बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

सुशासन बाबू का अनोखा कारनामा…अपराधी नहीं उसकी जाति ढूंढने में सफल हुए

142
सतीश कुमार

सतीश कुमार की कलम से…

विचार। साथियों, आजकल वैशाली जिला के प्रखंड राघोपुर के कबीर चौक पर दलितों के घर जलाए जाने की घटना पूरे जोर-शोर से मीडिया और सोशल मीडिया में वायरल हो रही है। इस घटना की जितनी निंदा की जाए वह कम है। इस घटना को तुल इसलिए भी दिया जा रहा है क्योंकि यह क्षेत्र बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री श्री तेजस्वी प्रसाद यादव का निर्वाचन क्षेत्र है लेकिन दूसरी ओर इस बात को छुपाने की कोशिश की जा रही है कि यह केंद्रीय मंत्री श्री रामविलास पासवान जी का भी निर्वाचन क्षेत्र है।

इस घटना को पूरी तरीके से NDA के लोग जातीय रंग देने में लगे हुए हैं। जोर-जोर से यह कहा जा रहा है कि आग लगाने वाले यादव जाति के लोग थे जिनका संबंध राष्ट्रीय जनता दल से है। दूसरी तरफ गया जिला टिकारी थाना अंतर्गत पूरा ग्राम में अर्जुन मांझी की हत्या बंदूक और बूट् से चूर-चूर कर कर दी जाती है। जिसमें 7 सामंती लोगों पर FIR दर्ज किया जाता है लेकिन इनकी जाति का उल्लेख नहीं होता है।

बक्सर जिला के नंदनपुर गांव में मुख्यमंत्री की यात्रा के बाद दलित महिलाओं, बच्चों, गर्भवती महिलाओं, अपंग, वृद्ध लोगों पर पुलिस बर्बरता की सारी इंतहा पार करती है। उल्टा उन पर मुकदमा कर उन्हें जेल भेजा जाता है तब क्या कोई सरकार का नुमाइंदा उनसे मिलने जाता है? नवादा जिले के पास अलीगंज थाना अंतर्गत अपसढ़ गांव में टाले मांझी को सिर्फ इसलिए जिंदा जला दिया जाता है। वह अपनी जवान बेटी को सामंती  को सुपुत्र करने से इनकार करते हैं।

मगध विश्वविद्यालय बोधगया थाना अंतर्गत कोशला गांव में दलितों के दर्जनों घरोंं को तहस-नहस कर उनके सारे खाने पीने के सामान लूट लिए जाते हैं लेकिन कोई सरकार का नुमाइंदा उनसे मिलने तक नहीं जाता है। उल्टा समंतियो द्वारा इन लोगों पर प्राथमिकी भी दर्ज कराया जाता है। दलितों द्वारा कराए गए प्राथमिकी पर किसी की गिरफ्तारी तो दूर पुलिस प्रशासन गांवों का दौरा तक नहीं करती।

दीपावली के दिन खगड़िया जिले के छनसिया गांव में पचासी परिवारों के घरों को जला दिया जाता है। जिनसे मिलने सरकार का कोई नुमाइंदा तक नहीं जाता है और भागलपुर जिले के झंडापुर गांव में पति पत्नी की हत्या के बाद उनकी बेटी का गुप्तांग को काट दिया जाता है।

गया शहर में 6 फरवरी को 3 बच्चों का अपहरण हुआ था। जिनकी उम्र लगभग 8 और 9 साल थी। इसमें से 8 साल की बच्ची तनु (काल्पनिक नाम) की बेरहमी से बलात्कार के बाद निर्मम हत्या कर दी जाती है और शव को फेंक दिया जाता है। जब दूसरे दिन शव बरामद होता है, उसको लेकर लोग विरोध प्रदर्शन करते हैं। अपराधियों की गिरफ्तारी की मांग करते हैं तो उल्टे प्रदर्शनकारियों पर लाठी बरसायी जाती है और लगभग दो दर्जन लोगों पर मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जाता है।

उस दिन गया शहर में मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी मौजूद रहने के बावजूद पीड़ित परिवार से मिलते हैं न ही उस बच्ची के शव को देखते हैं और एयरपोर्ट पर ही समीक्षा बैठक कर वहां से वापस लौट जाते हैं। सबसे आश्चर्य की बात तो तब होती है जब गया शहर के स्थानीय विधायक डॉ. प्रेम कुमार जो बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। उसके परिजन से न तो मिलने जाते हैं ना उनका फोन पर हाल-चाल लेते हैं।

4 माह बीतने के बावजूद अभी तक ना तो मंत्री जी गए है न ही गया के भाजपा सांसद और ना ही इनका कोई नुमाइंदा उन पीड़ित परिवारों से मिलता है। 3 महीने पहले गया शहर से रजनीश पाठक, निशांत श्रीवास्तव, संतोष कुमार स्वर्णकार और चंदन कुमार का अपहरण हो जाता है और इनका अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है।

उनके परिजन दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं लेकिन यहां के स्थानीय विधायक प्रेम कुमार जी और भाजपा सांसद इनसे मिलने का भी काम नहीं करते, ना ही कोई सरकार का नुमाइंदा उनके घर पर इनके आंसू पोछने का काम करते हैं तथा बिहार में रोज-रोज महिलाओं और लड़कियों की इज्जत के साथ खेला जा रहा है, उसका वीडियो बनाकर वायरल किया जा रहा है। हत्या, लूट, अपहरण, डकैती, बलात्कार आम दिनों की बात हो गई है।

राज्य सरकार रोक लगाने के बजाय अपनी विफलता छुपाने के लिए इसका सांप्रदायिक और जातीय रंग दे रही है। जो दुर्भाग्यपूर्ण है और मुख्यमंत्री पूरे देश में घूम-घूमकर न्याय के साथ विकास की बात करते हैं। क्या यही न्याय है? बिहार पहला राज्य है जहां 2 अप्रैल को SC, ST, OBC के हक और अधिकारों पर की जा रही कटौती के खिलाफ भारत बंद के दरमियान गिरफ्तार किए गए। साथियों का नाम गुंडा रजिस्टर में लिखने की बात कही जा रही है।

क्या यही दलित प्रेम है? यह कुछ उदाहरण सुशासन बाबू के नेतृत्व में बनी डबल इंजन की सरकार की है। हम इनसे से मांग करते हैं कि जाति ढूंढने के बजाय अपराधी ढूंढा जाए, चाहे उसका संबंध किसी भी जाति, धर्म या राजनीतिक दल से हो यह देखे बगैर उसको जितनी सख्त से सख्त सजा दी जा सकती है। वह देना चाहिए तथा इस तरह के अपराध के जड़ को ढूंढना चाहिए। बिहार में ज्यादातर अपराध के जड़ में भूमि विवाद है लेकिन अपने द्वारा बनाए गए डी. बंदोपाध्याय कमेटी की रिपोर्ट को जो ठंडे बस्ते में फेंक दिए हैं। उसे लागू करें और बिहार में व्याप्त भूमि विवाद को सुलझाने का काम करें।

(ये लेखक के अपने विचार है। लेखक युवा राष्ट्रीय जनता दल, गया के अध्यक्ष हैं।)

वीडियो भी देखें…