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हत्या

राजघाट बालू मंडी में 25 वर्षीय युवक का शव मिलने से क्षेत्र में दहशत का माहौल

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भदंऊ डाट का पुल बन चुका है अपराधियों की सैरगाह, जागना होगा आदमपुर चौकी इंचार्ज मनोज कुमार को…

–ताबिश अहमद

वाराणसी: जी हाँ, भदंऊ चुंगी से राजघाट पुल के बीच का फासला अपराधियों, जुआरियों, छिनौतों के लिए एक सेक्योर ज़ोन बन चुका है, कभी दिन-दहाड़े लूट, कभी हत्या कर लाश को ठिकाने लगानें वाले अपराधी यहाँ आते हैं और वारदात को अंजाम देकर बड़े आराम से निकल जाते है। खास बात यह है कि भदंऊ चुंगी और बसंता कॉलेज मोड़ पर आदमपुर थानें की पिकेट व्यावस्था है, लेकिन हौसला बुलंद अपराधी दोनों पिकेट के बीच के सुनसान और खुले इलाके का पूरा फायदा उठाते हैं।

आदमपुर पुलिस को आज सूचना मिली थी राजघाट डाट पुल बालू मंडी के पास सड़क किनारे एक युवक की बॉडी पड़ी। चाकचौबंद आदमपुर थानाध्यक्ष अजीत कुमार मिश्रा आनन-फानन में घटनास्थल पर पहुँचे और मौका-ए-वारदात का मुआयना कर बॉडी को पोस्टमार्टम के लिये भिजवा दिया।

मृतक के पास मिले आधार कार्ड से उसकी शिनाख्त शंकर खरवार पुत्र राजेंद्र खरवार निवासी B22/179, किरहिया, खोजवां, वाराणसी के रूप में हुयी। पुलिस नें उसके परिवार को घटना की जानकारी देकर बुलाया।

मृतक के बड़े भाई अनूप खरवार ने बताया कि शंकर खरवार शनिवार शाम 6:00 बजे घर से कह कर निकला की मिट्टी में घाट पर जा रहा हूँ, घाट से जब घर वापस आया तो कुछ देर बाद घर पर रुकने के बाद पाण्डेयपुर जानें की बात कह कर घर से निकला। रात 9:00 बजे के आसपास मित्र राजेश नें शंकर खरवार के मोबाइल पर फोन किया तो किसी महिला ने फोन उठाया उसके बाद से मोबाइल बंद हो गया।

शंकर खरवार तीन भाई, चार बहनों में दूसरे नंबर का है। मृतक शंकर खरवार की अभी शादी नहीं हुई है। मृतक शंकर खरवार शादी ब्याह में मॉकटेल, सोडा शिकंजी और जूस का स्टाल लगाता था।

मृतक शंकर खरवार के गर्दन पर बाई तरफ चोट के निशान थे तथा उसका जूता और मोबाइल डेड बॉडी के पास से बरामद नहीं हुआ। आदमपुर इंस्पेक्टर अजीत मिश्रा ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद ही पता चलेगा कि मौत का कारण क्या है।

फिलहाल मृतक के भाई की तहरीर पर अज्ञात हत्यारे के विरुद्ध 302 IPC के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया।

बताते चलें कि क्षेत्रीय मीडियाकर्मी और नागरिक अादमपुर चौकी इंचार्ज मनोज कुमार पर उंगली उठा रहें हैं। उनका कहना है कि इसी चौकी के इंचार्ज रहे जय श्याम शुक्ला व उनके बाद आये विजय प्रताप सिंह के कार्यकाल के दौरान इस तरह की कोई घटना नही हुयी क्योकि यह पुलिसकर्मी अपनें काम के प्रति सजग थे तथा रात में कई बार इस रूट पर स्वंय गश्त करते थे, जबकि मौजूदा चौकी इंचार्ज के साथ ऐसा नही है।