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डॉक्‍टरों के खिलाफ थाने में शिकायत, नसबंदी के ऑपरेशन में पेट में छोड़ दी थी निडिल्स

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छह महीनें पहले बीएचयू में कराया था ऑपरेशन, लापरवाही का पता चलने पर लंका थानें में दी तहरीर…

Tabish Ahmed

ताबिश अहमद

 

 

 

 

 

वाराणसी: प्रख्यात सर सुन्दर लाल अस्पताल में शनिवार को एक चौका देने वाला मामला सामने आया। डाक्टरों ने लापारवाही की हद करते हुए एक महिला के पेट में नसबंदी के आपरेशन के दौरान निडिल छोड़ दी। 6 महीने बाद जब मरीज़ की हालत बिगड़ी तो मामले का खुलासा हुआ। फिलहाल इस सम्बन्ध में डाक्टर के खिलाफ पीड़ित पक्ष ने लंका थाने में तहरीर दी है।

काशी हिन्‍दू विश्‍वविद्यालय स्‍थित सर सुंदरलाल चिकित्‍सालय में अपनी तरह का ये पहला मामला सामने आया है। पूर्वांचल का एम्स कहे जाने वाले बीएचयू के इस अस्‍पताल के डॉक्‍टर देश के सबसे काबिल डॉक्‍टरों में शुमार होते हैं। मगर अब इस मामले के सामने आने के बाद ऑपरेशन के दौरान बरती जाने वाली लापरवाही पर प्रश्‍नचिह्न लग गया है। मामला सर सुंदरलाल अस्‍पताल के महिला एवं प्रसूति विभाग से जुड़ा है।

बताया गया कि अस्पताल के प्रसूति विभाग में ऑपरेशन के दौरान एक महिला मरीज के पेट में डॉक्टर द्वारा पांच निडिल छोड़ दिया। पीड़िता के पति विकास दि्वेदी ने बताया कि हमने 6 महीना पहले काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के सर सुन्दर लाल चिकित्सालय की डाक्टर निशा रानी अग्रवाल से अपनी पत्नी रीना की डिलवरी के बाद नसबंदी का आपरेशन करवाया था। उस समय सब ठीक था पर कुछ दिनों से मेरी पत्नी के पेट में दर्द रहने लगा तो हम उसे दुबारा अस्पताल लेकर आये।

विकास ने बताया कि जब हम अपनी पत्नी को वापस निशा रानी अग्रवाल के पास पहुंचे तो एक्सरे में पता चला की पेट में डाक्टर की लापरवाही से 5 निडिल अन्दर ही रह गयी है। यह पता चलते ही डाक्टर ने हमें धमकाया और चिकित्सालय के ही डाक्टर एस के खन्ना के पास भेज दिया। जिन्होंने मेरी पत्नी का आपरेशन किया।

डॉ खन्ना ने पहले हमसे वादा किया कि वो सारी निडिल निकाल देंगे पर उन्होंने सिर्फ 2 ही निडिल निकाली और 3 पेट में ही छोड़ दिया तथा हमें वहां से भगा दिया। इसके बाद मेरी पत्नी की तबियत खराब रहने लगी। हमने थक हारकर आज न्याय दिलाने की लंका थाने में गुहार लगाई है। बता दें कि डॉक्टर निशा रानी अग्रवाल BHU के सर सुंदरलाल चिकित्सालय में प्रसूति विभाग की विभागाध्यक्ष हैं।