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पैरवी है तो होगी कोरेना वायरस के संक्रमण की जांच, वरना भटकते रह जाएंगे

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New Delhi: अगर आपके पास कड़ी पैरवी है तो आपका कोरोना जांच होगा अन्यथा आप भटकते रह जाएंगे। कोरोना जांच को लेकर के लोग अब पैरवी लगा रहे हैं। कोई डीपीएम के माध्यम से तो कोई सिविल सर्जन के माध्यम कोरोना जांच के लिए पैरवी कर रहे हैं। जिनकी की पैरवी नहीं है वह कोरोना जांच के लिए भटकते नजर आ रहे हैं।

समाहरणालय के कई कर्मी भी कोरोना जांच को लेकर के पैरवी लगा रहे हैं बिना पैरवी के उनकी जांच नहीं हो रही है। जिस अनुपात में सदर अस्पताल में कोरोना जांच को लेकर के लोग पहुंच रहे हैं उस अनुपात में जांच नहीं हो रही है। भाजपा के कई नेता को भी कोरोना जांच को लेकर के पैरवी करनी पड़ रही है। लेकिन उनकी जांच नहीं हो पा रही है। पिछले दिनों पूर्व जिलाध्यक्ष अभय बर्मन को एक कार्यकर्ता ने फोन कर बताया कि वह कोरोना जांच कराने के लिए सदर अस्पताल गए हैं लेकिन जांच नहीं हो रही है। अभय बर्मन ने सूबे के स्वास्थ्य मंत्री को फोन मिलाया लेकिन फोन नहीं मिलने के बाद उन्होंने ट्वीट कर पूरे मामले से स्वास्थ्य मंत्री को अवगत कराया। भारी संख्या में सरकारी कर्मचारी भी कोरोना जांच को लेकर के पैरवी लगा रहे हैं। कोई रेड क्रॉस सोसाइटी के माध्यम से तो कोई बड़े अधिकारियों के माध्यम से कोरोना जांच को लेकर के पैरवी कर रहे हैं, लेकिन उनकी जांच नहीं हो पा रही है। कहा जा रहा है कि जिनकी पैरवी तगड़ी है उनकी जांच तत्काल हो जा रही है लेकिन जिनके पास पैरवी नहीं है वे लाइन में खड़े हो करके लौट जा रहे हैं। कोरोना जांच रिपोर्ट के लिए भी लोगों को भटकना पड़ रहा है।

संक्रमित व्यक्ति के दाह संस्कार पर हो रहे आठ हजार खर्च

कोरोना वायरस से मरने वालों को जलाने में आठ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। पिछले 3 दिनों में कोरोना संक्रमित 4 लोगों के शव को बरारी श्मशान घाट पर जलाया गया है । खरीक, धोरैया, मोजाहिदपुर और विश्वविद्यालय के एक कर्मचारी का शव रेड क्रॉस सोसाइटी की ओर से बरारी श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। पिछले 3 दिनों से खरीक, मोजाहिदपुर व धोरैया इलाके के व्यक्ति का शव अस्पताल परिसर में पड़ा था।  सबके दाह संस्कार के लिए रेड क्रॉस सोसाइटी की ओर से बरारी श्मशान घाट के कर्मचारी को बुलाया गया था । कर्मी  ने प्रति शव जलाने के लिए आठ हजार रुपये लेने की बात कही। इसके बाद रोगी कल्याण समिति की बैठक हुई। बैठक में प्रति शव आठ हजार रुपये देना तय हुआ। दो हजार रुपये रोगी कल्याण समिति की ओर से और छह हजार रुपये रेडक्रॉस सोसाइटी की ओर से देने का निर्णय लिया गया। धोरैया और खरीक के व्यक्ति  शव जलाने की अनुमति उनके परिजनों ने दी थी। जबकि मोजाहिदपुर का लावारिस था। विश्वविद्यालय कर्मी के परिजन ने आठ हजार रुपये जमा कर दिए थे।