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रोयाना सिंह

आज़ादी के नारों के साथ एक बार फिर सड़क पर उतरीं बीएचयू की छात्राएं

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चीफ़ प्रॉक्टर के कोल्ड ड्रिंक्स – पिज्जा वाले बयान पर भड़क गयी युनिवर्सिटी की छात्राएं, महिला महाविद्याल़य के सामने दिया धरना, जमकर की नारेबाजी…

Tabish Ahmed

ताबिश अहमद

 

 

 

 

 

 

वाराणसी: देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में शुमार बीएचयू एक बार अशांत हो उठा है। रविवार को कैंपस में तनावपूर्ण शांति है। कुछ छात्रावासों में पुलिस का पहरा है। शनिवार को घटी दो घटनाओं ने बीएचयू को सुर्खियों ला दिया है। पहला मामला छात्रों के बीच मारपीट का है तो वहीं दूसरा मामला बीते वर्ष सितंबर में हुए ‘महा बवाल’ का। सितंबर में हुए छेड़खानी और छात्राओं के विरोध का मुद्दा बीएचयू को अपने चपेट में ले चुका है। शनिवार शाम छात्राएं सड़क पर उतरी गईँ। ‘हम लेकर रहेंगे आजादी’ जैसे नारे लगाए गए।

बीएचयू परिसर में छात्रों के बाद अब छात्राएं चीफ प्रॉक्टर प्रो. रोयाना सिंह से नाराज हो गई हैं। पिछले साल सितंबर में छेड़खानी के विरोध में धरने के दौरान चीफ प्रॉक्टर द्वारा पिज्जा, कोल्ड ड्रिंक का बयान देने और विरोध करने पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज के खिलाफ सड़क पर उतरकर विरोध जताया। शनिवार शाम महिला महाविद्यालय गेट पर छात्राओं ने चीफ प्रॉक्टर पर मनमानीपन का आरोप लगाया और नारेबाजी करते हुए उनका इस्तीफा मांगा। शाम 6 बजे से शुरू विरोध 9 बजे तक चला।

चीफ प्रॉक्टर ने गुरुवार को अपने कार्यालय पर धरना देने गए छात्र-छात्राओं पर तोड़फोड़, लूट, हत्या के प्रयास, मारपीट का मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें पांच छात्राओं का भी नाम शामिल था। इधर इसके विरोध में महिला महाविद्यालय की छात्राओं का आक्रोश फूट गया। शनिवार सुबह से ही मोबाइल पर मैसेज भेजकर वह शाम 6 बजे महाविद्यालय गेट पर एकत्र होकर आवाज बुलंद करने की अपील की।

शाम 6 बजे 50 से अधिक छात्राएं गेट के सामने आगर धरने पर बैठ गई और चीफ प्रॉक्टर के विरोध में नारेबाजी करने लगी। इस दौरान मुकदमे को फर्जी बताते हुए उसे वापस करने, पिज्जा वाले बयान को झूठा, तानाशाही का आरोप लगाते हुए आजादी के नारे लगाए। कहा कि उस समय तो प्रो. रोयाना सिंह चीफ प्रॉक्टर भी नहीं थी, यहां तक कि धरना स्थल पर भी नहीं आई थी, ऐसे में पिज्जा, कोल्ड ड्रिंक का झूठा आरोप क्यों लगा रही हैं, समझ में नहीं आ रहा है।

विश्वविद्यालय में पांच दिन पहले चीफ प्रॉक्टर प्रो. रोयाना सिंह ने इलेक्ट्रानिक मीडिया के सामने विवादित बयान दिया था कि सितंबर माह में छात्रा से छेड़खानी के विरोध में धरना देने वाले छात्रों के लिए ट्रक से पिज्जा और कोल्ड ड्रिंक्स मंगाया गया था। इसकी जानकारी होते ही धरना देने वाले छात्र-छात्राओं ने चीफ प्राक्टर कार्यालय पहुंचकर विरोध जताया। सभी माफी की मांग पर अड़े थे। इस पर दोनों पक्षों में गतिरोध बढ़ गया था। मामले में चीफ प्रॉक्टर ने 13 नामजद छात्रों समेत 25 के खिलाफ हत्या का प्रयास, मारपीट, तोड़फोड़ का मुकदमा दर्ज करा दिया।

छात्राओं को बीएचयू मुख्य द्वार के पास लंका एसओ ने समझाया। इस दौरान उन्होंने दर्ज मुकदमे की जानकारी देते हुए कहा कि किसी भी छात्र-छात्रा के साथ ज्यादती नहीं होगी। बताया कि घटना के समय मै खुद वहां था, ऐसा नहीं है कि जो एफआईआर में लिखा है, उसके आधार पर ही कार्रवाई होगी। कहा कि चीफ प्रॉक्टर से सभी आरोपों का प्रमाण मांगा गया है। अगर दो-तीन दिन के भीतर लूट, मारपीट, हत्या के प्रयास आदि का कोई प्रमाण नहीं मिलता है तो एफआईआर समाप्त कर देंगे।

बीएचयू परिसर में शनिवार सुबह एक छात्र पर चाकू से हमले के बाद एलबीएस और बिरला हॉस्टल के छात्र आमने-सामने आ गए। बवाल और पथराव से अफरातफरी मच गई। करीब घंटे भर बाद किसी तरह स्थिति संभली। पथराव में किसी के घायल होने की सूचना नहीं थी। हालांकि दोनों पक्षों में तनाव की स्थिति बनी हुई है और निगरानी के लिए बड़ी संख्या में पुलिस और पीएसी के जवान तैनात कर दिए गए हैं।

विवाद की शुरुआत सुबह तब हुई जब एलबीएस हॉस्टल में रहने वाले बीए द्वितीय वर्ष का छात्र आशुतोष मौर्या सुबह सेमेस्टर परीक्षा देकर बाहर निकल रहा था। अभी वह हिंदी विभाग के पास पहुंचा था कि कुछ छात्रों ने उस पर चाकू से हमला कर दिया। उसके पेट और पीठ पर चाकू के वार से गहरे जख्म हो गए। किसी तरह भागकर आशुतोष ने जान बचाई। उधर इसकी जानकारी छात्रों को हुई तो वह उसे तुरंत बीएचयू ट्रामा सेंटर ले गए। यहां प्राथमिक उपचार के बाद लंका थाने पहुंचकर नौ आरोपियों के विरुद्ध नामजद तहरीर दी। आशुतोष के मुताबिक हमलावर छात्र बिरला हॉस्टल के हैं। घटना की जानकारी हुई तो दोपहर में बिरला और एलबीएस हॉस्टल के छात्र दोपहर में दो बजे आमने-सामने आ गए।