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बिहार में उच्च शिक्षा की स्थिति बदहाल…विश्वविद्यालय के अजब-गजब कारनामे

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पंकज पाण्डेय की रिपोर्ट,

समस्तीपुर: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का यह कहना कि “उच्च शिक्षा की बदहाली के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार नहीं है।” बिहार में उच्च शिक्षा की बदहाली की स्वीकारोक्ति है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कहते है कि विश्वविद्यालय का नियंत्रण और संचालन राज्य सरकार के हाथ में नहीं है।

वहीं सरकार के सहयोगी एनडीए के घटक दल रालोसपा के अध्यक्ष व केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा कहते है-केंद्र सरकार राज्य को मदद करेगी, लेकिन राज्य सरकार को सुधार की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। बिहार की बदहाली और इसके गिरते स्तर से चिंतित कुशवाहा ने रविवार 16 अक्टूबर को पटना के गाँधी मैदान में शिक्षा सुधार संकल्प महासम्मेलन का आयोजन भी किया था।

आरोप-प्रत्यारोप या फिर राज्य सरकार के पल्ला झाड़ने से यहाँ के छात्रों की नियति नहीं बदलने वाली है। कॉलेजों में व्याख्याताओं की कमी, सत्र का विलम्ब से चलना, परीक्षाफल में गड़बड़ी और भी इसी तरह की कई समस्याओं से जूझते छात्रों को अब तो विकास की बातें कहती इस सरकार से कोई उम्मीद भी नहीं करनी चाहिए। सरकार मानव संसाधन की उपेक्षा कर किस विकास की दुहाई देती है, यह सरकार ही जाने।

पिछले दिनों ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा ने स्नातक तृतीय खण्ड का परीक्षाफल जारी किया। लगभग तेहत्तर हजार विद्यार्थियों में छब्बीस हजार विद्यार्थी का परीक्षाफल लम्बित रखा गया। देर से जारी परीक्षाफल की वजह से बहुत से छात्र पीजी में एडमिशन से वंचित रह गए तो बहूत से छात्र विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षा में सफल रहने के बावजूद नौकरी से।

अब जो परीक्षाफल प्रकाशित हुई है, उसमे भी गड़बड़ी सामने आ रही है। गडबड़ी भी ऐसी जिसे सुन लोग दांतो तले अंगुली दबाने को मजबूर हो जाए बी कॉम के एक छात्र प्रकाश कुमार रोल न. 1521050350 को विश्वविद्यालय ने रिजल्ट जारी करते हुए 100 अंक के प्रश्नपत्र में 473 अंक दिए है। बीए के छात्र मनोज कुमार रोल न. 1420220084 से 100 अंको की परीक्षा लेकर 551 अंक दे दिया।

यह तो सिर्फ बानगी है। ऐसे ही कई और कारनामे है बिहार के दूसरे विश्वविद्यालयों के। उच्च शिक्षा की बदहाली को बयां करने के लिए।