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राजनीति से चोखा धंधा और कोई नहीं

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Omprakash Varma

ओमप्रकाश वर्मा

ब्लॉग। राजनीति से चोखा धंधा और कोई नहीं…जी हां! एक बार विधानसभा व लोकसभा का चुनाव जीत जाने के बाद देखो आपका धंधा दिनों-दिन कैसे फलता-फूलता है।

कोई भी गैर कानूनी व नियम विरुद्ध धंधा करो या कराओ, संबंधित अफसर कार्रवाई की हिम्मत जुटा ही नहीं पाता है और यदि कोई ईमानदार अफसर कार्रवाई करता है तो उसके खिलाफ भीड़ जुटाकर ट्रांसफर करा दिया जाता है।

मरती है तो बेचारी जनता, ये होते हैं प्रभावित गरीब: मजदूर, बेरोजगार, पिछड़े, दलित, 18 से 3० वर्ष की आयु के युवक एवं महिलाएं। इनके वोट बटोरना मुश्किल भरा काम नहीं है और उस क्षेत्र में जाति का बाहुल्य है तो वे वोट पक्के ही समझो। कांग्रेस ने जातिवाद का जहर हर जगह फैला रखा है।

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ये करते हैं जीत जाने के बाद…

चुनावों में किए गए वादों को भूल एमएलए एमपी और इन्हीं में से बने मंत्री बिना किसी रोकटोक व भय के बेशकीमती सरकारी भूमियों पर अवैध कब्जा, पुलिस की गिरफ्त में आए अपराधियों को संरक्षण, सरकारी व अर्द्ध सरकारी संस्थानों में लगे कार्मिकों के तबादले व पदस्थापन, ट्रक व बस के बेरोकटोक संचालन के लिए नाम का स्टीकर, पेट्रोल पंप व गैस एजेंसी का आवंटन, अवश्तीन केन्द्ग व कृषि फार्म स्थापित कर बिजली की चोरी, अगले चुनाव के दौरान जीत में संशय हो तो विपक्षी दल के उम्मीदवार से मोटी रकम, गैर कानूनी धंधे जुए-सट्टे के अड्डों का संचालन, अवैध शराब के ठेके, विधानसभा व लोकसभा में मुद्दे उठाने का पैसा, विधायक व सांसद निधि की राशि का कमीशन, निर्माण कार्यों के ठेके, घटिया निर्माण कार्य करने वालों से मोटा चंदा, अप्रदान खनिजों की खानों का आवंटन, रेत व बजरी का अवैध खनन जैसे तमाम गैर कानूनी व नियम विरुद्ध कार्य करने वालों को संरक्षण प्रदान करना ही प्राथमिकता होती है।


इस पर आपका क्या कहना है, इसमें कितना गलत और कितना सही है, बताने की कृपा करें।