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रैली का उद्देश्य उत्तराधिकारी के रूप में तेजस्वी को लाना

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Kirti mala

कीर्ति माला

पटना। राजद सुप्रीमों लालू प्रसाद यादव जी की रैली तो कामयाब रही। पर इस रैली का मुख्य आकर्षण के केंद्र तो तेजस्वी यादव रहे। दरअसल इस रैली का मुख्य उद्देश्य तो तेजस्वी को उत्तराधिकारी के रूप में जनता के सामने लाने की थी।

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लालू प्रसाद भाजपा भगाओ, देश बचाओ रैली में मंच भरने से लेकर भीड़ जुटाने तक कामयाब रहे। वैसे भीड़ सुबह से गांधी मैदान आती-जाती रही, स्थिर नहीं रही, इसलिए सही अनुमान लगाना कठिन है। साथी दलों ने भी रैली को यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मौसम भी मेहरबान रहा। भीड़ में उत्साही नौजवानों की बड़ी हिस्सेदारी और नारेबाजी ने तेजस्वी को राजद का नया अवतार स्वीकार किया।

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राजद ने भी तेजस्वी को स्थापित करने की कोशिश में कोई कसर नहीं छोड़ी। यानी आने वाले समय में राजद की कमान तेजस्वी के हाथों में होगी। राजद का नया संस्करण सामने आएगा। इस रैली की सबसे बड़ी खासियत रही भीड़ की शालीनता। लालू की रैली का यह नया चेहरा है।

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रैली करने में लालू प्रसाद को महारत हासिल है। उनकी अनेक रैलियां देश- दुनिया में चर्चित हुईं। एक दौर था जब उनके एक आह्वान पर गरीब-गुरबों की भीड़ उमड़ पड़ती थी। ताजा रैली से उन्होंने यह विरासत बखूबी अपने पुत्र तेजस्वी को सौंपी।

लालू की चुनौती का दूसरा मोर्चा था भीड़ जुटाना। खुद उन्हें चारा घोटाले में रांची स्थित सीबीआई कोर्ट में हर दूसरे- तीसरे दिन हाजिरी लगानी पड़ रही है। रैली की कामयाबी के लिए राज्यभर का दौरा उनके लिए संभव नहीं था। ऐसे में उन्होंने योजना बनाकर काम किया। दूरदराज के इलाकों में तेजस्वी और तेजप्रताप के दौरे कराए।

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खुद पटना के आसपास के जिलों का दौरा किया। समर्थकों में गुस्सा पैदा करने के लिए आक्रामक भाषण का सहारा लिया। रांची और पटना में हर-दूसरे तीसरे दिन प्रेस कान्फ्रेंस करते रहे। उनकी बातों के दो पहलू रहे- पहला आरोपों की जांच को वह प्रतिशोध की कार्रवाई करार देते रहे तो आक्रामक पलटवार भी करते रहे।


जदयू की नैतिकता के आधार पर महागठबंधन से अलग होने और फिर एनडीए के साथ सरकार बनाने के फैसले को वह धोखा करार देते रहे और इस चुनौती को पार करने में शरद यादव ने उनका साथ दिया। वैसे रैली में भीड़ इकट्ठा करने में राजद के 80 विधायकों की भी बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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