Baga special tribal

कमलनाथ सरकार बनते ही बैगा आदिवासियों में जगी उत्थान की आस

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Rambihari pandey

रामबिहारी पांडेय

सीधी- जिला आदिवासी बाहुल्य जिला माना जाता हैं, जहां प्रमुख आदिवासी बैगा जाति के लोग निवास करते हैं. किंतु, सरकार की नजरंदाजी के कारण जिले के बैगाओं के उत्थान के लिए जिले को बैगा विकास प्राधिकरण से नहीं जोड़ा गया.

जिसके कारण जिले के बैगा विशेष आदिवासी जाति का उत्थान नहीं हो पा रहा है. आलम यह है कि यदि विभागीय सर्वे की बात मानें तो जिले के बैगा जाति के लोगोंं का शिक्षा स्तर सिर्फ पांच प्रतिशत है.

इस आकड़े से बैगाओं के विकास का अंदाजा लगाया जा सकता है. जबकि, बैगा जाति के उत्थान के लिए विगत 19 वर्ष पूर्व से प्रदेश में जितनी सरकारे आई सभी ने जिले मे बैगा विकास प्राधिकरण में जोड़ने की घोषणा की. किंतु इस घोषणा को हकीकत का पंख नहीं लग पाया. शिवराज सरकार ने मंजूरी दिया था और प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया गया था किंतु केंद्र मे भी फाइल लटक कर रह गई है.

मालूम हो कि जिले में प्रवास के दौरान 27 अप्रैल 1997 को तत्कालीन प्रदेश के मुयमंत्री दिग्वजय सिंह के द्वारा सीधी जिले के बैगाओं के उत्थान के लिए बैगा विकास प्राधिकरण शहडोल से जिले को संबंद्ध करने की घोंषणा किए. कलेक्टर को जाति जनगणना करने के निर्देश दिए. जिस पर कुछ कार्य हुआ किंतु संबंद्धता नहीं हो पाई.

उसके बाद बतौर मुख्यमंत्री उमा भारती, बाबूलाल गौर सहित शिवराज सिंह ने बैगा प्रोजेक्ट मे सीधी को शामिल करने के लिए पत्राचार तो किए, किंतु विशेष सख्ती न होने के कारण यह प्रोजेक्ट अधर में लटका हुआ है. यहां तक कि बैगा जाति के सर्वे कार्य के लिए शासन के द्वारा 4 लाख 40 हजार ३०० रूपए का वजट भी उपलब्ध कराया गया था.

वहीं प्रारंभिक तौर पर प्रोजेक्ट संचालन के लिए 4 करोड़ 74 लाख 70 हजार रूपए बजट की आवश्यकता महसूस की गई थी. किंतु, अभी तक इस दिशा में कोई खास कदम नहीं उठाया गया है. यद्यपि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के द्वारा जिले को बैगा विकास प्राधिकरण से शामिल करने के लिए शहडोल मंडल में संयोजित करने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जा चुका है. जिसमें प्रदेश के दस जिले को शामिल किया गया है.

सर्वें में चिंतनीय शिक्षा स्तर-

जिले को बैगा विकास प्राधिकरण परियोजना मेंं शामिल करने को लेकर राज्य शासन के द्वारा बैगा जाति का विभिन्न स्तर पर सर्वे कराया गया था. इस सर्वे में बैगा जाति के लोगों मे शिक्षा का स्तर अत्यंत दयनीय रहा. जहां शिक्षा स्तर मात्र पांच प्रतिशत पाया गया. ऐसी स्थिति में बैगा जातियों के लोगो का शिक्षा स्तर सुधारने के लिए विशेष कवायद की जरूरत है.

इन विंदुओ को बनाया गया है आधार-

जिले को बैगा विकास प्राधिकरण में शामिल करने के लिए चार विंदुओ का आधार बनाया गया हैं. जिसमें वन जातियों जो कृषि प्रौद्योगिकी स्तर पर निवास कर रही हैं, जनजातियां जिनका शिक्षा स्तर पांच प्रतिशत से कम है, सामान्य जीवन में अलग-थलग एवं जनसंख्या वृद्धि दर घट, बढ़ रही है या स्थिर है इस आधार प्राधिकरण में शामिल करने की सिफारिस की गई है.

डीपीआर तैयार केंद्र की हां का इंतजार-

बताया गया कि जिले को शहडोल बैगा विकास प्राधिकरण अंतर्गत शामिल करने के लिए राज्य शासन के निर्देश पर डीपीआर तैयार कर लिया गया हैं. जिसमें नवीन सिरे से प्राधिकरण कार्यालय शहडोल के लिए पद का भी सृजन किया गया है. इस डीपीआर व अनुसंशा के साथ राज्य शासन के द्वारा केंद्र सरकार को सहमति व अनुवंध के लिए प्रस्ताव भेजा गया है. केंद्र की अनुमति मिलने के बाद इस प्राधिकरण के वजट से बैगा जाति के गांवो व उनके विकास के लिए नए रास्ते खुल जाएंगे.

ये मिलेगी सुविधाएं-

यदि जिले के चिन्हिंत बैगा निवास करने वाले 191 गांवो को प्राधिकरण मे शामिल कर लिया जाता है, तो विशेष आदिवासी जाति बैगा के विकास के लिए कई रास्ते खुल जाएगें.

जिसमें पक्के आवास, स्वास्थ्य केंद्रो का विस्तार, मूलभूत सुवुधाएं जिसमें एप्रोज रोड़, बिजली, पानी, सौर उर्जा, सर्वें मे यह बात सामने आई है कि बैगा जाति के पास औसतन जमीन 0.14 प्रतिशत प्रति परिवार है किंतु सिचाई संसाधनों के न होने के कारण पड़ती रहती है. जहां सिचाई सुविधा का विस्तार, स्थाई रोजगार की उपलब्धता सहित अन्य सुविधांए प्राधिकरण में शामिल होने के बाद विकसित हो सकती है.