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ये जन प्रतिनिधि हैं या व्यापारी?

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Omprakash Varma

ओमप्रकाश वर्मा

विचार। सवाल आपसे से ही, बताईए देश में खासकर राजस्थान में कितने जन प्रतिनिधि यानी कि जनता प्रतिनिधि हैं, जो आमजन को सुख-सुविधाओं मुहैया करा न्याय दिलाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं?

इस बारे में जानकारी नहीं है तो आरटीआई के तहत जन प्रतिनिधियों के दायित्व और कर्तव्यों के बारे में जानकारी मांग लीजिए। यह आपके लिए बहुत ही जरूरी है।

जन प्रतिनिधि विशुद्ध रूप से व्यवसाई बन गए हैं। वे आपके वोट की ताकत का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं और आपको वोट की ताकत का अहसास ही नहीं है। आप और आपके आश्रित इसका खामियाजा भोग रहे हैं, फिर भी आपकी आंखें नहीं खुल रही हैं। नवंबर, 2०18 में एक साल बाकी है, जो उम्मीदवार तरह-तरह के वादे कर आपके वोट को ले गए थे, फिर आपके द्बार पर आने वाले हैं।

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Janmanchnews.com

अपना नहीं अपने समाज व देश के विकास के लिए उम्मीदवार से सवाल-जवाब कीजिए। चुनाव प्रचार में पानी की तरह पैसा बहाने वाला उम्मीदवार आपका नहीं अपना विकास करता है। विश्वास नहीं है, अपने क्षेत्र के एमपी, एमएलए, सरपंच, प्रधान, जिला प्रमुख, नगर पालिका/परिषद अध्यक्ष/सभापति को देख लीजिए, उनकी चुनाव से पहले स्थिति क्या थी और अब क्या है?

भीड़ के पीछे दौड़ने से कोई फायदा नहीं है। अपने वोट की ताकत को समझो और निम्न व अल्प आय वर्ग के लोगों को बताओ। रूलिंग पार्टियों के उम्मीदवार निम्न व अल्प आय वर्ग के मतदाताओं को ही बहला-फुसलाकर वोट हथियाने में कामयाब हो जाते हैं और वे उन्हीं के वोटों से जीतते हैं।

कारण निम्न व अल्प आय वर्ग के लोग न तो शिक्षित हैं और ना ही वे फेशबुक व व्हाट्सएप से जुड़े हैं और ना ही टीवी न्यूज चैनल देखते हैं, न अखबार पढ़ते हैं, इसलिए वे दुनियाभर की गतिविधियों से अनजान रहते हैं। रूलिंग पार्टियों के उम्मीदवार इसी कमजोरी का फायदा उटाते हैं और चुनावों के दौरान वे निम् प व अल्प आय वर्ग के मतदाताओं को आटे के कट्टे, दाल की थैली, शराब के पव्वे व नोट दिखाकर वोट हथियाने में कामयाब हो जाते हैं, फिर जीता हुआ उम्मीदवार कितने गैर कानूनी व नियम विरुद्ध कार्य करता है, आप कल्पना भी कर सकते हैं।
जरा सोचिए!

आपका चुप रहना देश को ही नहीं आपको भी बर्बाद कर रहा है ज्यादा नहीं तो पांच निम्न व अल्प आय वर्ग के मतदाताओं को बताईए कि उनके वोट की ताकत से जीता उम्मीदवार क्या करता है। अपने वोट का हक चाहते हो तो निर्णय लीजिए कि वे पार्टी-पोलिटिक्स के चक्कर में नहीं पड़ेंगे। ईमानदार, देश व समाज के प्रति समर्पित और सुख-दुख में साथ निभाने वाले ईमानदार उम्मीदवार को वोट देंगे, चाहे वह निर्दलीय हो या किसी पार्टी का।

ध्यान रखिए, चुनाव में उम्मीदवार व सरकार की ओर से खर्च की जा रही राशि का बोझ आपके ही ऊपर पड़ता है। भ्रष्ट उम्मीदवार को वोट देने से वे मतदाता बेवजह पिसते हैं, जो देश और समाज के विकास के लिए ईमानदार उम्मीदवार को वोट देते हैं।