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बांका एसपी स्वपना जी. मेश्राम बनीं युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत

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Lalit Kishor

ललित किशोर कुमार

बांका। कहते हैं कि खुशी के लिए काम करोगे, तो खुशी कभी नहीं मिलेगी। लेकिन, खुश होकर काम करोगे, तो खुशी और सफलता दोनों मिलेगी। इस कहावत को सच कर दिखाया है भारतीय पुलिस सेवा के एक महिला अधिकारी स्वपना जी. मेश्राम ने। जिन्होंने कम दिनों में ही युवक-युवती के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई।

आम लोगों के मन में सरकारी अधिकारीयों के लिए भले ही गलत धारणा बनीं हो, लेकिन हकीकत में न जाने कितने ऐसे अफसर है, जो अपनी अच्छी ईमानदार सोच और अपने सराहनीय काम की बदौलत हम सब का दिल जीत रहे हैं। मालूम हो बांका एसपी स्वपना जी. मेश्राम ने जैसे ही अपनी पद संभाली वैसे ही युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई।

खासकर लड़कीयों में मनोबल उंचा दिखने लगा। ज्ञात हो कि एसपी स्वपना जी मेश्राम ने बांका की कमान संभालने के साथ ही मजबूत पुलिसिंग की दिशा में काम करना शुरू कर दी। सभी थाना की पुलिस को 24 घंटे ऑन द रोड रहने का आदेश दे रखी है। ताकि किसी भी घटना के बाद पुलिस तुरंत कार्रवाई कर सके।

अपराधियों को बचने का कोई मौका नहीं मिले। इस पर शिथिलता बरतने वाले पुलिस पदाधिकारी को किसी कीमत पर नहीं बख्सा जाएगा। एसपी ने कहा कि पुलिस का काम लोगों के बीच शांति कायम करना है।

उनका प्रयास है कि पुलिस किसी कीमत पर इसमें चूक नहीं करे। सभी थाना की गश्ती 24 घंटा सड़कों पर दिखनी चाहिए। पुलिस सड़कों पर रहेगी तो अपराधी का हौसला ऐसे ही पस्त रहेगा। इन सभी कार्यों को को देखते हुए युवक-युवतीयों में पढ़ लिखकर आगे बढ़ने की होड़ सी लग गई है।

क्या कहती हैं छात्राएँ:-

छात्रा रिमझिम कुमारी ने बतायी कि जब से बांका एसपी स्वपना जी. मेश्राम ने पद संभाली है तब से हम लोगों में भी आगे बढ़ने की ललक बढ़ गयी है। उनकों देखकर मुझे भी आईपीएस, आईएएस तथा अन्य बड़े पोस्ट पर नौकरी करने के लिए संभावना बढ़ गई है। 

सुप्रिया कुमारी ने कही कि आज के युवाओं के लिए एसपी स्वपना जी. मेश्राम  प्रेरणा के स्त्रोत हैं।जितने वो अपराधियों व असामाजिक तत्वों के लिए कड़े तेवर रखती हैं,उतने ही नरम दिल इंसान भी है।

कहती है बांका एसपी:-

पुलिस अधीक्षक श्रीमती स्वपना जी. मेश्राम कहती है कि युवाओं को देश व समाज के प्रति जिम्मेदार बनाने की आवश्यकता है। देश की बागडोर युवाओं के कंधे पर है।देश की उन्नति व प्रगति में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। समाज की मुख्य धारा में शामिल होकर युवाओं को देश निर्माण में योगदान करने की आवश्यकता है। उनके परिश्रम एवं मेहनत से ही देश विश्व गुरु की उपाधि पा सकती है।

युवाओं की ताकत से देश की प्रगति के मार्ग पर प्रशस्त होगा। अपने व्यक्तिगत कारणों से मुंह मोड़ने की नहीं, बल्कि देश की उन्नति में योगदान करने की आवश्यकता है। स्वामी विवेकानंद से प्रेरणा लेकर युवा खुद को शक्ति के रूप में आगे आएं और देश के निर्माण में योगदान दें। युवा ठोस निर्णय लेकर देश हित में कार्य करें।