर स्थित गोदाम के बाहर फेंककर जलाए गए। एक्सपायरी दवाओं की तस्वीर वायरल होने पर लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण व ग्रामीण स्वच्छता समिति के अध्यक्ष ने स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को इस बात की सूचना दिया था।

सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए ड्रग इंस्पेक्टर के साथ समिति के सदस्यों नें मंगलवार देर शाम पीएचसी पहुंचकर मामले की जांच किया। जांच में भारी मात्रा में अधजले एक्सपायरी दवाओं के साथ साथ कामयाब दवाएं भी फेंका पाया गया था। इस दौरान समिति के सदस्यों ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी शिवाजीनगर से बात कर मौके पर बुलाना चाहे तो चिकित्सा प्रभारी बाहर रहने की बात कह मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया था।

डीआई जांच टीम पीएचसी पहुंच ऑन ड्यूटी  डॉक्टर की तलाश किए। परंतु आन ड्यूटी डॉ अजय कुमार अपने गायब थे। जांच टीम ने सिविल सर्जन व जिलाधिकारी समस्तीपुर को मामले की विस्तृत जानकारी दिया। डीएम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय भंडार को सील करने का आदेश ड्रग इंस्पेक्टर को दिया। डीएम के आदेश से ड्रग इंस्पेक्टर शम्भु नाथ ठाकुर ने एएसआई रामजी प्रसाद, पंसस रामदेव मंडल, देवेंद्र कुमार चौधरी, शम्भू बैठा, अरुण साहनी आदि उपस्थित जनप्रतिनिधियों  व पुलिस पदाधिकारी के मौजूदगी में दवा भंडार को सील कर दिया। डीआई ने जांच रिपोर्ट आगे की कार्रवाई के लिए सिविल सर्जन व डीएम को भेजा है।

इस बाबत पूछे जाने पर डीआई एस एन ठाकुर ने बताया कि अस्पताल के हेल्थ मैनेजर, चिकित्सा प्रभारी व दवा भंडार पाल पर नियमानुकूल विभागीय करवाई की जाएगी।

इधर जांच टीम के साथ रहे जिला पार्षद स्वर्णिमा सिंह, रंजन कुमार आदि ने कहा कि यह घटना अस्पताल कर्मी के नाकारात्मक सोच, कर्तव्यहीनता, सरकारी धन का दुरुपयोग व आमजनों के जान के साथ खिलवाड़ करने के समान है। जीवन रक्षक दवाओं को इस तरह बेकार करना निंदनीय व गंभीर मामला है। सरकार आम जनों के स्वास्थ्य लाभ हेतु दवाईयां भेजती है। परंतु यहां के चिकित्सा अधिकारियों के लापरवाही के चलते गरीब मरीजो को लाभ नहीं मिल पा रहा है।

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