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बैरिकेटिंग हटाने से रोकने पर ABVP नें दशाश्वामेध थानें का किया घेराव

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कार्यावाई के बजाये सीओ दशाश्वामेध स्नेहा तिवारी नें ABVP कार्यकर्ताओं को समझा बुझाकर शांत कराया…

Ankur Mishra

अंकुर मिश्रा

 

 

 

 

 

 

वाराणसी: मौनी अमावस्या पर आज पूरे शहर में कुंभ स्नान कर लौटे श्रद्धालूओं का रेला लगा रहा। ऐसे में मैदागिन से लेकर गोदौलिया तक के मार्ग पर जगह-जगह यातायात प्रतिबंधित रहा। साथ ही इस रास्ते से निकलने वाली गलियों में भी कई जगह बैरिकेटिंग की गई थी।

इन सब के बीच दशाश्वमेध थाने के ठीक सामने बांसफाटक निकलने वाले रस्ते पर लगी बैरिकेटिंग हटाकर जा रहे एक ABVP पदाधिकारी को वहां तैनात पुलिसकर्मी ने रोक दिया। इस बात से नाराज एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने थाने के समीप धरना दे दिया। सूचना पर मौके पर पहुंची सीओ स्नेहा तिवारी ने किसी तरह से समझा-बुझाकर धरना समाप्त करवाया।

इस सम्बन्ध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के महानगर मंत्री शिवम शाह ने बताया कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के काशी प्रांत के प्रान्त संगठन मंत्री विजय प्रताप आज जब दशाश्वमेध थाने के सामने वाली गली से बांसफाटक की तरफ जाने लगे तो बैरिकेटिंग पर तैनात पुलिसकर्मी ने उनसे दुर्व्यवहार किया। उन्हें भद्दी भद्दी गालियां दीं, जिसके विरोध में हम लोगों ने धरना दिया। हमारी मांग है कि उक्त पुलिसकर्मी को बुलाया जाए और वो हमारे प्रांत संगठन मंत्री से माफ़ी मांगे।

इस दौरान सीओ दशाश्वमेध स्‍नेहा तिवारी ने विद्यार्थी परिषद् के कार्यकर्ताओं को यह कहकर शांत कराया कि उक्‍त पुलिसकर्मी गैर जनपद का है, जिसे एबीवीपी के कार्यकर्ताओं के बारे में पता नहीं था। बता दें कि इसी गली में एबीवीपी का कार्यालय भी स्‍थित है।

इस सम्बन्ध में सीओ दशाश्वमेध स्नेहा तिवारी ने बताया कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के कार्यकर्ता की गई बैरिकेटिंग पार करके बाईक से जाना चाह रहा था। इस पर वहां तैनात पुलिसकर्मी ने उन्हें रोकने की कोशिश की। जिससे दोनों पक्षों में बहस हुई। इसके बाद नाराज कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए, जिन्हें तत्काल मेरे द्वारा पहुंचकर समझा बुझाकर शांत करवाया गया।

यहां सवाल यह उठता है कि जब ABVP का उक्त पदाधिकारी जबरन बैरिकेटिंग हटाकर मोटरसाइकिल सहित निकलना चाह रहा था और वहां तैनात पुलिसकर्मी द्वारा रोकने पर दशाश्वामेध थानें पर धरना-प्रदर्शन कर दिया गया तो ऐसे में पुलिस द्वारा ABVP के पदाधिकारी पर शांति भंग के चार्ज में कार्यावाई क्यो नही की गई, और तो और धरना-प्रदर्शन कर रहे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा यह सफाई देना कहां तक जायज़ है कि पदाधिकारी को बैरिकेटिंग पर रोकने वाला पुलिसकर्मी गैर जनपद का है और वह जानता नही था कि बैरिकेटिंग जबरन पार रहा व्यक्ति ABVP का पदाधिकारी है।

क्या जिला पुलिस पर ऊपर से दबाव है कि ABVP के कार्यकर्ताओं को कानून-व्यावस्था की धज्जियां उड़ानें दी जाये?

विदित हो कि अभी हाल ही में ABVP कार्यकर्ताओं नें बीएचयू के एक आदिवासी प्रोफेसर को चप्पल की माला पहनाकर, गाली-गलौच देते हुये बुरी तरह मारापीटा था, उस मामले में भी पुलिस की कार्यप्रणाली मूक दर्शक वाली थी।