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कुंभ मेला

अर्ध कुंभ के लिये इलाहाबाद में होने वाले विकास कार्यो पर क्या वास्तव में 4200 करोड़ रुपए खर्च होगें?

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जनवरी 2019 में होने वाले अर्ध कुंभ की तैयारियाँ संगम नगरी में जोरो-शोरों से जारी है। जनमंच न्यूज़ के उत्तरप्रदेश संपादक नें स्वंय इलाहाबाद का दौरा किया, जो पाया पेश है उसका विशलेषण…

Shabab Khan

शबाब ख़ान (वरिष्ठ पत्रकार)

 

 

 

 

 

 

जनमंच विशेष: केंद्र और राज्य सरकार मिलकर 2019 के अर्ध कुंभ को एक विश्व स्तरीय मेगा इवेंट के तौर पर दुनिया के सामने पेश करने की पूरी तैयारियाँ कर रही हैं। संगम नगरी में इस अर्ध कुंभ में कई विदेशी मेहमान, प्रवासी भारतीयों का आगमन होगा जिसे देखते हुये पूरे इलाहाबाद शहर का नक्शा बदलने में सरकार लगी है। लगभग 4200 करोड़ रुपए के बजट में संगम नगरी को एक बदला हुआ स्वरूप देने की कोशिश की जा रही है।

इलाहाबाद के इसी बदलते स्वरूप का जायज़ा लेनें जनमंच न्यूज़ की विशेष टीम संगम नगरी पहुँची और वहाँ जारी कार्यो का बारीकी से अध्य्यन किया।

सब खास बात जो सबसे पहले स्पष्ट करना चाहुँगा वो यह कि पूरे इलाहाबाद नगर को विकास कार्यो के लिये नही चुना गया है। विकास कार्य सिर्फ उसी जगह हो रहा है जहाँ से लाखों श्रद्धालु गुजरकर गंगा, यमुना और अादृश्य सरस्वती के मिलन स्थल पर पहुँचेगें। विदेशी मेहमानों और एनआरआई के लिये इलाहाबाद के बमरौली हवाई अड्डे से संगम तक का मार्ग और देशी स्नानार्थयों के लिये इलाहाबाद जंक्शन, प्रयाग स्टेशन, इलाहाबाद सिटी स्टेशन, फाफामऊ स्टेशन, झूंसी स्टेशन, सिविल लाइंस बस स्टेशन, जीरो रोड बस स्टेशन को संगम तक जोडने वाले मार्गों की तेजी से मरहम पट्टी हो रही है।

शहर को हिंदुत्व के रंग में जितना हो सकता है उतना रंगा जा रहा है। सरकारी इमारतों को आकर्षक रंगों से सजाकर उस पर भगवान शिव, ऋषि मुनियों की तस्वीरें, भारतीय सभ्यता को दर्शाने वाली पेटिंग्स की जा रही है। शहर के सिविल लाइंस में स्थित कमर्शियल बिल्डिंग इंदिरा भवन को सफेद रंग में पेंट किया गया है और अब पूरी बिल्डिंग पर रंग बिरंगे रंगों से भगवान, ऋषि मुनियों की पेंटिंग की जा रही है। डीएसए ग्राऊंड से सटे रेलवे कॉलोनी के सरकारी क्वाटरों को भी विभिन्न रंगों से पेंट कर दिया गया है। इन तीन मंजिला इमारतों के पूरे ब्लॉक को पेंट किया गया है। किसी इमारत पर अगस्ता मुनि तो किसी पर भारद्धाज मुनि की काया को पेंट किया गया है। एक दो इमारतों को तिरंगे के रंग में भी पेंट किया गया है। सुभाष चंद्र बोस की काया भी एक इमारत पर नजर आई।

शहर के पुराने और नये अोवर ब्रिज व फ्लाई ओवर की बाहरी दीवारों पर पीले रंग से पेंटिंग करके उस पर लाल रंग से ओम और श्री जैसे शब्दों को लिखा गया है। इसके अलावा मुख्य मार्गो पर पड़नें वाली खाली दीवारों पर भी अाकर्षक पेंटिंग की गयी है, जिसमें गांव-गिरांव का जीवन, स्वत्रंता सेनानी की तस्वीरें, कारगिल युद्ध से लेकर साधू-संतो तक की तस्वीरें बनाई गई है जो वास्तव में खूबसूरत लग रही हैं, लेकिन इस तस्वीरों को मैं विकास का नाम नही दे सकता।

बहरहाल, सिविल लाइंस में फॉयर ब्रिगेड के सामने हेमंती नंदन बहुगुणा की कई दशक पुरानी मूर्ति को तिरपाल से बांधकर छिपा दिया गया है। मेयो हॉल और डीएसए ग्राऊंड को भी मेला प्रशासन नें अपने हाथ में ले लिया है।

इलाहाबाद के सबसे ओपन और पॉश इलाकों में सर्वप्रथम आने वाले सिविल लाइंस क्षेत्र यानि एमजी रोड पर जगह जगह एलईडी स्क्रीन नजर आई जो कुंभ मेले से लेकर इलाहाबाद के इतिहास के साथ-साथ भाजपा सरकार का भी गुणगान कर रही हैं। लोकल बस के लिये मेट्रो शहर जैसा बस स्टैड भी बनाया गया है हालांकि सूत्रानुसार इलाहाबाद में लोकल बसे नही बल्कि ऑटोरिक्शा और बैट्री रिक्शा ही चलते हैं। मेन सड़कों पर एलईडी लाईट्स लगाई जा रही हैं। एमजी रोड पर बनारस के हेरिटेज खंभों की तर्ज पर कुछ दर्जन खंभे लगाये गये जिसमें पीली एलईडी लाईट्स का प्रयोग किया गया है। नये यमुना पुल को लेजर लाईट्स का प्रयोग करके रात में रंग बिरंगा दिखाया जा रहा है।

दूसरे शहरों में सड़को का चौड़ीकरण होता है, लेकिन एडीए की सीमित दूरदर्शिता का आलम यह है कि इलाहाबाद की जो सड़के चौड़ी हुआ करती थीं जिस पर कभी जाम की समस्या नही हुई, उन चौड़ी सड़कों के बीच में सिमेंटेड डिवाइडर बनाकर उसे टू वे कर दिया गया है, जिससे आने वाले समय में एमजी रोड, कंपनी बाग रोड, युनिवर्सिटी रोड, जानसेनगंज चौराहा, फॉयर ब्रिगेड चौराहा, रामबाग, मेडिकल चौराहा जाम की चपेट में आ जायेगा।

सड़को की हालत पतली है, गड्डे इतने बड़े और गहरे है कि वाहन चालकों को समझ नही आता कि वो गड्डे में हैं या गड्डे के बाहर। मानसरोवर टाकीज, चंद्रलोक टाकीज, निरंजन टाकीज, कॉफी हाऊज़, सिविल लाइंस में एमजी रोड के किनारे रोड साईड रेस्टोरेंट गायब हो चुके है उसकी जगह एक खालीपन ने ले लिया है। शहर से अतिक्रमण हटाने के लिये वृहद रूप से कार्य हुआ है। सिविल लाइंस, कचहरी, हाईकोर्ट के आसपास अवैध रूप से बनी दुकानें ज़मीदोज कर दी गई है उनके स्थान पर अब सड़क से कुछ ऊँचा फुटपाथ बन रहा है।

इलाहाबाद रेलवे स्टेशन के बाहर गजब का सन्नाटा नजर आया, एक अजीब सा सूनापन। स्टेशन परिसर के बाहर सभी अवैध दुकान व निर्माण को सिरे से हटा दिया गया है। वहां भी चौराहे को स्टीक रेलिंग से घेरा जा रहा है, उसके बीच में किसी की प्रतिमा खड़ी की जायेगी या पाकिस्तान से जीती गई जंग में जब्त पाकिस्तानी टैंकों को इन चौराहों पर सजाया जायेगा फिलहाल यह सवाल समय के गर्भ में है।

शहर में मुख्य मार्गो पर पड़नें वाले चौराहो को स्टील रेलिंग लगाकर घेरा जा रहा है। सर्कुलर रेलिंग के बीच में जाहिर है भारत के महापुरुषों की मूर्ति लगेगी जिसमें उम्मीद कम है कि गांधी, नेहरू, इंदिरा को जगह मिलेगी। जीटीबी नगर यानि करेली जो कभी एशिया की सबसे बड़ी रेसिडेन्शियल कॉलोनी हुआ करती थीं अपनी किस्मत पर आंसु बहाती नजर आई। इलाहाबाद विकास प्रधिकरण के आधीन आने वाली यह पॉश कॉलोनी पहले विकास कार्यो में अव्वल रहती थी। अब हालात ऐसे हैं कि सी ब्लॉक, बी ब्लॉक की हर सड़के टूटी फूटी पड़ी हैं। सोलह मार्केट वाली रोड मेरे सामने 1998 में ठीक से रिपेयर हुयी थी, बीस साल बाद उस लंबी सीधी सड़क के हर दो फीट के बाद गड्डे बन गये है। करेली की सड़कों की ऐसी हालत क्यों? क्या इसलिए क्योकि करेली मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र बन गया है?

एक और विशेष बदलाव दिखा इलाहाबाद में, खुल्दाबाद क्षेत्र का प्राचीन गुड़िया तालाब अब प्ले ग्राऊंड बन चुका है। पहली बार किसी तालाब में बच्चों को क्रिकेट खेलते देखा तो समझ नही आया कि यह खुशी की बात है या शर्मनाक। क्या इलाहाबाद नगर निगम के पास इतने संसाधन भी नही है कि वो एक छोटे से तालाब में पानी भर कर उसे तालाब ही रहने दे? शहर के क्षेत्रीय सभासद और मेयर पर बड़ा सवाल गुड़िया तालाब का बदला स्वरूप उठाता है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो मेले का 4200 करोड़ रुपए शहर में कहां खर्च हो रहा है समझना मुश्किल है जबकि हाईकोर्ट और रामबाग फ्लाईओवर पहले से बनकर तैयार है। कुंभ नगरी में अस्थायी टेंट, विद्युत पोल, मोबाइल शौचालयों पर शायद ही कुल बजट का 5 प्रतिशत खर्च होगा, बाकी का पैसा सरकार और कहां-कहां खर्च करेगी यह आने वाले समय में स्पष्ट हो जायेगा। फिलहाल इलाहाबाद का विकास दावो के अनुरूप हमें तो कहीं नजर नही आया, नजर आया तो बस रंग-बिरंगे रंगों से दीवारों, इमारतों, फ्लाईओवरो, ओवरब्रिजों पर बनी हुई तरह-तरह की पेंटिंग्स। धन्य हो भाजपा सरकार।

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