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Lalu Prasad Yadav

नीतीश मेरे हेडमास्टर नहीं, जो मुझे मर्यादा का पाठ पढ़ायेंगे- लालू प्रसाद

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Arun Singh

अरुण सिंह

पटना।  जब से राजद और जदयू का गठबंधन टूटा है, तब से बिहार की राजनीति में उथल-पुथल मची हुई है। राजनेता एक-दूसरे पर लगातार आरोप-प्रत्यारोप करते रहे हैं। बिहार के नेताओ की भाषा दिनोंदिन अमर्यादित होती जा रही है। शायद ही ऐसा कोई दिन होता है जब एक दूसरे की आलोचना करने में भाषा पर संयम नहीं खोते।

रविवार को भागलपुर में पार्टी की एक सभा में राजद अध्यछ लालू यादव और उनके बेटे तेज प्रताप यादव ने आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। सोमवार को इस भाषा पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि ये राजद का आत्मघाती नुक्कड़ नाटक था। नीतीश कुमार ने कहा कि जिस प्रकार की बात कही गई हैं और जिस अंदाज में बात कर रहे थे वो उनके लिए आत्मघाती साबित होने जा रहा है।

मंगलवार को जवाब देने का काम राजद अध्यक्ष लालू यादव का था, जिन्होंने एक संवादाता सम्मलेन में कहा कि नीतीश उन्हें चेतावनी दे रहे हैं और मुकाबला करने के लिए तैयार हैं।

लालू ने कहा कि नीतीश उनके हेडमास्टर नहीं हैं कि उनके निर्देश के अनुसार वो नहीं चलेंगे। लालू ने कहा कि वो राजनीतिक शास्त्र के विद्यार्थी हैं और नीतीश इंजीनियरिंग के स्टूडेंट रहे हैं और राजनीतिक पलटी मरने में उन्हें महारथ हासिल है। वहीं भाषा के गिरते स्तर पर सफाई देते हुए विपक्ष के नेता, तेजस्वी यादव ने कहा कि वो मर्यादा का ख्याल करते हैं। तेजस्वी के अनुसार नीतीश कुमार खुद मीठी-मीठी बातें करते हैं लेकिन उनके द्वारा प्रवक्ता को फीड किया जाता हैं जो उनके इशारे पर राजद के नेतओं पर हमला करते हैं।

पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद ने साधा नीतीश पर निशाना: 

मंगलवार के इस संवादाता सम्मलेन में तेजस्वी यादव नीतीश कुमार को एक बार फिर दुनिया का सबसे बारे राजनीतिक भ्रस्टाचारी और नैतिक  भ्रस्टाचार का सबसे बड़े भीष्म पितामह बताया। लालू और तेजस्वी ने एक सुर से नीतीश पर आरोप लगाया कि जब सृजन घोटाले से सम्बंधित चेक बाउंस करने लगा तो उन्होंने बीजेपी सरकार के सामने घुटने टेक दिए और तब तेजस्वी यादव को फंसाने की साजिश रची गई।

तेजस्वी यादव का कहना है कि उनको मोहरा बनाकर राजनीतिक सौदा हुआ. तेजस्वी यादव के मुताबिक लालू यादव के घर पर छापेमारी 9 जुलाई को हुई और इसमें तेजस्वी यादव को भी अभियुक्त बनाया गया उससे कुछ दिनों पूर्व ही मामला दर्ज हुआ था। जबकि सृजन घोटाले की आहट भागलपुर के लोगों ने भी नहीं सुनी थी।

सृजन घोटाले पर दुविधा में है आरजेडी

हालांकि तेजस्वी यादव ने कुछ कागजात पहली बार जारी किए जिसमें सीएजी की एक 2008 की भी रिपोर्ट थी जिसमें सृजन में जमा हो रहे सरकारी राशि के बारे में चर्चा की गयी थी। इसके अलावा 2006 में जिला अधिकारी का एक आदेश हुआ था जिसमें 2004 के उस आदेश पर रोक लगा दी गयी थी। जिसके बाद सृजन में सरकारी पैसा जमा हो रहा था।

दरअसल राजद की कोशिश है कि वो घोटाले का शुरुआत 2006 से मानी जाए क्योंकि 2004 से चर्चा करने पर खुद ही फजीहत कराने वाली बात हो जाएगी. उस समय राबड़ी देवी मुख्यमंत्री थीं।  इसके अलावा करीब 18 महीने वित्त और सहकारिता जिन दो विभागों की लापरवाही से ये घोटाला इतना बड़ा हुआ उन दोनों मंत्रालय में राजद के अब्दुल बारी सिद्दीकी और अलोक मेहता थें। अलोक मेहता तो खुद सृजन के कार्यक्रम में जाते भी रहे हैं। हालांकि नीतीश कुमार ने पहले साफ कर दिया हैं कि किसी ब्यक्ति के पास कोई जानकारी हो तो वो जांच एजेंसी के पास जाकर दे सकते हैं।

नीतीश ने अपने विरोधियों को ये भी चुनौती  दी हैं कि उनके बारे में भी आरोप लगाने के बाद वो जांच एजेंसी सीबीआई को सारे डाक्यूमेंट्स उपलब्ध करा सकते हैं। इस बीच सीबीआई ने इस घोटाले से सम्बंधित उन लोगो की सूची बनानी शुरू कर दी है जिनके पास सृजन के कहते से करोड़ों की राशि गयी है। लेकिन सीबीआई अधिकारी भी मानते हैं कि जब तक इस घोटाले से संबंधित मुख्य आरोपी जैसे विपिन शर्मा, अमित, प्रिया या दीपक वर्मा जैसे रसूखदार लोग गिरफ्तार नहीं होते जांच आगे नहीं बढ़ेगी और यही सही भी है।