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Petrol bomb found in tahir hussain house

पार्षद ताहिर के घर तेजाब भरे ड्रम मिले, इन पर गंगाजल लिखा था; पड़ोसी बोले- दंगे में इसी का इस्तेमाल हुआ

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New Delhi: आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन के मौजपुर स्थित घर भारी मात्रा में सल्फ्यूरिक एसिड मिला है। घर के पास ही एक दुकान में तेजाब के बड़े ड्रम रखे थे, इन पर गंगाजल लिखा था। पड़ोसियों ने दावा किया है कि दंगे में इसी तेजाब का इस्तेमाल हुआ था। यह तेजाब इतना घातक है कि किसी व्यक्ति पर फेंकने के कुछ मिनटों में उसकी स्किन के साथ अंदरूनी अंगों तक को जला सकता है। यह एसिड आमतौर पर फैक्ट्रियों में ही इस्तेमाल होता है। इसे बिना लाइसेंस, आधार कार्ड और कारण बताए आसानी से नहीं ले सकते हैं।

दंगा केस की जांच कर रही एसआईटी के एक अधिकारी का कहना है कि तेजाब की 3 क्वालिटी में से यह सबसे घातक तेजाब है। हल्का तेजाब टॉयलेट साफ करने, दूसरा जंग लगे बर्तन के लिए और तीसरा मशीनों को साफ करने में इस्तेमाल किया जाता है। ताहिर के घर में तेजाब को थैलियां में भरकर रखा गया था। इतनी अधिक मात्रा में मिले तेजाब को किसी काम में प्रयोग के लिए नहीं लाया जा सकता। पार्षद ताहिर हुसैन के घर पर ऐसा कोई काम नहीं होता था, जिसमें इतने खतरनाक तेजाब का प्रयोग हो सके। यह केवल लोगों के ऊपर डालने के लिए थैलियों में भरकर रखा गया था। जिन्हें छत से फेंका जाना था, जिससे नीचे भीड़ में आसानी से एक थैली से 5-7 लोग जल सकें।

शरीर का 40% हिस्सा एसिड के प्रभाव में होने से मौत भी हो सकती है: डॉ. बंसल

आइएमए के पूर्व डॉक्टर अनिल बंसल का कहना है कि सल्फ्यूरिक तेजाब काफी घातक होता है। इसके संपर्क में आने से प्रभावित अंग को कुछ ही सेकेंड में जला देता है। सल्फ्यूरिक तेजाब जिस अंग को प्रभावित करता है, वह हड्डियों तक खराब कर देता है। इसके प्रभाव में शरीर का 40 प्रतिशत हिस्सा आने पर उसकी मौत भी हो जाती है। डॉक्टर का कहना है कि टॉयलेट साफ करने वाला तेजाब तो केवल उसके बैक्टीरिया मारने का काम आता है। लेकिन सल्फ्यूरिक बहुत ही खतरनाक होता है। करावल नगर में पार्षद ताहिर हुसैन के घर से कुछ ही दूरी पर फिरोज की तेजाब की फैक्ट्री है। दुकान दीपक बैैंड नाम से है। दुकान के आगे दिल्ली पुलिस का बोर्ड भी लगा हुआ है। अंदर तेजाब की फैक्ट्री है। तेजाब के बड़े बड़े ड्रमों पर गंगाजल लिखा हुआ है। इसका मालिक फिरोज खान है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मुस्लिम बहुल इलाकों में दंगाें से पहले तेजाब की सप्लाई की गई थी।

एसिड पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाया था बैन

क्राइम एक्सपर्ट एडवोकेट मनीष भदौरिया का कहना है कि दिल्ली में तेजाब खरीदना व बेचना बैन है। कोई तेजाब खरीदता है तो उस पर उसी अधिनियम के तहत घारा के मुताबिक मुकदमा होगा। फिर तेजाब को किस उपयोग के लिए खरीदा गया तो उसके अनुसार धाराएं लगेंगी। कोई व्यक्ति किसी के ऊपर फेंकने के लिए खरीदता है तो धारा 307, उससे मुंह या चेहरा खराब हो जाता है तो धारा 326, तेजाब को किसी पर फेंकने का प्रयास करता है तो धाराएं 107, 511 लगेंगी। इस तेजाब से किसी की मौत हो जाती है तो धारा 302 लगाई जाती है। जिसने पर तेजाब खरीदा है, पकड़े जाने पर वह सोर्स बताएगा कि किस जगह से खरीदा गया और किस काम में प्रयोग के लिए। एडवोकेट मनीष ने बताया कि चार-पांच साल पहले तक दिल्ली में तेजाब आसानी से मिल जाता था। लोग टॉयलेट साफ करने के लिए यूज में लेते थे। जब इसका दुरुपयोग होने लगा तो सु्प्रीम कोर्ट ने इस पर बैन लगा दिया था।

राहत: दंगा प्रभावित कई इलाकों में हालात हुए सामान्य, खुली दुकानें

नार्थ-ईस्ट के दंगा प्रभावित इलाकों में रविवार को हालात सामान्य नजर आए। इन इलाकों के अंदर और बाहर भी अधिकतर दुकानें खुली। लोग अपना जरूरत का सामान ले जा रहे थे। लेकिन अभी भी लोगों के मन में अभी भी डर का माहौल बना हुआ है। लोग आसपास के पड़ोसियों के साथ मिलकर रात भर जागकर पहरा देते रहते हैं। चांद बाग निवासी हसीना ने बताया कि रविवार सुबह से ही लोकल दुकानें खुलने लग गई थी। कुछ दुकानदार अपनी दुकान खोलने में झिझक रहे थे। लेकिन एक दूसरे की दुकान खुलता हुआ देख सब खोलने लगे। मौजपुर निवासी एक बुजुर्ग महिला रामरती ने बताया कि पिछले दो दिन से माहौल तो ठीक होता जा रहा है। पुलिस भी बाहर जाने दी रही है। दिन के समय अभी कोई परेशानी नहीं है। लेकिन रात के समय लोग जमा हो जाते हैं और पूरी रात भर जगे रहते हैं। उन्होंने बताया कि रात के समय डर बना रहता है कि दंगाई दुबारा आकर मारपीट शुरू न कर दें।  भजनपुरा निवासी नरेंद्र शर्मा ने बताया कि पिछले चार दिनों से हालात कुछ सही लग रहे है। कोई घटना भी सुनने में नहीं आई है। शनिवार को कहीं-कहीं पर एक दो दुकानें खोली गई थी। लेकिन रविवार को लोगों ने अधिकतर दुकानें खोली हैं। उन्होंने बताया कि हालात तो सामान्य हो रहे हैं, लेकिन लोगों को अभी भी डर बना हुआ है।

मौजपुर में हालात अभी नहीं सुधरे, सीआरपीएफ तैनात
दंगों मेंं काफी प्रभावित रहा मौजपुर में रविवार को बहुत ही कम दुकानें खुली नजर आई। मोहम्मद मुस्तफा का कहना है कि अभी यहां का माहौल सामान्य नहीं हुआ है। चारों तरफ पुलिस और सीआरपीएफ की टीम तैनात है। रोड पर पुलिस की मौजूदगी में ही एक दो दुकानें खुल रही है। लोग अभी भी दहशत के है। यहां पर बहुत अधिक हिंसा हुई थी। लोग दंगाइयों की भीड़ से उबर नहीं पा रहे है। लोगों में काफी गुस्सा है।

मदद: हिंसा पीड़ितों को मिलने लगी 25 हजार की सहायता राशि

उत्तर-पूर्वी जिला में फैली हिंसा में प्रभावितों को दिल्ली सरकार ने तत्काल राहत के रूप में 25-25 हजार रुपए की आर्थिक मदद देने का कार्य रविवार से शुरू कर दिया। हिंसा से प्रभावित सभी 4 सब डिवीजन में अधिकारियों ने पीड़ितों को तत्काल राहत देते हुए नकद राशि दी। यह राशि पीड़ितों के घर जाकर दी गई। साथ ही कुछ लोग एसडीएम दफ्तर आकर यह राशि ले गए। उधर, नुकसान का फार्म भरने का सिलसिला भी रविवार को चला। दंगे में मृतक परिवारों, जिनके घर जले हैं, उन परिवारों को तत्काल राहत देने के लिए 25-25 हजार रुपए नकद देने की भी घोषणा की थी, ताकि लोग अपना जीवन सुचारू रूप से चला सकें। इसके अलावा शेष राशि को कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद दी जाएगी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निर्देश पर शनिवार को ऐसे पीड़ित लोगों से आवेदन मांगे गए थे। शनिवार को करीब 69 लोगों ने आवेदन किया था।