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कूड़ा

वाह मिर्जापुर प्रशासन!! निस्तारण के बजाए, घाटों पर जलाया जा रहा है कूड़ा

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मिर्जापुर के गंगा घाट पर धुंए का ग़ुबार, सांस लेना मुश्किल….

Aslam Ali

असलम अली

 

 

 

 

 

 

मिर्जापुर: नगर से निकलने वाले कूड़े का निस्तारण करने की कोई व्यवस्था नहीं बनाई जा सकी है। सफाई कर्मचारी नगर से निकले कूड़े को न सिर्फ गंगा घाटों पर फेंक देते हैं बल्कि आग लगाकर उसे नष्ट करते हैं। स्थित यह होती है कि बदबू और धुएं से आसपास के रहने वाले लोगों को परेशानी होती है। साथ ही कई प्रकार की बीमारियां फैलने की आशंका बनी रहती है। सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी ने कूड़े को जलाने पर प्रतिबंध लगाया है।

केंद्र सरकार की ओर से स्वच्छ भारत अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत गांवों को ओडीएफ बनाने के साथ ही स्वच्छता पर बल दिया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ नगर पालिका की ओर से नगर से निकलने वाले कूड़े को नगर के बरिया घाट, पक्का घाट, कचहरी घाट आदि गंगा घाटों पर फेंका जा रहा है। इससे चारों तरफ दुर्गंध फैली रहती है। साथ ही कूड़ा जलाने से प्रदूषण बढ़ रहा है। कूड़ा निस्तारण के लिए 2012 में छह करोड़ की लागत से सिटी ब्लॉक के बिकना इटवा में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का निर्माण शुरू हुआ लेकिन यह अभी तक तैयार नहीं हो सका है। प्लांट के उपकरण जंग लगने से खराब हो रहे हैं।

नगर पालिका अध्यक्ष मनोज जायसवाल ने कहा कि कूड़ा निस्तारण जटिल समस्या है। कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था की जा रही है। नगर पालिका के कर्मचारियों को गंगा के किनारे कूड़ा नहीं फेंकने का निर्देश दिया गया है। गंगा घाटों पर कूड़ा फेंकने और जलता मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

पर्यावरणविद डा० श्यामनारायण सिंह ने कहा कि कूड़ा जलाने से कार्बन मोनो आक्साइड, सल्फर डाई आक्साइड जैसी खतरनाक गैस निकलती है। इस गैस से ही वातावरण में अम्ल वर्षा, ग्लोबल वार्मिंग होती है। इससे सांस लेने में भी लोगों को परेशानी होती है।