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बिहार के सभी जिलों के सरकारी खातों की होगी जांच

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Sudhanshu Aanand

सुधांशु आनंद

पटना। सूबे के सभी जिलों के सरकारी खातों की जांच होगी। भागलपुर में सरकारी राशि का गबन उजागर होने के बाद यह निर्णय लिया गया है। मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि जिलाधिकारियों को इस आशय के आदेश दिए गए हैं।

मुख्य सचिव ने बताया कि सभी जिलों के सरकारी खातों की जांच के बाद ही ही कहा जा सकेगा कि भागलपुर के अलावा किसी और जिले में ऐसी घटना हुई या नहीं हुई है।

भागलपुर में भूमि अधिग्रहण का एक चेक बाउंस होने के बाद डीएम ने 4 अगस्त को कमेटी बनाकर जांच कराई तब यह मामला उजागर हुआ है। संस्था के अलावा बैंककर्मी व ट्रेजरी के कर्मियों ने संगठित तरीके से आपराधिक आर्थिक खेल को अंजाम दिया है। चार-पांच विभागों की राशि के गबन का मामला सामने आया है।

श्री सिंह ने बताया कि संस्था के पदधारक, बैंककर्मी व  सरकारी कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। दो-तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। संस्था की सचिव प्रिया कुमार व उसके पति अमित कुमार की गिरफ्तारी का प्रयास जारी है। 

गबन राशि पहुंची 302 करोड़ 

भागलपुर में हुई सरकारी गबन राशि 300 करोड़ को पार कर गई है। मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि गबन की राशि 302 करोड़ 70 लाख तक पहुंच गई है। आर्थिक अपराध इकाई की जांच जारी है। गबन की गई राशि का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका है। सबसे अधिक राशि भूमि अधिग्रहण का मामला सामने आ रहा है। भू-अर्जन मद का 270 करोड़, नगर विकास का 17 करोड़ 70 लाख और जिला नजारत का 15 करोड़ रुपये है।

करीब एक दशक से जारी था घोटाला

सृजन एनजीओ के जरिए सरकारी राशि के घोटाले का खेल करीब एक दशक से जारी था। जो तथ्य सामने आए हैं, उससे साफ है कि पूरा घोटाला प्रशासन, बैंक और सृजन एनजीओ की सांठगांठ का अद्भुत नमूना है।

वापस खाते में डाल दी जाती थी रकम 

सृजन एनजीओ के खाते में सरकारी रकम के ट्रांसफर होने के बाद भी चेक बाउंस नहीं हो रहे थे। जैसे ही जिला प्रशासन लाभार्थी के लिए चेक जारी करता था, सृजन के खाते से उतनी राशि सरकारी बैंक खाते में डाल दी जाती थी।

सरकारी खाते का फर्जी बैंक स्टेटमेंट भी 

जिला प्रशासन को स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट का जो ब्योरा भेजा जाता था, वह भी फर्जी होता था। यही नहीं, स्टेटमेंट में की गई इंट्री और बैंक पदाधिकारियों के हस्ताक्षर फर्जी होते थे।

घोटाले से जुड़े उठ रहे हैं कई अहम सवाल  

तीन सौ करोड़ रुपए से ज्यादा के इस घोटाले में कई अहम सवाल हैं जिनका जवाब जांच टीम को ढूंढना होगा। आखिर इतने लम्बे समय तक घोटाले की भनक किसी को कैसे नहीं लगी? क्या जिला आवंटित होने वाले धनकी जानकारी एनजीओ को पहले ही हो जाती थी? सरकारी खाते में रकम जाते ही कैसे उसे एनजीओ के खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता था?

जिला प्रशासन से चेक जारी होते ही, इसकी जानकारी सृजन को कैसे हो जाती थी? ऐसे कई अहम सवाल हैं, जिनका जवाब जांच टीम को ढूंढना होगा।

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