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जाना था जापान, पहुँच गए चीन…समझ गए न

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पंकज पांडेय की रिपोर्ट,

समस्तीपुर। “मंसूबे धरे के धरे रह गए”… कितने मन्दिरों की चौखट लांघी, कितनी जगह मनन्त मांगी और जब मन्नत कबूल हुई। मन की मुराद पूरी होनी थी तो उसकी बुरी लत ने सब पर पानी फेर दिया।

वैशाली जिले के बलिगांव का रितेश कुमार के सभी भाइयों की शादी हो चुकी थी। पर उसके हाथों में शायद विवाह की रेखा ही नहीं थी। उम्र उस पड़ाव पर पहुँच गई थी जहाँ लड़की वाले उस लड़के पर अपनी लड़की के लिये आना छोड़ देते है। उम्मीद की लौ भी अब टिमटिमाते हुए किसी भी पल बुझने जा रही थी। तभी अचानक फेसबुक के जरिये जमुई जिले की एक लड़की से चेटिंग शुरू हुई। चेटिंग से शुरू यह सिलसिला बातों के दौर से गुजरता कानों के रास्ते दिल पर कब दस्तक दी, पता ही नहीं चला। दिल पर दस्तक ने दिल को धड़का दिया। प्रेम के अंकुर फुट पड़े।

16 अक्टूबर को दोनों परिवार की रजामंदी से दोनों जमुई के एक मंदिर में परिणय सूत्र में बंधने जा रहे थे। रितेश शादी का जोड़ा और अन्य कपड़े लेकर ट्रैन पकड़ने स्टेशन पहुँचा। मन मांगी मुराद पूरी होने जा रही थी कि खुशी में उसने बस थोड़ी-सी गटक ली।

टिकट काउंटर पर टिकट लेने पहुंचे रितेश के मुंह से शराब की बू आ रही थी। किसी ने स्टेशन पर तैनात जीआरपी तक सूचना दे दी। जीआरपी वाले आए और उसे शराब पीने के जुर्म में गिरफ्तार कर ब्रेथ एनालाइजर से जांच की। पुष्टि होने पर मेडिकल जांच करवाई गई। इसी बीच दूल्हे को छुड़ाने कुछ वीआईपी लोग भी आए पर दूल्हे की हालत देख उन्होंने खिसकने में ही अपनी भलाई समझी।

जीआरपी थाने में पकड़ कर लाया गया रितेश ने इसकी सूचना लड़की वालों को मोबाइल पर देते हुए शादी की तिथि फिलहाल शादी टालने और वापस आने के बाद करने की बात कह कर काट दी। यह खबर सुनकर लड़की वालों के यहां भी मायूसी छा गई।

स्टेशन पर उसे देख और उसकी आपबीती सुनकर कुछ यात्री यह गीत गुनगुनाते सुने गए- “जाना था जापान पहुँच गए चीन… समझ गए ना!”