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उर्दू भाषा के साथ हो रहे सौतेले व्यवहार को लेकर अंजुमन तरक्की उर्दू ने डीएम को सौपीं पांच सूत्रीय मांगे

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Moinul Haque

मोईनुल हक़ नदवी

बेगूसराय। शनिवार को डीएम के जनता दरबार मेंअनेकों मामलों की फ़रयाद डीएम राहुल कुमार ने सुनी और उसपर अपना गहन प्रतिक्रिया दिया। उन्ही में से एक अहम मामला अंजुमन तरक्की उर्दू की ओर से एक टीम श्री अलीमुद्दीन व रूहुल्लाह की अगवाई में डीएम महोदय से मुलाकात की और उर्दू के साथ हो रहे सौतेले व्यवहार से अवगत कराया।

श्री रूहुल्लाह ने कहा कि उर्दू भाषा किसी जाति या धर्म विशेष का नही है। बल्कि ये एक आसान व मीठी ज़बान है। ये मुंशी प्रेमचंद, पंडित जगन्नाथ आज़ाद,व चकबस्त की भाषा थी। इसी उर्दू भाषा ने हर धर्म के हजारों लेखक व कवि दिए जो विश्व के किसी मंच पर किसी परिचय के मोहताज नही। किसी ने ईदगाह लिखा, तो कोई मधुशाला लिखकर अमर हो गए।

साथ ही श्री रूहुल्लाह ने बताया कि उर्दू भाषा ही एक मात्र भाषा है जिसमें गंगा जमुनी तहजीब झलकता है और हमारे पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी भी एक जिंदा मिसाल हैं, श्री अटल और भाषाओं के साथ साथ एक उर्दू भाषा के भी विद्वान है।

अंत मे अंजुमन तरक्की उर्दू का प्रतिनिधित्व करते हुए अध्यक्ष श्री मोहिउद्दीन चांद व जनरल सेक्रेटरी श्री रूहुल्लाह ने अपनी पांच सूत्रीय मांगों का मेमोरेण्डम डीएम महोदय को पेश किया।

सर्वप्रथम मांग थी कि उर्दू सरकारी भाषा मे द्वितीय स्थान की है। इसलिए जितने भी सरकारी कार्यालय है, उसमें उर्दू में भी साइन बोर्ड का वेवस्था किया जाए, ऊर्दू की तरक्की व उन्नति के लिए सरकारी सतह होने वाली बैठकों की सूचना अंजुमन को भी दिया जाए, उर्दू समाचार पत्रों के कटिंग की वेवस्था हो, उर्दू आबादी वाले क्षेत्रों की स्कीमों से सूचित किया जाए और एक विशेष मांग है कि जल्द से जल्द उर्दू पुस्तकालय व भवन का निर्माण कार्य अविलंब प्रारंभ किया जाए।

इस प्रतिनिधि मंडल में अध्यक्ष श्री मोहिउद्दीन चाँद, जनरल सेक्रेटरी रूहुल्लाह, शब्बीर, हाफिज तकमील,परवेज आलम मोजाहरी, मोईनुल हक नदवी,पत्रकार नवी आलम,एवम अन्य लोग उपस्थित थे।