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चुनाव से पहले भाजपा को बड़ा झटका, सांसद गोविंद मिश्रा ने किया पार्टी छोड़ने का ऐलान

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रामबिहारी पांडेय

सीधी- 17वीं लोकसभा चुनाव की रणभेरी बजते ही भारतीय जनता पार्टी में शुरू हुए मतभेदों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा एक तरफ जहां सांसद और संगठन के बीच तकरार चल रही थी.

वहीं टिकट घोषित होते ही पार्टी छोड़ने वालों का क्रम भी जारी हो गया, जो नामांकन दाखिल होने के अंतिम दिन तक चलता रहा है. भारतीय जनता पार्टी को सीधी सरसजी क्षेत्र में उस समय तगड़ा झटका और लगा जब वर्ष उन्नीस सौ 89 में सावन हुए चुरहट विधानसभा के पूर्व विधायक और सीधी संसदीय क्षेत्र के पंद्रहवीं लोकसभा के सांसद गोविंद मिश्र पार्टी में चल रहे अंतर्द्वंद और वरिष्ठों का किए जा रहे अपमान को देखते हुए पूर्व सांसद श्री मिश्रा ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया.

उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष को भोपाल में अपने त्यागपत्र देने के बाद सीधी आज पहुंचकर पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया है. दोपहर 3 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करके वे भाजपा छोड़ने की जानकारी देने के साथ साथ किस दल ने शामिल होंगे इसकी घोषणा भी करेंगे. अभी अभी जनमंच न्यूज़, दबंग दुनिया, त्वरित न्यूज़, सीधी को फोन करके इस बात की जानकारी देकर वह भाजपा में बीते 5 सालों से घुटन महसूस कर रहे थे.

यहां बता दें, कि गोविंद मिश्र 19 सौ 80 से पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय अर्जुन सिंह के विरुद्ध लगातार चुनाव लड़ते रहे. उनके पार्टी के प्रति निष्ठा को देखते हुए वर्ष 1989 के तत्कालीन अध्यक्ष वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी रीवा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जहां उन्हें सदस्यता दिलाई थी.

वहीं चुरहट में हुए वर्ष 1991 के उपचुनाव में उन्हें भाजपा का उम्मीदवार घोषित किया था. इस चुनाव में उन्हें हार का सामना तो करना पड़ा था. लेकिन, भारतीय जनता पार्टी के जप्त हो रही जमानत कोवे बचाने में कामयाब हुए थे. उनके इस कर्तव्य निष्ठा को देखते हुए मध्य प्रदेश शासन के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गी सुंदरलाल पटवा ने ऊर्जा विकास निगम का अध्यक्ष घोषित किया था.

श्री मिश्र ने वर्ष 1993 में चुरहट के हुए चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार चिंतामणि तिवारी को पट खानी देखकर विधायक निर्वाचित हुए थे 2009 में उन्हें सीधी संसदीय क्षेत्र 11 के भारतीय जनता पार्टी का उम्मीदवार घोषित किया था. जहां उन्होंने मध्य प्रदेश शासन के पूर्व मंत्री इ इंद्रजीत कुमार पटेल को हराकर संसदीय क्षेत्र का नेतृत्व किया था.

वर्ष 2000 14 के हमें 16 की लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश के संगठन मंत्री से हुई अनबन के कारण उनकी टिकट काट कर जिला पंचायत के अध्यक्ष रीती पाठक को उम्मीदवार बना दिया था. तब से लेकर श्री मिश्र पार्टी से रुस्त चल रहे थे. लेकिन, उन्होंने पार्टी के प्रति वफादारी दिखाते हुए चुरहट विधानसभा के चुनाव में उन्होंने भाजपा के उम्मीदवार सतेंद्र तिवारी को निर्वाचित कराने में अहम भूमिका अदा किया था.

इसके बावजूद भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में 17वीं लोकसभा चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया. जिसे देखते हुए पूर्व सांसद गोविंद मिश्रा ने 9 अप्रैल को भोपाल में पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर आज सीधी पहुंच गए हैं. जहां वे पार्टी छोड़ने और संभवत कांग्रेस पार्टी के सदस्यता लेने की घोषणा कर सकते हैं. कांग्रेस पार्टी में शामिल होने की पुष्टि तो दोपहर 3 बजे के बाद की जा सकती है अभी वे भाजपा की सदस्यता छोड़ने का ऐलान कर चुके हैं.