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10 दिनों से पीएमसीएच में सफाई व्यवस्था ठप

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Raja Dey

राजा दे

धनबाद। पीएमसीएच में 10 दिनों से सफाई व कचरों (बायो वेस्ट) के निष्पादन की व्यवस्था ठप है। हालत यह है कि मरीजों को भारी दुर्गंध के बीच रहना पड़ रहा है। सबसे खराब स्थिति फीमेल मेडिसिन व किचेन के पास है। यहां कचरों का ढेर लग गया है। कचरों में दूषित सूई, खून के सैंपल, स्लाइड, ऑपरेशन के बाद की गंदगी आदि खुले में पड़े हैं।

भारी गंदगी से यहां महामारी फैलने की आशंका बनी हुई है। जबकि सफाई एजेंसी व प्रबंधन मामले में उदासीन बना हुआ है। मजेदार बात यह है कि समिति 12 वर्षों से यहां साफ-सफाई कर रही है। पिछली बार काम नहीं करने के कारण प्रबंधन ने आर्थिक दंड भी लगाया था।

संवेदनशील वार्डों के बगल में कचरा: पीएमसीएच के डेंगू के मरीज के लिए बनाये गये अति संवेदनशील आइसोलेशन वार्ड, टीबी से संक्रमित लोगों के वार्ड, सामान्य महिला वार्ड के बीच कचरा पड़ा हुआ है। ऐसे में बीमारी से ज्यादा यहां पड़े बायो वेस्ट ऐसे लोगों के लिए घातक साबित हो सकते हैं। कुछ दूरी पर मरीजों का खाना बनता है। कचरों से यहां के कर्मी भी खासे परेशान हैं. कचरों के पास की मक्खियां किचेन तक आ रही हैं।

10.5 लाख प्रति माह खर्च, सफाई के नाम पर कुछ नहीं : पीएमसीएच में साफ-सफाई का काम जगजीवन सहयोग समिति की ओर से की जाती है। सफाई के एवज में समिति प्रति माह सरकार से 10.5 लाख रुपये लेती है। कागजों पर समिति के 119 सफाई कर्मी हैं, लेकिन प्रबंधन की जांच में भी कई बार इसकी संख्या 30 से 40 के बीच मिली है।

पिछले दिनों सरकार की कड़ाई के बाद ट्रॉली व ट्रैक्टर से साफ-सफाई शुरू की गयी थी, लेकिन जनवरी से ट्रॉली से कचरा दूसरे जगहों पर निष्पादन करने की प्रक्रिया भी बंद हो गयी है। कई बार फटकार के बाद भी कोई बदलाव नहीं दिख रहा है।

अस्पताल में सफाई व्यवस्था असंतोषजनक : अधीक्षक 

पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ सिद्धार्थ सान्याल ने कहा है कि पीएमसीएच में साफ-सफाई असंतोष जनक है। वार्डों के निरीक्षण में कई जगहों पर गंदगी मिली थी। कई जगहों पर जमा कचरा देखा। संबंधित समिति को फटकार लगायी गयी है। समिति पर कार्रवाई की जायेगी।