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विकास में जमी धुंध छंटने के इंतजार में अमरोला के आदिवासी

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Rambihari pandey

रामबिहारी पांडेय

सीधी- संसदीय क्षेत्र के धौहनी विधानसभा के दर्जन भर से ज्यादा गांव ऐसे हैं, जो कभी नक्सल प्रभावित होने के कारण विकास से अछूते रहे हैं. शासन और प्रशासन के प्रयासों के बाद नक्सल कलंक से थोड़ी सी राहत मिली, तो भी विकास से अछूते ही रह गए.

दर्जनों गांव ऐसे हैं, जहां आज भी आधुनिक सुविधाएं मिलना तो दूर आजादी के पूर्व की सुविधाएं भी नहीं मिल पा रहे हैं. लोगों को आवागमन के साधन तो मिल ही नहीं रहे हैं और रोजमर्रा की जरूरतों की वस्तुएं पाने के लिए उन्हें छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले का उपयोग करना पड़ता है.

वहां भी पहुंचने के लिए लोगों को जंगली जानवरों सहित कई खतरों को पार करके पहुंचना पड़ रहा है. कहने के लिए तो सीधी संसदीय क्षेत्र के सभी नेता विकास के खूब धागे करके अपने छातिया पीट रहे हैं. लेकिन, धरातल में एक देखा जाए तो मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराना तो दूर रहा नाली नरदे से भी निजात नहीं मिल सकी है.

यदि यह कह दिया जाए, तो असहयोग तो नहीं होगा. अब देखिए ना कुसमी विकासखंड के दर्जनों गांवों के लोगों को हर साल लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे आदिवासी बहुल्य गांवों की सूरत नहीं बदल पा रही. यहां के लोग आज भी मूल-भूत सुविधाओं से वंचित हैं.

कुसमी विकास खंड की एक दर्जन पंचायतें छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित हैं. यहां के सरकारी कामकाज के लिए सीधी जिले पर निर्भर हैं. लेकिन हाट-बाजार सहित अन्य सुविधाएं वे छत्तीसगढ़ से लेनेे को मजबूर हैं. बच्चे छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती गांवों की स्कूलों में अध्ययन करते हैं। इन गांवों में मोबाइल नेटवर्क नहीं मिलता. थोड़ी-बहुुत नेटवर्क मिला भी तो छत्तीसगढ़ के मोबाइल टॉवर से.

अमरोला व केशलार पंचायत में सर्वाधिक समस्या:-

जमीनी हकीकत जानने के लिए छत्तीसगढ़ सीमा से लगी भुइमाड व केशलार पंचायत पहुंचे हमारे भुइमाड संवाददाता ने बताया कि वहां समस्याओं का अंबार है. सबसे बड़ी समस्या मोबाइल नेटवर्क की है. ग्रामीणों का कहना है कि नेटवर्क न मिलने से देश-दुनिया की खबरों से बेखबर रहना पड़ता है.

ग्रामीणों ने कहा कि हमने सुना है कि देश को डिजिटल इंडिया बनाने की दिशा में प्रयास चल रहा है. ज्यादातर कार्य अब एंडराइड मोबाइल के माध्यम से ही हो जाएंगे. लेकिन, यहां तो मोबाइल नेटवर्क ही नहीं है. ऐसे में कैसे डिजिटल इंडिया बनेगा. पहले तो ग्रामीण अंचलों को मोबाइल नेटवर्क सुविधा से जोड़े जाने की दिशा में सरकार को कार्य करना चाहिए.

स्वास्थ्य सुविधा:-

ग्राम पंचायत अमरोला एवं केशलार में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है. मोबाइल नेटवर्क न मिलने से लोग समय पर न तो डायल-100 और न 108 एम्बुलेंस की सेवा ले रहे पा रहे हैं। ऐसे में विवाद होने पर या फिर किसी महिला की डिलेवरी के लिए ग्रामीणों को खासा परेशान होना पड़ता है. स्वास्थ्य सुविधा के लिए करीब 20 किमी दूर भुइमाड़ स्वास्थ्य केंद्र तक का सफर करना पड़ता है.

नक्सल प्रभावित क्षेत्र:-

छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा से जुड़े अमरोला, केशलार व कुरचू सहित अन्य गांव नक्सल प्रभावित हैं. डेढ़ दशक पूर्व तक यहां नक्सली गतिविधियां देखने-सुनने को मिलती थीं. लेकिन, अब स्थितियां बदली हैं. यहां नक्सली घटनाएं तो थम गई हैं, लेकिन आदिवासी परिवार आज भी विकास की मुख्यधारा से अलग-थलग हैं. क्षेत्र में विकास के नाम पर बजट खूब आता है, लेकिन जमीनी बदलाव नजर नहीं आ रहा.