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रातभर जागकर बांध बचाने की कोशिश करते रहे गांव के लोग, सैलाब आया तो परिवार को लेकर लगाई दौड़

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Patna: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के संग्रामपुर थाना क्षेत्र के भवानीपुर गांव से गंडक नदी की धारा बह रही है। पानी कहीं इंसान से सीने तक है तो कहीं इससे भी अधिक। एक दिन पहले ऐसा न था। गुरुवार रात तक सब ठीक था। रात के करीब 1 बजे गंडक नदी का बांध टूट गया और देखते ही देखते गांव पानी में डूब गया। लोग रातभर जागकर बांध बचाने की कोशिश करते रहे, लेकिन वे कामयाब न हो सके। सैलाब आया तो परिवार के लोगों को लेकर दौड़ लगा दी ताकि सबकी जान बचाई जा सके।

रातभर जागकर करते रहे बांध बचाने की कोशिश
संग्रामपुर गांव के मुखिया मुनानी शर्मा कहते हैं कि गांव के 7-8 लोग बांध बचाने के लिए रातभर जागकर कोशिश करते रहे। गंडक का जल स्तर बढ़ने के बाद से ही बांध टूटने का खतरा था, जिसके चलते हमलोग इसे बचाने की कोशिश में लगे थे। गांव के लोग रात में पहरा भी देते थे।

एनडीआरएफ की टीम के साथ बाढ़ प्रभावित संग्रामपुर गांव का निरीक्षण करते डीएम एसके अशोक।

बांध बचाने के लिए जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों ने बालू और गिट्टी भरा सिमेंट का थैला रखवाया था, लेकिन इसके बाद भी कहीं पानी ओवर फ्लो हो जाता तो कहीं बांध रिसने लगता। गुरुवार को दिनभर बांध बचाने के लिए जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन के लोगों के साथ गांव के लोग लगे रहे। रात के करीब 11 बजे सूचना मिली कि बांध से रिसाव हो रहा है।

इसके बाद हमलोगों ने रिसाव रोकने की कोशिश की, लेकिन पानी थम नहीं रहा था। हमलोग बाहर की ओर से मिट्टी, रेत व दूसरी चीजें डालकर पानी रोकने की कोशिश कर रहे थे। नदी की तरफ से रात में रिसाव रोकना संभव न था। नदी की तरफ 8-10 फीट पानी है। एक बजे के बाद अचानक करीब चार फीट चौड़ाई में बांध टूट गया। पानी तेजी से गांव की ओर बढ़ने लगा। इसके बाद हमलोग अपने घर की ओर भागे। गांव में हल्ला हो गया। सभी लोग अपने परिवार के सदस्यों को लेकर सुरक्षित स्थान की ओर भागने लगे। कोई मोतिहारी चला गया तो किसी ने अपने रिश्तेदार के यहां शरण ली।

रात के एक बजे के बाद बांध टूट गया और पानी तेजी से गांव की ओर बहने लगा।

सुबह बचे सामान निकालने लौटे लोग
गांव के बालकिशोर गुप्ता ने कहा कि रात में मैं जाग रहा था। पानी जब गांव की ओर बढ़ा तो हमलोगों ने सभी से कहा कि भागो-भागो बाढ़ आ गया है। मैं परिवार के लोगों को लेकर एक रिश्तेदार के यहां गया। शुक्र है कि गांव के सभी लोग बच गए। सामान का बहुत नुकसान हुआ। अनाज, कपड़े, बर्तन और घर में रखे सारे सामान खराब हो गए।

मुकेश ठाकुर ने कहा कि रात में तो हमलोग जान बचाकर भाग गए थे। सुबह हुई है तो लौटा हूं। मेरे घर जाने वाले रास्ते में करीब छह फीट पानी भरा है। जो सामान बच गया उसे निकालकर ले आया हूं।