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सीएमओ साहब! आखिर कब सुधरेंगे आपके डॉक्टर…?

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Rahul Yadav

राहुल यादव

रायबरेली। एक तरफ प्रदेश सरकार सरकारी अस्पताल पर हर साल कई करोड़ रुपये खर्च कर स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास कर रही है। साथ ही विभिन्न प्रकार की योजनाओ को भी अमली जामा पहनाया जा रहा है। लाख कोशिशों के बावजूद सरकार की मंशाओं पर सरकारी अस्पताल के डॉक्टर व अन्य आलाधिकारी योजना पर कालिख पोत रहे है।

समुदायिक स्वास्थ केंद्र जतुवा टप्पा में डॉक्टरों की मिलीभगत से दवाइयों का काला कारोबार अपने चरम पर है। इस सीएचसी से जो तस्वीरें निकलकर के सामने आई हैं, वाकई हैरान कर देने वाली हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही की जा रही है। सीएचसी अधीक्षक डॉ बृजेश कुमार व उनके असिस्टेंट डॉ जय प्रकाश मरीज़ों को धड़ल्ले से बाहर की दवाएं लिख रहे हैं।

अस्पताल में निडिल व विको तक उपलब्ध नही है। यदि कोई मरीज़ दवा कराने के लिए इस सीएचसी में आता है तो उसे अपने पैसे से निडिल व विको तक खरीदनी पड़ती है। अस्पताल के वार्डों में गंदगी का साम्राज्य फैला हुआ है।

डॉ. बृजेश कुमार के अनुसार प्रतिदिन डेढ़ सौ से ढाई सौ मरीज़ इस अस्पताल में दवा करवाने के लिए आते है। स्थानीय मेडिकल स्टोर से मोटी रकम की सांठ गांठ पर एक मरीज़ को बाहर की दवाएं लिखी जा रही हैं।

गांव कोड़र, पोस्ट गुरबक्शगंज, मजरे सतावं निवासी गुड्डू अपने पिता मन्नूलाल का इलाज कराने के लिए 15 किलोमीटर से चलकर जतुवा टप्पा सीएचसी आये थे। गुड्डू अपने घर से यह सोचकर चला था कि सरकारी अस्पताल में पिता जी को दिखवा लूं यहां पर मुफ्त में इलाज हो जायेगा। लेकिन यहां तो सब उल्टा हुआ।

डॉक्टर साहब ने उसे बाहर का पर्चा थमा दिया। गुड्डू 370 रुपये की दवाएं लेकर आया और तो और निडिल व विको भी अपने पैसे से खरीदकर लाना पड़ा। उसके बाहर की दवाओं के पर्चे को डॉक्टर साहब ने फाड़कर फेंक दिया। वहीं दूसरी तरफ जतुवा निवासिनी पुष्पा देवी भी इलाज के लिये आयी हुई थी।

ग्लूकोज चढ़ रहा था। लेकिन विको नही लगा था। ऐसे ही सुई लगा दी गयी थी। पुष्पा देवी ने बताया कि जांच में टायफाइड निकला है। अभी साहब ने बाहर से दवाएं लिखी है हमारे रिश्तेदार लेकर आएं। ऐसे ही न जाने कितने मरीज़ आते हैं उनके साथ भी यही बर्ताव किया जाता है।

इस संबंध में जब हम डॉक्टर से बात करने के लिए पहुंचे अधीक्षक साहब गायब थे। असिस्टेंट डॉ. जयप्रकाश से कैमरे पर पूछा गया कि आखिर क्या कारण है कि मरोज़ो को बाहर की दवाएं लिखी जा रही हैं, निडिल व विको तक उपलब्ध नही है तो “कुछ नही कहना” बोलकर सन्नाटा छा गया। यही कोई आम बात नही है जनपद के लगभग सभी सीएचसी व पीएचसी का यही हाल है।

इस सम्बंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. डी. के. सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह होगा ऐसी लापरवाही पर सीएमओ साहब की कार्यवाही का चाबुक चलता या फिर डॉक्टरों की मनमानी।