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कोर्ट के आदेश पर लंका पुलिस नें चीफ़ प्रॉक्टर रायना सिंह सहित 29 बीएचयू कर्मियों के खिलाफ दर्ज किया मामला

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20 मार्च को नरिया गेट स्थित आशीष कुमार सिंह की प्राईवेट प्रॉपर्टी में जबरन घुसकर तोड़फोड़, मारपीट, आगजनी का 29 बीएचयूकर्मियों पर आरोप; पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज न करने पर आशीष नें  CrPC की धारा 156(3) के तहत कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था…

Shabab Khan

शबाब ख़ान (वरिष्ठ पत्रकार)

 

 

 

 

 

 

वाराणसी: बीते 20 मार्च को आरोप है कि बीएचयू की चीफ़ प्रॉक्टर रायना सिंह 25-30 व्यक्तियों के साथ आशीष कुमार सिंह के घर में जबरन घुस गये थे और मारपीट, गाली-गलौच, धमकियां, आगजनी और घर में तोड़फोड़ की थी, अगले दिन पीड़ित व्यक्ति अाशीष कुमार सिंह नें लंका थानें में लिखित तहरीर देकर हमलावरों के खिलाफ एफ़आईआर दर्ज कर उनकी गिरफ़्तारी की मांग की थी, लेकिन काफी प्रयास के बाद भी पुलिस से जब प्राथमिकी दर्ज नही किया तो आशीष कुमार सिंह नें CrPC की धारा 156(3) के तहत कोर्ट में शपथपत्र दाखिल किया था।

जिससे मारपीट, गाली गलौज व तोड़फोड़ के आरोप में बीएचयू चीफ प्रॉक्टर प्रो. रॉयना सिंह, संपदा विभाग के लालबाबू पटेल समेत 29 लोगों के खिलाफ लंका थाना में मुकदमा दर्ज हो गया है। पुलिस ने यह कार्रवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर की गई। विवेचना में यदि मामला सही पाया गया तो बीएचयूकर्मियों पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है।

नरिया निवासी आशीष कुमार सिंह ने प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया था कि बीएचयू की चीफ प्रॉक्टर प्रो. रॉयना सिंह, संपदा विभाग के लालबाबू पटेल, मुख्य आरक्षाधिकारी संसार सिंह, सुरक्षाकर्मी विनोद सिंह व सुनील सिंह समेत 29 लोगों ने 20 मार्च को उनके घर पर आए।

आरोप है कि इस दौरान आशीष और उनके परिजनों की सभी ने मिलकर न सिर्फ पिटाई की बल्कि गाली गलौज भी किया। जाते समय लकड़ी की दुकान में आग लगा दी। इस मामले में उन्होंने विरोध किया तो उन्हें सुधर जाने की चेतावनी दी गई। इसके बाद वह लंका थाना गए और पुलिस से शिकायत की लेकिन उनकी एक न सुनी गई। बार-बार गुहार के बाद भी जब उनकी सुनवाई नहीं हुई तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट में सुनवाई के बाद पिछले दिनों मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पुलिस से विवेचना के बाद उचित कार्रवाई का आदेश जारी किया गया।

आदेश के क्रम में लंका इंस्पेक्टर संजीव मिश्रा ने करीब सप्ताह भर तक जांच पड़ताल की। पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। इंस्पेक्टर ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। घटनास्थल के आसपास के सीसी फुटेज के अलावा राहगीरों से भी पूछताछ की जा रही है। जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई होगी।

कोर्ट के आदेश पर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के बाद बीएचयू प्रशासन बैकफुट पर नजर आ रहा है। कोर्ट के आदेश के क्रम में कोई भी अधिकारी कुछ भी बोलने से कतराता रहा। हालांकि दबी जुबान में यह जरूर कहा जा रहा है कि नरिया स्थित आशीष कुमार सिंह का घर और दुकान दरअसल बीएचयू की प्रापर्टी है जिस पर आशीष नें अवैध रूप से कब्जा कर रखा गया। 20 मार्च को कारों और बाईक्स से बीएचयू कर्मी उससे वो जगह खाली कर देने को कहने गये थे, लेकिन आशीष नें वहां बवाल खड़ा दिया। खुद ही अपने घर में थोड़ी-बहुत तोड़फोड़ करके थानें पहुँच गया। एक बीएचयू कर्मी नें बिना अपना नाम बताये कहा कि ‘हम भी कोर्ट में अपना पक्ष रखेगें।’