अंजुमन तरक्की उर्दू

उर्दू भाषियों से अनुमंडल अधिकारी दिखा रहे हैं भेदभाव

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Moinul Haque

मोईनुल हक़ नदवी

बेगूसराय। गुरुवार दोपहर अंजुमन तरक्की उर्दू के शिष्ट मंडल के द्वारा जिला सदर अनुमंडल पदाधिकारी से मुलाक़ात कर अपने मांगों का एक ज्ञापन सौंपा गया। लेकिन एक आश्चर्यजनक बात सामने आई कि सदर अनुमंडल अधिकारी श्री संजीव कुमार चौधरी प्रोटोकॉल का पालन न करते हुए अपनी कुर्सी पर जमे रहे।

जबकि इस प्रतिनिधि मंडल में कुछ लोग तो ऐसे भी थे, जो उनसे उम्र में भी बड़े थे। उनमें से एक तो नगर के सबसे बड़े और पुराने सरकारी मदरसा के पूर्व प्रिंसिपल थे। वही जिला के प्रसिद्ध धर्म गुरुओं में से भी एक थे। जिनकों कुछ ही दिनों पूर्व जिला के डीएम श्री राहुल कुमार जी ने सम्मानित किया था और स्वच्छता का शपथ दिलाते हुए भेंट भी प्रस्तुत किया था।

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गुरुवार की ही घटना है कि कुछ छात्र बिजली की जर्जर हालत की सुधार की मांग को लेकर पहुंचे तो अनुमंडल अधिकारी साहब खड़े होकर उनका ज्ञापन लेते है। ऐसे में अधिकारी का दोहरा चरित्र दर्शाता है कि नही ? आखिर पद की गरिमा दागदार होती है कि नही ? इधर अंजुमन तरक़्क़ी उर्दू के शिष्ट मण्डल की मांग थी कि उर्दू प्रदेश की दूसरी सरकारी भाषा होने के कारण उर्दू लिपि का प्रयोग अनिवार्य किया जाए।

सभी सरकारी कार्यालयों में साइन बोर्ड व नाम प्लेट उर्दू भाषा मे भी हो। साथ ही एक जुमन तरक़्क़ी उर्दू द्वारा विशेष मांग कि गई थी कि आने वाले गणतंत्र दिवस के निमंत्रण पत्र में भी उर्दू भषा का प्रयोग किया जाए।

इस शिष्ट मंडल में अध्यक्ष श्री मोहिउद्दीन चांद, सचिव श्री रुहल्ला, उपाध्यक्ष मौलाना परवेज़ आलम मज़ाहरी, हाफिज तकमील व मौलाना फजले अकबर और अन्य लोग उपस्थित थे।