Congress and BJP

कांग्रेस द्वारा जन आकांक्षा रैली एवं एनडीए द्वारा संकल्प रैली के साथ ही बिहार में बन चुका है चुनावी माहौल

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Hariom Kumar

हरिओम कुमार के विचार…

विचार। आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बिहार में चुनावी माहौल बन चुका है। बीते रविवार को एनडीए द्वारा संकल्प रैली की गई, जिसमें बिहार के एनडीए के लगभग सारे नेता मंच पर एक साथ नजर आए। एनडीए द्वारा इस संकल्प रैली से पहले कांग्रेस पार्टी द्वारा पटना में जन आकांक्षा रैली की गई थी, जिसमें विपक्ष के भी नेता मंच पर आए थे और मौजूदा सरकार पर हमला बोला था।

यानी बिहार की जनता के पास अब विपक्ष पार्टी द्वारा जन आकांक्षा रैली के माध्यम से संबोधित किए गए नेताओं के भाषण और एनडीए द्वारा संकल्प रैली के माध्यम से संबोधित किए गए नेताओं के भाषण को विश्लेषण करने की आवश्यकता है।

जहां एक ओर जन आकांक्षा रैली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मौजूदा सरकार पर हमला बोला। साथ ही बजट, राफेल, जीएसटी, नोटबंदी, 15 लाख जैसे कई मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए करारा हमला बोला।

वहीं एनडीए के संकल्प रैली में पीएम मोदी ने महागठबंधन पर तंज कसते हुए बोला कि यह महागठबंधन नहीं बल्कि महामिलावट है, साथ ही केंद्र सरकार और बिहार सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए जनता को बताया कि देश का चौकीदार चौकन्ना है।

पीएम मोदी द्वारा भी बिहार में न्याय के साथ विकास के एजेंडे को दोहराया गया। साथ ही संकल्प रैली के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साफ कर दिया कि अगले चुनाव में देश की सुरक्षा के साथ विकास ही मुद्दा रहेगा। लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान ने भी केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिनाई और काम के आधार पर नरेंद्र मोदी को फिर से पीएम बनाने की जनता से अपील की।

पक्ष- विपक्ष की नजर में:-

संकल्प रैली को भाजपा ने ऐतिहासिक बताया जबकि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस रैली को फ्लॉप बताया। वहीं राजद सुप्रीमो लालू यादव ने भी ट्विटर के माध्यम से तंज कसते हुए कहा कि “इतनी भीड़ तो हम पान की दुकान पर जुटा लेते हैं।” खैर पक्ष और विपक्ष द्वारा एक दूसरे पर रैली को लेकर खूब बयानबाजी हुई।

मुख्य बिंदु:-

कांग्रेस द्वारा आयोजित जन आकांक्षा रैली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के सुरक्षा को लेकर पुख्ता इंतजाम था, रैली स्थल (गांधी मैदान) के बाहर सारे फुटपाथ की दुकान बंद करा दिया गया था। जबकि पीएम मोदी की रैली में भी पुख्ता इंतजाम था। लेकिन रैली स्थल (गांधी मैदान) के बाहर की सारी दुकानें खुली हुई थी।

कांग्रेस की रैली में खाने-पीने का भी इंतजाम किया गया था। खास करके बाहुबली नेता अनंत सिंह द्वारा किया गया इंतजाम काफी चर्चा में रहा। वहीं एनडीए की रैली में भी खाने पीने का व्यवस्था किया गया था। लेकिन, बारिश होने की वजह से थोड़ी अनियमिताएं भी देखी गई।

कांग्रेस की रैली में लोगों द्वारा राहुल गांधी को पीएम बनाने की मांग की गई। साथ ही बिहार का सीएम तेजस्वी यादव को बनाने की मांग की गई, जबकि एनडीए की रैली में युवाओ द्वारा चिराग पासवान को मुख्यमंत्री बनाने की भी मांग की गई। यानी एनडीए की रैली से यह स्पष्ट हो गया कि चिराग पासवान की भी लोकप्रियता बढ़ी है।

कांग्रेस द्वारा बिहार में 28 साल के बाद रैली की गई थी। वहीं एनडीए की रैली भी पिछले 10 साल के बाद की गई है, जिसमें सीएम नीतीश कुमार और पीएम मोदी एनडीए के मंच पर नजर आए।

वहीं एनडीए के घटक दलों के कार्यकर्ताओं के बीच यह काफी चर्चा का विषय बना कि रैली में सबसे अधिक भीड़ किस पार्टी की थी।
मीडिया की नजर से देखा जाए तो रैली में जदयू का ज्यादा दबदबा दिखा।

भारत और पाकिस्तान के मुद्दे को लेकर पहली बार किसी चुनावी रैली में देशभक्ति का माहौल देखने को मिला था। पीएम मोदी की रैली में देशभक्ति गीत बजाए जा रहे थे।

साथ ही रैली के दौरान एवं रैली के बाद भी भारत माता के जयकारे लगाए जा रहे थे। रैली में देशभक्ति का माहौल देख पीएम मोदी ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि सारा विपक्ष मोदी को खत्म करना चाह रहा है जबकि मोदी आतंकवाद को खत्म करना चाह रहा है।

आपको बता दूं कि एनडीए के घटक दलों के बीच सीट शेयरिंग का फार्मूला लगभग तय हो चुका है। जबकि महागठबंधन में खींचतान अभी भी जारी है।