अमेरिका ने दिखाया अपना असली रंग, पाकिस्तान से F16 छीनने के स्थान पर भारत से छीन ली ये चीज

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भारत के साथ तथाकथित मधुर संबंध को दर-किनारे कर ट्रंप नें भारत से आयातित प्रोडक्ट्स को कर-मुक्त श्रेणी से बाहर कर दिया है जो भारत की विदेश नीति पर सवालिया निशान है…

नई दिल्ली: चुनावी लड़ाई की तैयारी कर रही भारत की मोदी सरकार को अमेरिका ने तगड़ा झटका देते हुए उससे व्यापार के लिए अत्यंत पसंदीदा राष्ट्र का दर्जा छीन लिया है। अमेरिका के इस कदम से भारत का करीब 560 करोड़ डालर का व्यापार खतरे में पड़ गया है।

समाचार एजेंसी रायटर के अनुसार अमेरिका ने अपने बाजारों तक उसकी पहुंच प्रदान करने में विफल रहने के बाद भारत के कर मुक्त देश के दर्जे को समाप्त कर दिया है। अमेरिका ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कांग्रेस (संसद) को एक पत्र लिखकर यह जानकारी दी है। ट्रम्प ने सोमवार को कांग्रेस को बताया, “मैं प्राथमिकताओं के सामान्यीकरण प्रणाली (जीएसपी) कार्यक्रम के विकासशील देश के तौर पर भारत को प्राप्त उपाधि को समाप्त करने की सूचना प्रदान कर रहा हूं।

मैं यह कदम इसलिए उठा रहा हूं क्योंकि अमेरिका तथा भारत सरकार के बीच मजबूत सम्बंध के बावजूद मैंने यह पाया है कि भारत ने अमेरिका को यह आश्वासन नहीं दिया है कि वह अपने बाजारों में उसकी न्याय संगत और उचित पहुंच प्रदान करेगा।” इसके साथ ही ट्रम्प ने एक अलग पत्र में कांग्रेस को बताया है कि उन्होंने आर्थिक विकास के आधार पर तुर्की के कर मुक्त देश के दर्जे को भी समाप्त कर दिया है।

ट्रम्प ने यह कदम हाल ही भारत की ओर से अमेरिकी आयात पर शुल्क बढ़ाने के जवाब में उठाया है। ट्रम्प ने कहा है कि भारत सरकार के साथ काफी चर्चा के बाद वे ये क़दम उठा रहे हैं क्योंकि भारत ने अब तक अमेरिका को इस बात का आश्वासन नहीं दिया है कि वो अपने बाज़ारों तक अमेरिकी समान और उचित तरीके से पहुंचने देगा।

उल्लेखनीय है कि सन् 1970 में अमेरिका ने खास आयात नीति अपनाते हुए भारत और ​तुर्की को विकासशील देश के रूप में अत्यंत पसंदीदा राष्ट्र का दर्जा दिया था। इस दर्जे के समाप्त होने के बाद भारत का करीब 560 करोड़ डालर का सामान आयात शुल्क चुकाने के बाद ही अमेरिकी बाजारों तक पहुंच पाएगा।कांग्रेस जब इस आदेश को पारित कर देगी तब साठ दिन बाद यह नियम अमल में आ जाएगा। व्यापारिक प्रतिनिधि दफ्तर के बयान के अनुसार अप्रैल 2018 में इस बात पर पुनर्विचार करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी कि भारत को पसंदीदा राष्ट्र के दर्जे को बनाए रखना चाहिए अथवा नही।