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मौसम के पूर्वानुमान के आधार पर COVID-19 की पूर्वानुमान लगाने में सक्ष्म: डॉ. प्रवीण कुमार

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ब्लॉग। वैश्विक महामारी के रूप में उभरी COVID-19 ने अब तक दुनियाभर में लगभग 3.27 लाख लोगों की जान ले चुकी है।COVID-19, जो की एक विषाणु (SARS-CoV-2) जनित रोग है एवं इनका संक्रमण दर बहुत ही ज्यादा है। जहाँ एक ओर दुनिया भर में इससे बचने के लिए बहुआयामी प्रयास (सोशल डिस्टन्सिंग, हैंड हाइजीन आदि) किए जा रहे है, वहीं हमारे समाज के वैज्ञानिक, डॉक्टर्स, शोधार्थी एवं इसके अन्य जानकार COVID-19 का इलाज ढूंढने में पूरी मेहनत से लगे हैं।

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कोरोना वायरस का संक्रमण अमूमन एक संक्रमित इंसान के खुले में छींकने, खांसने से फैलता है। वहीं किसी अतिसंवेदनशील व्यक्ति  द्वारा किसी संक्रमित सतह को छूने से फैलने की पूरी सम्भावना होती है। इन संक्रमित सतहों पर तापमान एवं आद्रता का विषाणु के जीवन पर असर हो सकती है। इन सबों के बीच मौसम की भूमिका इस विषाणु के फैलने में अहम् माना जाना स्वाभाविक है।

मौसम के प्रमुख घटक/मानक, तापमान, आद्रता, एवं वर्षा को माना जाता है, जो मौसम के बदलाव के लिए जिम्मेवार है। हालांकि वायुमंडलीय दवाब, हवा की गति-दिशा एवं बादल को भी किसी जगह का मौसम के लिए जिम्मेवार माना जाता है। क्या सच में मौसम के ये प्रमुख घटक (मुख्यतः तापमान, आद्रता, एवं वर्षा) SARS-CoV-2 विषाणु के फैलने में अहम् भूमिका निभा रही है? यह एक संसय का विषय बना हुआ है। हालांकि विगत कुछ वर्षो में अन्य विषाणुओ पर किए गए शोध से यह प्रमाण मिला है की मौसम के इन घटकों का विषाणुओं एवं उनसे जनित रोगों पर मौसम का अनुकूल/प्रतिकूल प्रभाव होता है। प्रमुखतः इन विषाणुओं पर उच्च तापमान एवं उच्च आद्रता का प्रभाव उनके जीवन चक्र पर होने की पुष्टि हुई है।

अतः इन शोध के नतीजे के आधार पर इस महामारी (COVID-19) के कारक विषाणु  (SARS-CoV-2) का सम्बन्ध मौसम के कारकों से होने की उपेक्षा की जा रही है।

परन्तु इस नोवेल कोरोना वायरस (SARS-CoV-2) का सम्बन्ध या किसी तरह का असर मौसम के कारकों से होने का कोई भी पुख्ता सबूत नहीं है। हालांकि इस बात की पुष्टी विश्व स्वास्थ्य संघटन एवं विश्व मौसम संघटन के सयुंक्त कार्यालय, क्लाइमेट एंड हेल्थ ने भी की है। वहीं विश्व के कुछ चुनिंदा शोध संस्थानों एवं वैज्ञानिकों ने मौसम की भूमिका को इस रोग के फैलने में जानने की पहल की है, जो एक अच्छी कोशिश एवं सहरानीय मानी जा रही है।

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किसी भी जीवाणु, विषाणु या अन्य रोग कारकों के फैलने का सम्बन्ध जलवायु के घटकों से होने का अध्ययन बड़ी बारीकी से सुसज्जित (sophisticated) प्रयोगशाला में की जाती है। इस शोध में तापमान, आद्रता, वर्षा एवं अन्य जलवायु घटकों के एक थ्रेशोल्ड का भी पता लगाया जाता है। जिसे उस विशेष जीवाणु/विषाणु से होने वाले संक्रमण का कट-ऑफ भी माना जाता है।

अतः अभी तक कोई पुख्ता सबुत न होने की वजह से इस महामारी के संक्रमण पर वेदर कंडीशन असर को पूर्णतः सच नहीं माना जा  सकता है एवं साथ ही इस बीमारी को मौसमी भी नहीं कहा जा सकता है। आने वाले नजदीकी भविष्य में शोध, जो मुख्यतः डाटा आधारित होती है, के नतीजे पर SARS-CoV-2 का सम्बद्ध मौसम से जोड़ा जा सकता है, जिसकी पूरी सम्भावना है।

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इन शोध से मिलने वाले नतीजों एवं मौसम कारकों के आधार पर प्रेडिक्टिव मॉडलिंग की जा सकती है जो किसी भी जगह या स्थान पर मौसम के पूर्वानुमान के आधार पर COVID-19 की भी पूर्वानुमान लगाने में सक्ष्म हो सकता है। इस मॉडल के आउटपुट से रणनीति एवं योजना बनाने में कार्यकारी अधिकारी को काफी मदद मिल सकती है।

Dr. Praveen Kumar

 

 

डॉ. प्रवीण कुमार, पी. एच. डी.

पूर्व परियोजना वैज्ञानिक, एनवायर्नमेंटल एपिडेमियोलॉजी डिवीज़न

आई. सी. एम. आर. – नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ मलेरिया रिसर्च, नई दिल्ली

ईमेल: [email protected]

twitter: @pra_bioin