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बनारस को जाम के झांम से मुक्त करानें को चला बुलडोज़र, प्रशासन पर अमीरों को बख्शनें का लगा आरोप

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रेस्टॉरेंट को छोड़ा, चाय की दुकान ज़मींदोज… और हो गया माहौल गर्म

ताबिश अहमद की रिपोर्ट,

वाराणसी: पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र को स्मार्ट सिटी बनानें की मुहिम में बनारस का अतिक्रमण सबसे बड़ा रोड़ा है, जिसे हटाने के प्रयास में नगर निगम, वीडीए समय-समय पर अभियान चलाते रहते हैं।

इसी कड़ी में लंका क्षेत्र में चल रहे अतिक्रमण अभियान के दौरान उस वक्त मामला गरमा गया जब एक चाय की दुकान को जेसीबी से तोड़ दिया गया। बताया जाता है कि लंका क्षेत्र में गुमटी, ठेला खोमचे वालों को जेसीबी से हटवाते हुए जब एक रेस्टोरेंट के नीचे स्थित चाय की दुकान को तोड़ दिया गया तो नाराज लोगों ने रेस्टोरेंट में जमकर तोड़-फोड़ की। हालांकि लंका पुलिस ने सभी को खदेड़ दिया और तीन युवको को हिरासत में लेकर थाने ले जाया गया।

तोड़फोड़ करने वालों का आरोप था कि अतिक्रमण दस्ते वाले रेस्टोरेंट को तोड़ने की बजाय गरीबों का शोषण कर रहे हैं जबकि अमीरों को छोड़ दे रहे हैं। अतिक्रमण हटाने के नाम पर पुलिस-प्रशासन ने गरीबों की दुकानों को तोड़ दिया, लेकिन रसूखदारों को मोहलत दे दी। पीड़ितों का कहना है कि अतिक्रमण की कार्यवाही करना है तो सभी पर बराबर करें।

दूसरी तरफ चाय बेचने वाले सदानंद ने आरोप लगाते हुए बताया कि कई वर्षों से दुकान का मामला न्यायालय में लंबित होने के बावजूद किसी व्यक्ति विशेष के दबाव में दस्ते ने हमारी दुकान को तहस नहस कर दिया। अतिक्रमण अभियान चलने के पहले एसीएम प्रथम से गिड़गिड़ाता रहा और कागज दिखाने की बात भी कहता रहा लेकिन हमारी किसी ने नहीं सुनी, वही अमीरों को मोहलत दे दी गई।

अतिक्रमण दस्ते में एसीएम प्रथम सुशील गोंड, सीओ भेलूपुर अयोध्या प्रसाद सिंह, नगर निगम जोनल अधिकारी समेत अन्य अधिकारियों के साथ भारी पुलिस बल मौजूद था।