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हर महीने 5,000 रुपये जमा कर 25 साल में पाएं 1 करोड़ रुपये, जानिए कैसे करता है यह काम

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New Delhi: फाइनेंशियल प्लानिंग में सबसे अहम होता है रिटायरमेंट के बाद की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक बड़ा फंड तैयार करना। अपने जीवन के उस पड़ाव को बिना किन्हीं दिक्कतों के सुखपूर्वक बिताने के लिए यह बहुत जरूरी है। वैसे देखा जाए, तो एक व्यक्ति के जीवन में दो स्टेज होती हैं। पहली होती है संचय की स्टेज। इसमें व्यक्ति अपनी पुरुषार्थ से धन का संचय करता है। दूसरी स्टेज होती है रिटायरमेंट स्टेज। इस स्टेज में जब व्यक्ति पुरुषार्थ करने में पहले की भांति समर्थ नहीं होता, तो वह अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए संचय किये गए धन का उपयोग करता है।

जानिए NPS क्या है?

1. इस समय रिटायरमेंट फंड के लिए NPS यानी नेशनल पेंशन सिस्टम देश में सबसे लोकप्रिय विकल्प है। इस योजना के 1.25 करोड़ सब्सक्राइबर्स हैं, जिसमें 44 लाख प्राइवेट सेक्टर के हैं। यह एक सरकारी रिटायरमेंट सेविंग स्कीम है।

2. सबसे अच्छी बात यह है कि यह म्युचुअल फंड की तरह ही मैनेज होता है। यही कारण है कि इससे काफी अच्छा रिटर्न कमाया जा सकता है।

3. यह योजना सरकारी और निजी दोनों सेक्टर के कर्मचारियों के लिए है। एक जनवरी 2004 के बाद नौकरी में आए सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए यह योजना अनिवार्य है।

4. योजना में ग्राहक को अपनी नौकरी के दौरान प्रति माह कुछ राशि एनपीएस के तहत जमा करानी होती है।

5. रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी तैयार हुए फंड का एक हिस्सा निकाल सकते हैं और शेष राशि से नियमित आय के लिए एनुइटी ले सकते हैं।

6. एनपीएस में 18 से 60 साल तक के लोग शामिल हो सकते हैं।

7. देश के लगभग सभी सरकारी और निजी बैंकों में जाकर एनपीएस अकाउंट खुलवाया जा सकता है।

कैसे काम करता है एनपीएस

एनपीएस म्युचुअल फंड की तरह ही मैनेज होता है। सेबी रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर जितेंद्र सोलंकी के अनुसार, इसमें तीन तरह से निवेश होता हैं। पहला इक्विटी, दूसरा कॉरपोरेट बॉन्ड और तीसरा गवर्नमेंट सिक्युरिटीज। ग्राहक को अपना निवेश तय करने के लिए एसेट अलोकेशन और ऑटो च्वाइस दोनों ही विकल्प मिलते हैं। ऑटो च्वाइस में शुरुआत में इक्विटी में 50 फीसद हिस्सा होता है और समय के साथ यह घटता जाता है। वहीं, एसेट अलोकेशन में ग्राहक को 75 फीसद तक इक्विटी में निवेश करने की अनुमती मिलती है।

कैसे करें एसेट अलोकेशन

अगर ग्राहक को एसेट अलोकेशन समझ ना आए और वे बार-बार यह करने से बचना चाहते हैं, तो ऑटो च्वाइस का विकल्प चुन सकते हैं। अगर ग्राहक एसेट अलोकेशन का विकल्प चुनते हैं, तो सोलंकी के अनुसार, निवेश का अधिकतम हिस्सा इक्विटी में रखना चाहिए। जब रिटायरमेंट पास आने लगे तो इक्विटी के हिस्से को थोड़ा कम कर लेना चाहिए। इससे ग्राहक लंबे समय में एनपीएस से उच्च रिटर्न कमा सकते हैं। एनपीएस में हर एक साल से पहले एसेट अलोकेशन की जरूरत नहीं पड़ती।

इतना कमा सकते हैं रिटर्न

एनपीएस में रिटर्न एसेट अलोकेशन, मासिक योगदान और मैच्योरिटी की अवधि पर निर्भर करता है। एनपीएस में औसत रिटर्न 9 से 10 फीसद मिल जाता है। सोलंकी के अनुसार, ग्राहक अगर हर महीने 5,000 रुपये जमा करे, तो रिटायरमेंट तक 25 साल में उसका फंड एक करोड़ रुपये हो जाएगा।

इस आयु में खुलवाएं अकाउंट

एनपीएस अकाउंट जितनी कम हो सके उतनी कम आयु में खुलवा लेना चाहिए। जिनती कम आयु में अकाउंट खुलेगा, उतना ही बड़ा रिटायरमेंट फंड बनने की संभावना होगी। अगर किसी कर्मचारी की रिटायरमेंट की उम्र 60 साल है, तो उसे 30 से 35 साल की आयु में एनपीएस अकाउंट खुलवा लेना चाहिए।

प्री-मैच्योर विड्रॉल को कहें ना

एनपीएस में वैसे तो प्री-मैच्योर विड्रॉल की अनुमति नहीं होती है, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में इसके लिए छूट दी हुई है। ग्राहक लिस्टेड बीमारी, घर खरीदने या बनाने, नया बिजनेस शुरू करने, बच्चों की पढ़ाई और शादी जैसे कार्यों के लिए ही प्री-मैच्योर विड्रॉल कर सकते हैं। एनपीएस अकाउंट शुरू होने के तीन साल बाद जितना फंड जमा हुआ है, उसमें से कंपनी के फंड के अलावा रकम के 25 फीसद की निकासी की जा सकती है। यहां बता दें कि प्री मैच्योर विड्रॉल पांच-पांच साल के फासले में केवल तीन बार ही किया जा सकता है। इसके बावजूद आर्क फाइनेंशियल प्लानर हेमंत बेनीवाल का कहना है कि एनपीएस ग्राहकों को प्री-मैच्योर विड्रॉल से बचना चाहिए।