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तीन तलाक, सरकार, सुप्रीम कोर्ट और शिक्षा

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हम मदरसों में इसीलिए सामाजिक शिक्षा के साथ धार्मिक शिक्षा भी देते हैं। तो आर एस एस के लोग कहते है कि मदरसों मे आतंकवाद की शिक्षा दी जाती है। आखिर मुसलमान किस तरह अपने आपको साबित करे कि हम देशभक्त थे, हैं और रहेंगे…

Ramzan Ali

रमज़ान अली

विचार। हम भारतीय मुसलमान भारतीय परम्परा और भारत के कानून के संरक्षक हैं। हम इसे दिल से मानते है। तीन तलाक हमारे मज़हब और शरीयत का हिस्सा है। अल्लाह के नज़दीक तीन तलाक सबसे निम्न स्तर का कार्य है लेकिन दुर्लभ मामलों में इसकी इजाजत दी गयी है। जब कोई तलाक देता है तो ज़मीनों-आसमान हिल जाता है।

एक मिसाल देना चाहता हूं कि छूरी बनाई जाती है सब्जियां इत्यादि काटने के लिए लेकिन अगर उस छुरी से कोई किसी का गला काट दे तो दोष छुरी का नही छुरी से गला काटने वाले का है। सजा छुरी को नहीं गला काटने वालो को मिलना चाहिए।

सरकार, सुप्रीम कोर्ट तलाक पर बड़ी से बड़ी सजा मुकर्रर कर दे। तलाक खत्म हो जायेगा। लेकिन शरीयत से तलाक को खत्म करना मुसलमान कत्तई बर्दास्त नहीं कर सकता।

वैज्ञानिक तौर पर किसी चीज़ को खत्म करना हो तो उसका कारण तलाशते हैं। उस कारण को खत्म करते हैं। वह चीज़ स्वतः समाप्त हो जाती है। तलाक का कारण ही अशिक्षा है। सरकार, सुप्रीम कोर्ट ऐसी व्यवस्था करे कि सारे मुसलमान शिक्षित हो जाये। इसका एक सबसे बड़ा कारण मुसलमानो मे धार्मिक शिक्षा की कमी भी है।

हम मदरसों में इसीलिए सामाजिक शिक्षा के साथ धार्मिक शिक्षा भी देते हैं। तो आर एस एस के लोग कहते है कि मदरसों मे आतंकवाद की शिक्षा दी जाती है। आखिर मुसलमान किस तरह अपने आपको साबित करे कि हम देशभक्त थे, हैं और रहेंगे।

देश मे इस तरीके का खलफसार पूरी दुनिया मे देश की अस्मिता पर खतरा पैदा कर रहा है। देश सिर्फ सेक्युलरिज़्म से चल सकता है। साम्प्रदायिकता से नही।

( लेखक वाराणसी नगर निगम के वार्ड नंबर 86 के पार्षद है। यह लेखक के अपने विचार हैं।)