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बिहार कर्मचारी चयन आयोग के सचिव परमेश्वर राम ने किया खुलासा

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मेराज हसन

एडिटर इन चीफ,

प्रश्न पत्र लीक मामले का सच खांगलने खातिर गठित एसआईटी ने अपनी पीठ थपथापते हुए सारा ठीकरा आयोग के सचिव परमेश्वर राम पर फोड़ दिया है। लेकिन कहते है आप सच को जितना छुपाने की कोशिश करेंगे सच न्यूटन के थर्ड लॉ की तरह जबरदस्त ढंग से प्रतिक्रिया देता है। आइये जानते है इस तमाशे का सच और झूठ को दबाने के प्रयास का सच विस्तार से…

मंगलवार की रात एसएसपी मनु महाराज के नेतृत्व में एसआईटी ने भागवत नगर स्थित बीएसएससी के सचिव परमेश्वर राम के आवास पर पूरी तैयारी के साथ धावा बोलती है। काम कर रहे है जताने खातिर मिडिया को खबर लीक कर दी जाती है। खैर ख़ाकी का काफ़िला और कैमरों के चमकते फ्लैश जाँच शुरू होती हैं।

अंततः बिहार कर्मचारी चयन आयोग के सचिव और पर्चा लीक कांड के सूत्रधार परमेश्वर राम को साबित कर उन्हें एसआईटी डिटेन यानी हिरासत में ले लेती है। आरोप है कि राज्य में अराजपत्रित और तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों की बहाली करने वाले बिहार कर्मचारी चयन आयोग के सचिव की मिली भगत से परीक्षा से पहले ही पर्चा बाजार में बिकने लगता है और अंदरखाने भी ले-देकर रिजल्ट दिया जा रहा है। जब पानी सिर से ऊपर चला गया तो सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया।

एसआईटी के अफसरों ने जब पूछताछ की तो फिर सच्चाई सुनकर पटना के सीनियर एसपी मनु महाराज समेत वहां मौजूद तमाम अधिकारी सन्न रह गए।

पूछताछ के दौरान परमेश्वर राम ने 37 राजनेताओं यानी 8 मंत्री और 29 विधायकों का जिक्र करते हुए सभी द्वारा माल पत्तर समेत लाभांवित होने का विवरण दिया। साथ ही राज्य के उच्च पदस्थ 10 आईएएस अधिकारियों का नाम लिया है, जो किसी न किसी रूप में इस घोटाले का लाभार्थी रहे हैं। परमेश्वर राम ने खुलासा किया है कि आयोग ने पिछले 5 सालों में जितनी भी नियुक्तियां की हैं, सभी में भयंकर गड़बड़ियां हुई हैं। अरबों रूपये की उगाही हुई है तथा सैकड़ों बड़े अधिकारियों और राजनेताओं के सगे-सम्बधियों की बहाली की गई है।