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केंद्र सरकार ने 21 भ्रष्ट टैक्स अफसरों को जबरदस्ती रिटायर किया, जून से अब तक 85 अधिकारी सेवामुक्त

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New Delhi: भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्र सरकार की कड़ी कार्रवाई जारी है। उसने 21 भ्रष्ट टैक्स अधिकारियों को जबरदस्ती रिटायर कर दिया है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने यह जानकारी दी। इन पर गलत तरीकों से पैसा कमाने के आरोप थे।

सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने ग्रुप बी के 21 आयकर अधिकारियों को जबरदस्ती सेवानिवृति दी है। केंद्रीय सिविल सर्विसेस (पेंशन) रूल्स के नियम 56(जे) के तहत जनहित में इन अफसरों को रिटायर किया गया है। इन पर भ्रष्टाचार और दूसरे तरह के कई गंभीर आरोप थे। इनमें से कई के खिलाफ सीबीआई जांच भी चल रही थी।

सेवामुक्त किए गए अफसरों में से 64 वरिष्ठ 
भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों को हटाने की कार्रवाई जून में शुरू की गई थी। तब से अब तक 85 कर अधिकारियों को जबरन रिटायर कर सेवामुक्त किया जा चुका है। इनमें 64 वरिष्ठ अफसर भी शामिल हैं। इसमें 12 सीबीडीटी के हैं। इससे पहले सितंबर में सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (सीबीआईसी) के 15 अधिकारियों को जबरन रिटायर किया गया था।

सूत्रों ने बताया कि हाल ही में जिन अधिकारियों को जबरन रिटायर किया गया है, उनमें तीन सीबीडीटी के मुंबई ऑफिस और दो ठाणे जिले के हैं। इसके अलवा विशाखापत्तनम, हैदराबाद, राजमुंदरी, हजारीबाग, नागपुर, राजकोट, जोधपुर, माधोपुर और बीकानेर, भोपाल और इंदौर में तैनात अधिकारियों को सेवामुक्त किया गया है।

प्रधानमंत्री ने पहले ही कार्र‌‌‌वाई के संकेत दिए थे
भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ इस कार्रवाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले से दिए भाषण से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने कहा था कि, सिस्टम में कुछ ऐसे अफसर हो सकते हैं, जिन्होंने अपने पद का गलत इस्तेमाल करके करदाताओं को परेशान किया है। ये लोग ईमानदार करदाताओं के खिलाफ मामूली प्रक्रियात्मक उल्लंघन से जुड़े मामलों में जरूरत से ज्यादा कठोर कार्रवाई करते हैं।

ज्यादातर अधिकारी घूस लेते पकड़े गए

सेवानिवृत्त होने वाले आधे से अधिक अधिकारी ऐसे थे, जिन्हें सीबीआई ने गलत तरीके से फायदा लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था। इनमें से एक अधिकारी को 50 हजार रुपये की घूस लेते पकड़ा गया था। सूत्रों के मुताबिक एक अधिकारी के बैंक लॉकर में कथित तौर पर 20 लाख रुपये से ज्यादा की नकदी मिली थी, जबकि ठाणे में तैनात एक अफसर ने तो अपने और पत्नी के नाम पर 40 लाख रुपये की चल और अचल संपत्ति अर्जित की थी।

केंद्रीय सिविल सेवा नियम के तहत होती है काम की समीक्षा
सरकार ने इससे पहले जून में केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क (सीबीआईसी) के आयुक्त स्तर के 15 अधिकारियों को जबरन रिटायर कर दिया था। इन पर भ्रष्टाचार, रिश्वत लेने, तस्करी और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप लगे थे। केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1972 का रूल 56 (जे) सरकार को सरकारी कर्मचारियों के काम की समय-समय पर समीक्षा का अधिकार देता है। इसमें यह देखा जाता है कि कि संबंधित अधिकारी को सार्वजनिक हित में नौकरी पर रखा जाये या रिटायर कर दिया जाए।