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वेतन चोरी मामले में 15 साल बाद भी नहीं भेजा जा सका रिपोर्ट

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Anil Upadhyay

अनिल उपाध्याय

देवास। लोक शिक्षण संचनालय भोपाल ने कार्यालय महालेखाकार ग्वालियर के द्वारा 4 अप्रैल को जारी किए गए पत्र के आधार पर प्रदेश के जिला शिक्षा अधिकारियों से 104 स्कूल में हुई हानि, गवन, चोरी की जानकारी मांगी है। इसी तरह देवास जिला शिक्षा अधिकारी सी वी केवट से जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सुन्द्रेल में शिक्षकों के चोरी हुए वेतन की जानकारी मांगी है।
पत्र के माध्यम से महालेखाकार ने स्कूल शिक्षा विभाग के तहत लंबित हानि, गबन, चोरी के प्रकरण की सूची भेजी हे। सुन्द्रेल के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 1 सितंबर 2009 को शिक्षकों का वेतन तिजोरी से 1 लांख 51हजार 138 रूपए चोरी हो गए थे। राशि चोरी होने के बाद कांटा फोड़ थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई और मामला न्यायालय में पहुंच गया था।

सूत्रों के अनुसार न्यायालय में मामला पहुंचने के बाद इस केस में खात्मा कर दिया गया। किंतु अभी तक सुन्द्रेल के प्राचार्य को खात्मा रिपोर्ट नहीं मिल सकी। वहीं खात्मा रिपोर्ट नहीं मिलने से महालेखाकार ग्वालियर के अलावा लोक शिक्षण संचालक भोपाल के द्वारा बार-बार जिला शिक्षा अधिकारी देवास को पत्र जारी किए जा रहे है।

हाल ही में फिर से रिपोर्ट मांगने के लिए पत्र भेजा गया हे। इधर सुन्द्रेल के प्राचार्य माणक पाठक को खात्मा रिपोर्ट नहीं मिल पा रही है।
स्कूल शिक्षा विभाग को रिपोर्ट नहीं मिलने से सुन्द्रेल का मामला अभी तक अटका हुआ है। हालांकि चोरी की होने के बाद स्कूल के शिक्षकों को वेतन मिल गया था।
स्कूल की तिजोरी से वेतन चोरी होने के बाद वहां पर पढ़ाने वाले शिक्षक चिंता में आ गए थे। उन्हें 2 साल बाद वेतन मिला था। रिपोर्ट दर्ज करवाने के बाद मामला न्यायालय में चला। उसके बाद ही भोपाल ट्रेजरी से अगस्त 2009 का वेतन शिक्षकों को जारी हुआ था। सुन्द्रेल स्कूल में उस समय प्राचार्य खलील अहमद मंसूरी थे।

जो वर्तमान में सोनकच्छ के उत्कृष्ट स्कूल में व्याख्याता के पद पर पदस्थ हे। वेतन चोरी होने के मामले में 2 शिक्षक भी निलंबित हो गए थे। जो बाद में जांच के बाद बहाल कर दिए गए। शिक्षकों का तबादला भी हो गया। किंतु अभी तक खात्मा रिपोर्ट स्कूल के वर्तमान टीचर को नहीं मिल पा रही है। इधर संचालनालय भोपाल में जिला स्तर पर इस मामले में की गई कार्रवाई का विस्तृत प्रतिवेदन 7 दिन के अंदर मांगा है।