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भाजपा की बाईक रैली के पीछे फंसी रही एंबुलेंस, नही चेते कार्यकर्ता, तड़पता रहा मरीज़

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पाकिस्तान से हुई हालिया तनातनी का फायदा उठानें के लिए भाजपा की रैलियां शुरु, सत्ता के नशे में अंधे भाजपा कार्यकर्ताओं को रैली के पीछे रेंग रही एंबुलेंस का भी ख्याल नही…

–रिजवान उद्दीन

 

हमीरपुर: एंबुलेंस सेवा एक आपातकालीन सेवा होती है, हमे बचपन में ही सिखा दिया जाता है कि रास्ते पर यदि कोई एंबुलेंस आती दिखाई दे तो उसे निकलनें को फौरन रास्ता दे देना चाहिए, आखिर किसी की जान का सवाल होता है। एंबुलेंस में मौजूद मरीज सीरियस कंडीशन में ही होता है और उसे अतिशीघ्र अस्पताल पहुँचाना जरूरी होता है। बचपन में हमें मिली यह शिक्षा याद है, लेकिन सत्ता के गुरूर में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को यह सबक अब भी सीखनें की जरूरत है।

मामला हमीरपुर जिले के मौदहा का है, जहां  आज दिनांक 2 मार्च 2019 को भारतीय जनता पार्टी द्वारा पाकिस्तान पर हुई एयर स्ट्राईक और विंग कमांडर अभिनंदन की भारत वापसी को प्रधानमंत्री की बड़ी सफ़लता मानते हुये एक बाइक रैली का आयोजन किया गया था जो मली कुआं चौराहे से नरहीया व रहमानिया इंटर कॉलेज होते हुए बड़ा चौराहा पहुंची।

सैकड़ो बाईक के आगे-आगे एक चार पहिया वाहन पर तेज़ आवाज़ में डीजे म्युज़िक बज रहा था, और बाईक के पीछे फंसी थी एक 108 एंबुलेंस जो एक सीरियस पेशेंट को लेकर स्वास्थ्य समुदाय केंद्र मौदहा जा रही थी। एंबुलेंस नें कई बार बाईक्स को ओवरटेक करने का प्रयास किया लेकिन सत्ता के नशे में चूर भाजपा कार्यकर्ताओं नें एंबुलेंस को आगे निकलनें नही दिया, शायद उनके लिए इंसानी जान से बढ़कर भाजपा का झंडा लहराती बाईक्स का जत्था महत्वपूर्ण था। लेकिन क्षेत्रीय पुलिस का क्या कर्तव्य है यह समझने वाली बात है।

देखिए वीडियो:

क्या डीजे और दर्जनों बाईक्स को रैली में शामिल करने से पहले भाजपा कार्यकर्ताओं नें प्रशासन से अनुमति ली थी? यदि नही ली थी तो आखिर ऐसी रैली सड़क पर निकली कैसे? या अगर अनुमति प्रशासन द्वारा दी गई थी तो रैली में पुलिस व्यावस्था क्यो नही थी? हालांकि हम जानते हैं कि सत्तारूढ़ पार्टी के किसी कार्याक्रम में पुलिस दखलअंदाजी करने से गुरेज करती है, लेकिन सवाल यह उठता है कि यदि एंबुलेंस में सवार मरीज के कोई अनहोनी हो जाती तो उसका जवाबदेह कौन होता? हमीरपुर प्रशासन और मौदहा पुलिस को इस विषय पर विचार करने जरूरत है।

बहरहाल, रैली के अपने समापन स्थल पर पहुँचते तक एंबुलेंस रैली के पीछे ही फंसी रही। इस विषय पर जब संवाददाता नें भाजपा कार्यकर्ताओं से बात करना चाहा तो उन्होने प्रतिक्रिया देने से साफ इंकार कर दिया।