BSEB

इंटर एवं मेट्रिक परीक्षा में प्रश्न पत्र लीक, समस्तीपुर के जिला शिक्षा पदाधिकारी भी शामिल

43

जांच पदाधिकारी संदेह के घेरे में…

पटना। बिहार के समस्तीपुर जिले में लगातार 12 फरवरी एवं 3 मार्च से व्हाट्सएप्प एवं फसेबुक के माध्यम से इंटर एवं मैट्रिक की बोर्ड परीक्षा कदाचार मुक्त करवाना सामस्तीपुर के जिला प्रशासन के लिए चुनौती भरा होगा।

वर्षों से समस्तीपुर जिला प्रश्न पत्र लीक करने में अव्वल स्थान प्राप्त किये हुआ है।

सूबे में तकरीबन कई सालों से यह गोरखधंधा चल रहा है यहाँ परीक्षा आरम्भ होने से घंटों पहले प्रश्न पत्र एवं उनके उत्तर विद्यार्थियों को मिल जाता है कई बार तो ऐसा भी हुआ है की परीक्षा से पहले रात में ही प्रश्न पत्र आउट हो जाता है।

हर साल परीक्षा के बाद जाँच में कई लोग तो पकड़े जाते हैं पर जो असल माफिया या शिक्षा के इस गोरखधंधा के आका हैं पुलिस वहां तक नहीं पहुँच पाती या फिर उसे राजनेताओं का शरण प्राप्त है जिस कारण पुलिस लाचारी के वजह से पकर नहीं पाती है।


वहीं इस साल के परीक्षा के सन्दर्भ में अभी प्रकाश में आया है कि सूबे के जिला शिक्षा पदाधिकारी ब्रजेश ओझा की गतिविधि संदिग्ध है। जिला प्रशासन ने बिहार इंटरमीडिएट परीक्षा में संदिग्ध जिला शिक्षा पदाधिकारी बृजेश ओझा को परीक्षा का नोडल पदाधिकारी नियुक्त कर ‘ बिल्ली के गले में घंटी ‘ बांधने वाली कहावत को चरितार्थ किया।

जिले के जिलाधिकारी प्रणव कुमार को छोड़ कर लगभग जिले के सारे पदाधिकारी जांच के घेरे में है। बिहार इंटरमीडिएट एवं मैट्रिक की परीक्षा में बिहार बोर्ड के लगभग सभी विषयों के प्रश्न पत्र जिला शिक्षा पदाधिकारी के संरक्षण में एक दर्जन शिक्षक के सहयोग से लीक होता आ रहा है। सूबे के परीक्षा में शामिल एक दर्जन से अधिक अधिकारी एवं कर्मचारी सब के सब मिलकर प्रश्न पत्र के उत्तर भेजा करते है।

जिला शिक्षा पदाधिकारी समस्तीपुर को कई कोचिंग के संचालक द्वारा लाखों  रुपए की अवैध वसूली भी की जाने की चर्चा है। जानकारी के मुताबिक जिला शिक्षा पदाधिकारी के प्रिय शिक्षक के लैपटॉप एवं मोबाइल को पुलिस ने अब तक अपने कब्जे में क्यों नहीं किया है?


जिला स्तरीय अधिकारी जिला शिक्षा पदाधिकारी को बचाने का हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। इस कारण शंका के घेरे में जांच प्राधिकारी भी नजर आ रहे हैं। चर्चा है कि जिला शिक्षा पदाधिकारी को बचाने के लिए जिले के जदयू के दो वरिष्ठ नेता जी तोड़ प्रयास कर रहे है। दूसरी और विभिन्न राजनीतिक दल के नेताओं ने मुख्यमंत्री से मांग किया है हालांकि जिला शिक्षा पदाधिकारी को शीघ्र निलंबित कर गिरफ्तार करने की मांग की है।

इनकी क्रियाकलापों की जांच पटना के एसआईटी से कराने की भी मांग की है। जिला शिक्षा पदाधिकारी के प्रस्थापन से आज तक गोरख धंधे से अवैध राशि से अर्जित की गई संपत्ति को भी कबजा करने की मांग की है।